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यूपी राज्यसभा चुनाव: 10 सीटों का गणित, बीजेपी को 8 और सपा को 2 सीटों की बढ़त; तीसरी सीट पर पेच

Mohammad Naved • 2026-09-23 11:36:34
यूपी राज्यसभा चुनाव: 10 सीटों का गणित, बीजेपी को 8 और सपा को 2 सीटों की बढ़त; तीसरी सीट पर पेच

उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा। 397 प्रभावी विधायकों के आधार पर एक सीट के लिए 37 वोट जरूरी हैं। मौजूदा संख्या बल सपा को 2 सीटों की स्थिति में रखता है, जबकि तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।

📍 लखनऊ
🗓️ 23 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved

यूपी में राज्यसभा चुनाव की तारीख तय

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा और उसी दिन मतगणना भी की जाएगी। इन सीटों में 9 सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा हो रहा है, जबकि एक सीट दिनेश शर्मा के इस्तीफे के बाद पहले से रिक्त है।

मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन की स्थिति मजबूत है। वहीं समाजवादी पार्टी 2 सीटें हासिल करने की स्थिति में दिखाई दे रही है। तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। यह पूरा मामला मौजूदा संख्या बल, गठबंधन और मतदान के दौरान विधायकों के रुख पर निर्भर करेगा।

397 विधायक और 37 वोट का कोटा

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। फिलहाल 6 सीटें रिक्त हैं, इसलिए प्रभावी संख्या 397 विधायक है। राज्यसभा चुनाव में एक सीट के लिए आवश्यक कोटा 37 वोट बनता है।

गणित को आसान तरीके से समझें तो 397 को 11 से भाग देने पर 36 से कुछ अधिक संख्या आती है। राज्यसभा के निर्धारित कोटे के अनुसार 37 प्रथम वरीयता मत एक उम्मीदवार के निर्वाचन के लिए जरूरी होते हैं।

इसका सीधा असर 10 सीटों के चुनाव पर पड़ता है। किसी दल को जितनी सीटें निकालनी होंगी, उसके लिए उसी अनुपात में प्रथम वरीयता वोटों का प्रबंध करना होगा।

बीजेपी गठबंधन के पास कितने विधायक

मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी के पास 256 विधायक हैं। अपना दल सोनेलाल के 13, राष्ट्रीय लोकदल के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक बताए गए हैं। इन दलों को जोड़ने पर गठबंधन के पास 289 विधायक होते हैं।

इसके अलावा जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के 2 विधायक और कुछ निर्दलीय विधायकों के समर्थन को लेकर भी अलग-अलग राजनीतिक आकलन सामने आ रहे हैं। इसी वजह से बीजेपी गठबंधन की संभावित सीट संख्या पर रिपोर्टों में थोड़ा अंतर दिखाई देता है।

मौजूदा संख्या बल के आधार पर बीजेपी के 7 उम्मीदवारों की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। 8वीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना जरूरी होगा।

सपा के पास 101 विधायक

समाजवादी पार्टी के पास मौजूदा विधानसभा में 101 विधायक हैं। कांग्रेस के 2 विधायक अलग से हैं। अगर कांग्रेस का समर्थन सपा को मिलता है तो सपा समर्थक खेमे की संख्या 103 तक पहुंचती है।

दो राज्यसभा सीटों के लिए 74 वोट जरूरी होंगे। इस लिहाज से 103 का आंकड़ा दो सीटों के लिए पर्याप्त है। यही वजह है कि मौजूदा संख्या बल के आधार पर सपा की 2 सीटों का दावा मजबूत दिखाई देता है।

लेकिन तीसरी सीट के लिए गणित बदल जाता है। 3 सीटों के लिए 111 वोट चाहिए। सपा और कांग्रेस के 103 विधायकों के आधार पर 8 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी।

अखिलेश यादव के सामने तीसरी सीट का सवाल

सपा के लिए तीसरी सीट हासिल करने की राह संख्या बल से शुरू होकर समर्थन जुटाने तक जाती है। मौजूदा आंकड़ों में पार्टी के पास 101 विधायक हैं। कांग्रेस के 2 विधायकों का समर्थन मिलने पर संख्या 103 होगी।

