UP राज्यसभा चुनाव: 2 टिकट पर कई दावेदार, फिर रामगोपाल यादव पर क्यों टिका अखिलेश का भरोसा?
Mohammad Naved
•
2026-09-29 11:57:54
राज्यसभा की 2 सीटें, दावेदार कई, रामगोपाल यादव पर अखिलेश की पहली मुहर क्यों?
सपा के राज्यसभा प्लान में रामगोपाल यादव सबसे आगे, क्या है अखिलेश की रणनीति?
UP राज्यसभा चुनाव: रामगोपाल यादव की वापसी क्यों तय मानी जा रही है?
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लखनऊ, उत्तर प्रदेश
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29 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
Introduction
उत्तर प्रदेश की सियासत में राज्यसभा चुनाव ने समाजवादी पार्टी के भीतर टिकट को लेकर नई हलचल पैदा कर दी है। 10 सीटों पर होने वाले चुनाव में सपा के पास अपने मौजूदा विधानसभा संख्याबल के आधार पर 2 सीटों का मजबूत गणित है। इसके बावजूद पार्टी तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की रणनीति पर भी आगे बढ़ रही है।
इसी सियासी तस्वीर के बीच सबसे महत्वपूर्ण नाम प्रोफेसर रामगोपाल यादव का सामने आया है। सपा विधायक दल की बैठक में उनकी दोबारा राज्यसभा उम्मीदवारी पर सहमति की जानकारी सामने आई। इसके साथ पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन और तीसरे उम्मीदवार के तौर पर सलीम इकबाल समेत दूसरे नामों पर चर्चा की खबरें हैं।
सवाल यही है कि कई दावेदारों के बीच रामगोपाल यादव पर भरोसा क्यों कायम रहा?
Essential Facts
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होगा। नामांकन की प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होकर 6 अक्टूबर तक चलेगी। मौजूदा कार्यकाल पूरा करने वाले सदस्यों में सपा के रामगोपाल यादव भी शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की कुल 31 सीटें हैं। विधानसभा के निर्वाचित सदस्य राज्यसभा चुनाव में मतदान करते हैं और चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व तथा सिंगल ट्रांसफरेबल वोट प्रणाली से होता है।
मौजूदा राजनीतिक समीकरण में सपा के लिए 2 सीटों का गणित मजबूत माना जा रहा है। तीसरी सीट के लिए उसे अपने विधायकों के अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। यही वजह है कि तीसरे उम्मीदवार का चयन पार्टी की व्यापक चुनावी रणनीति से जुड़ा हुआ है।
Main Development
सपा की विधायक दल बैठक में रामगोपाल यादव का नाम सबसे पहले चर्चा में आने की बात सामने आई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी ने उन्हें फिर से उच्च सदन भेजने पर सहमति बनाई है।
यह फैसला ऐसे वक्त हुआ है जब पार्टी के भीतर राज्यसभा के लिए कई नाम चर्चा में थे। पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन का नाम दूसरे उम्मीदवार के तौर पर सामने आया। तीसरे उम्मीदवार के लिए सलीम इकबाल शेरवानी और कुछ दलित चेहरों पर भी विचार की बात रिपोर्ट हुई है।
अभी एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है। 29 सितंबर को नामांकन प्रक्रिया शुरू हुई है। इसलिए अंतिम उम्मीदवारों की स्थिति नामांकन और उसके बाद होने वाली जांच से ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
रामगोपाल यादव क्यों?
रामगोपाल यादव की दावेदारी का पहला आधार उनका लंबा संसदीय अनुभव है। वह सपा के वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता और मौजूदा राज्यसभा सदस्य हैं। उनका वर्तमान कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को पूरा होना है।
दूसरा पहलू संगठनात्मक भूमिका है। रामगोपाल यादव लंबे समय से पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति और संसदीय रणनीति से जुड़े रहे हैं। इसलिए उनकी वापसी का फैसला पार्टी के लिए किसी नए प्रयोग की तुलना में निरंतरता वाला विकल्प दिखाई देता है।
तीसरा पहलू चुनावी गणित है। सपा के पास 2 सीटों का मजबूत आधार है। ऐसे में कम से कम एक सीट पर पार्टी अपने अनुभवी मौजूदा सांसद को दोबारा भेजकर संसदीय प्रतिनिधित्व में निरंतरता बनाए रखना चाहती है, ऐसी रिपोर्ट सामने आई है।
अखिलेश के लिए यह फैसला क्यों अहम है?
अखिलेश यादव के सामने इस चुनाव में केवल उम्मीदवार चुनने का सवाल नहीं है। उन्हें संगठन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति के बीच संतुलन बनाना है।
सपा की राजनीति में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व एक प्रमुख राजनीतिक नैरेटिव रहा है। राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में भी पार्टी के भीतर इसी सामाजिक समीकरण को लेकर चर्चा होने की खबरें हैं।
ऐसे में रामगोपाल यादव की उम्मीदवारी और बाकी सीटों के लिए अलग सामाजिक तथा राजनीतिक चेहरों पर विचार को एक व्यापक बैलेंसिंग रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। यह एक राजनीतिक विश्लेषण है, पार्टी की ओर से घोषित कारण नहीं।
तीसरी सीट का पेच
असल दिलचस्पी तीसरी सीट को लेकर है।
सपा अपने मौजूदा संख्याबल के आधार पर 2 उम्मीदवारों को जिताने की स्थिति में बताई जा रही है। तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। रिपोर्टों में यह संख्या लगभग 10 विधायकों के अंतर के रूप में सामने आई है।
इसी वजह से तीसरे उम्मीदवार का चयन केवल व्यक्तिगत दावेदारी का मामला नहीं रहेगा। उम्मीदवार के पास दूसरे दलों के विधायकों का समर्थन जुटाने की राजनीतिक क्षमता कितनी है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
कुछ रिपोर्टों में सलीम इकबाल शेरवानी, कुछ दलित नेताओं और दूसरे नामों पर चर्चा का उल्लेख है। लेकिन तीसरे उम्मीदवार के बारे में अंतिम स्थिति नामांकन के बाद ही स्पष्ट मानी जानी चाहिए।
राजनीतिक संदर्भ
यह चुनाव उत्तर प्रदेश की आगामी विधानसभा राजनीति से पहले हो रहा है। राज्यसभा में जाने वाले उम्मीदवार केवल उच्च सदन की संख्या नहीं बदलेंगे, बल्कि पार्टियों के सामाजिक और राजनीतिक संदेश को भी प्रभावित करेंगे।
सपा के लिए चुनौती दो स्तरों पर है। एक तरफ उसे अपने मजबूत 2 सीटों के गणित को सुरक्षित रखना है। दूसरी तरफ तीसरी सीट के जरिए विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन और सहयोगी समर्थन की क्षमता का परीक्षण करना है।
भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास विधानसभा में बड़ा संख्याबल है। उपलब्ध चुनावी गणित के आधार पर 10 में से कई सीटों पर उनका दावा मजबूत है। इसलिए राज्यसभा चुनाव में अंतिम मुकाबला विधानसभा की मौजूदा संख्या और उम्मीदवारों की रणनीति दोनों से तय होगा।
महत्वपूर्ण तारीखें
29 सितंबर 2026 से नामांकन शुरू होगा।
6 अक्टूबर 2026 नामांकन की अंतिम तारीख है।
7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी।
9 अक्टूबर तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे।
16 अक्टूबर 2026 को मतदान और मतगणना होगी।
What Happens Next
अब सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम नामांकन है। रामगोपाल यादव के साथ कौन-कौन उम्मीदवार पर्चा दाखिल करते हैं, इससे सपा की वास्तविक रणनीति स्पष्ट होगी।
अगर पार्टी तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है, तो मुकाबला अतिरिक्त समर्थन और वरीयता मतों के प्रबंधन पर निर्भर करेगा। ऐसे में क्रॉस-वोटिंग की अटकलें भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन सकती हैं, लेकिन किसी विधायक के वास्तविक क्रॉस-वोट के बिना ऐसी संभावना को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
Conclusion
रामगोपाल यादव की उम्मीदवारी को फिलहाल सपा की राज्यसभा रणनीति में सबसे स्पष्ट हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनके नाम पर विधायक दल की बैठक में सहमति बनी है। उनके अनुभव और पार्टी की संसदीय रणनीति में लंबे समय से भूमिका इस चयन के प्रमुख संदर्भ हैं।
लेकिन राज्यसभा चुनाव की पूरी तस्वीर अभी बाकी है। 2 सीटों का मजबूत गणित सपा के सामने मौजूद है, जबकि तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। इसलिए असली सियासी कहानी केवल रामगोपाल यादव की वापसी नहीं, बल्कि उनके साथ चुने जाने वाले बाकी चेहरों और तीसरी सीट के लिए पार्टी की रणनीति में छिपी है।
29 सितंबर से शुरू हुई नामांकन प्रक्रिया अगले कुछ दिनों में इस सियासी तस्वीर को और स्पष्ट करेगी।
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Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।