इसके बाद तीसरी सीट के लिए 8 और वोटों की जरूरत होगी। यही वह अंतर है, जहां दूसरे दलों और असंबद्ध विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि किस विधायक का समर्थन किस उम्मीदवार को मिलेगा, यह अभी अंतिम रूप से तय नहीं है।

कुछ राजनीतिक रिपोर्टों में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के विधायकों और निर्दलीय विधायकों को संभावित निर्णायक समूह के तौर पर देखा गया है। लेकिन इनके मतदान को लेकर अंतिम स्थिति चुनाव के दौरान ही स्पष्ट होगी।

10वीं सीट पर असली मुकाबला

राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव में संख्या बल के हिसाब से मुख्य सवाल 8वीं बीजेपी सीट और तीसरी सपा सीट के आसपास केंद्रित है।

बीजेपी गठबंधन के पास 289 घोषित विधायक हैं। यदि अन्य समर्थक विधायकों को भी साथ माना जाए तो संख्या और बढ़ सकती है। दूसरी तरफ सपा और कांग्रेस के पास 103 विधायक हैं। इस अंतर के कारण दोनों खेमों को अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश करनी होगी।

इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी की स्थिति भी अलग है। विधानसभा में उसके पास कोई विधायक नहीं है और मौजूदा राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम का कार्यकाल भी नवंबर में समाप्त हो रहा है। ऐसे में पार्टी की राज्यसभा में मौजूदा प्रतिनिधित्व बनाए रखने की स्थिति संख्या बल से बेहद कमजोर है।

उम्मीदवारों और नामांकन की तस्वीर

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन की प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी और नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर निर्धारित है। मतदान और मतगणना 16 अक्टूबर को होगी।

फिलहाल उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी। इसलिए मौजूदा सीटों का आकलन संख्या बल पर आधारित है, इसे अंतिम चुनाव परिणाम नहीं माना जा सकता।

क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक रणनीति अहम

राज्यसभा चुनाव प्रत्यक्ष जनमत से नहीं होता। इसमें निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं और आनुपातिक प्रतिनिधित्व तथा एकल संक्रमणीय मत प्रणाली लागू होती है। इसलिए उम्मीदवारों की जीत में पार्टी के संख्या बल के साथ प्रथम वरीयता मतों का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण रहता है।

अतीत में उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग और अंतिम समय में समर्थन बदलने की घटनाएं राजनीतिक गणित को प्रभावित करती रही हैं। हालांकि मौजूदा चुनाव में ऐसी किसी घटना को पहले से तय मानना उचित नहीं होगा।

2027 से पहले शक्ति प्रदर्शन

राज्यसभा चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले वर्ष प्रस्तावित हैं। इसलिए यह चुनाव पार्टियों के लिए संगठनात्मक अनुशासन, गठबंधन प्रबंधन और विधायकों के बीच तालमेल की परीक्षा भी बनेगा।

राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला मुकाबला संख्या के लिहाज से सीमित है, लेकिन इसके राजनीतिक संकेत व्यापक हो सकते हैं। बीजेपी के लिए 8वीं सीट और सपा के लिए तीसरी सीट का संघर्ष दोनों दलों की रणनीतिक क्षमता को परखेगा।


उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में फिलहाल संख्या बल का सबसे साफ संकेत यह है कि 2 सीटें सपा के खाते में जाने की स्थिति मजबूत है, जबकि बीजेपी गठबंधन के लिए 7 सीटों का गणित मजबूत और 8वीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जरूरी है।

सपा की तीसरी सीट के लिए 111 वोटों का आंकड़ा निर्णायक है। 101 सपा और 2 कांग्रेस विधायकों के आधार पर 8 अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। इसलिए अखिलेश यादव के सामने चुनौती केवल उम्मीदवार तय करने की नहीं, बल्कि अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाने की भी है। अंतिम तस्वीर नामांकन, उम्मीदवारों की संख्या और मतदान के दिन विधायकों के वास्तविक रुख के बाद ही साफ होगी।

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Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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