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ईरान की चेतावनी के बाद कतर से अमेरिकी सैनिकों की वापसी

None 2026-01-15 15:23:01
ईरान की चेतावनी के बाद कतर से अमेरिकी सैनिकों की वापसी

अमेरिका की मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के   दरमियान अल उदीद बेस पर सतर्कता

 ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच कतर स्थित अल उदीद बेस से कुछ अमेरिकी कर्मियों को हटाया जा रहा है। इसे सतर्कता स्तर में बदलाव के तौर पर बताया गया है।

📍 Washington ✍️ Asif Khan 

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

मिडिल ईस्ट रीजन में हालात तेज़ी से बदल रहे हैं। ईरान और अमेरिका के दरमियान तनातनी एक नए लेवल पर पहुंचती दिख रही है। तेहरान में जारी सरकार विरोधी प्रोटेस्ट और उन पर हो रही कार्रवाई के बीच वॉशिंगटन की तरफ़ से दिए गए बयानों ने रीजनल सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी बैकग्राउंड में अमेरिका ने कतर में मौजूद अपने सबसे बड़े मिलिट्री एयरबेस अल उदीद से कुछ कर्मियों को हटाने का फैसला किया है।

यह स्टेप फुल स्केल निकासी नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक “पोश्चर चेंज” यानी सतर्कता के लेवल में बदलाव बताया गया है। ऑफिशियल सोर्सेज़ के मुताबिक यह फैसला संभावित खतरे को देखते हुए एहतियातन लिया गया है।

कतर का अल उदीद बेस

कतर में स्थित अल उदीद एयरबेस मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा मिलिट्री इंस्टॉलेशन है। यहां हज़ारों अमेरिकी aap सैनिक, टेक्निकल स्टाफ और सपोर्ट पर्सनल तैनात रहते हैं। यह बेस रीजन में एयर ऑपरेशंस, सर्विलांस और लॉजिस्टिक्स का मेजर सेंटर माना जाता है।

तीन राजनयिक सोर्सेज़ के हवाले से बताया गया है कि कुछ मिलिट्री और नॉन-मिलिट्री कर्मियों को बुधवार शाम तक बेस छोड़ने की सलाह दी गई थी। हालांकि बड़े पैमाने पर फोर्स रिडक्शन जैसी कोई घोषणा नहीं की गई है।

ईरान की चेतावनी

ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि अगर अमेरिका उसकी सरज़मीं पर कोई सैन्य कार्रवाई करता है या मौजूदा प्रोटेस्ट में दख़ल देता है, तो वह मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा।

ईरानी ऑफिशियल्स के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, तुर्की और कतर जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी बेस इस दायरे में आएंगे। तेहरान ने इन देशों को भी चेताया है कि उनकी ज़मीन पर मौजूद अमेरिकी फोर्सेज़ पर हमला किया जा सकता है।

पिछले साल का मिसाइल अटैक

पिछले साल ईरान ने अपने न्यूक्लियर इंस्टॉलेशंस पर अमेरिकी एयर स्ट्राइक्स के जवाब में कतर पर मिसाइल अटैक किया था। उस हमले में अल उदीद बेस को टारगेट किया गया था।

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ईरान ने कुल 19 मिसाइलें दागी थीं। कतर की एयर डिफेंस ने उनमें से 18 को हवा में ही नष्ट कर दिया था। एक मिसाइल बेस के कम्युनिकेशन डोम से टकराई थी, लेकिन कोई बड़ा नुकसान रिपोर्ट नहीं हुआ था।

अमेरिका का रिएक्शन

वॉशिंगटन ने ईरान की चेतावनियों और पिछले हमले को देखते हुए अपनी सिक्योरिटी रिव्यू तेज़ कर दी है। ऑफिशियल्स का कहना है कि मौजूदा मूव का मकसद कर्मियों की सेफ्टी सुनिश्चित करना है।

अमेरिकी मिलिट्री की तरफ़ से यह भी कहा गया है कि बेस पर ऑपरेशंस जारी रहेंगे और रीजनल सिक्योरिटी पर नज़र रखी जा रही है।

ट्रंप के बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में चल रहे प्रोटेस्ट को लेकर सख़्त बयान दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर वहां प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई या हिंसा जारी रही, तो अमेरिका “बहुत कड़ी कार्रवाई” करेगा।

एक टीवी इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “अगर उन्होंने लोगों को फांसी दी, तो आप कुछ ऐसा देखेंगे जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।” उन्होंने ईरानियों से सड़कों पर डटे रहने और संस्थानों पर क़ब्ज़ा करने की अपील भी की है और कहा है कि “मदद रास्ते में है।”

ईरान में हालात

मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक ईरान में हालिया प्रोटेस्ट के दौरान अब तक करीब 2600 लोगों की मौत हो चुकी है। यह पिछले कई सालों में इस्लामिक हुकूमत के खिलाफ़ सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन बताए जा रहे हैं।

इन प्रोटेस्ट के चलते देश के कई शहरों में इंटरनेट शटडाउन, गिरफ्तारियां और कर्फ़्यू जैसे हालात देखे गए हैं।

डिप्लोमैटिक चैनल बंद

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची और अमेरिका के स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ के बीच चल रही डायरेक्ट बातचीत भी फिलहाल सस्पेंड कर दी गई है। दोनों देशों के बीच इस चैनल को तनाव कम करने का एक रास्ता माना जा रहा था, लेकिन मौजूदा हालात में यह संपर्क रोक दिया गया है।

ईरानी ऑफिशियल्स का कहना है कि जब तक अमेरिका की तरफ़ से धमकी भरे बयान जारी रहेंगे, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।

इजरायल की भूमिका

एक इजरायली ऑफिशियल के हवाले से कहा गया है कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने हस्तक्षेप का फैसला कर लिया है, हालांकि उसकी टाइमलाइन और स्कोप अभी साफ नहीं है।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सिक्योरिटी कैबिनेट को भी हालात की गंभीरता पर ब्रीफ किया गया है। पिछले साल ईरान और इजरायल के बीच 12 दिन चली जंग में अमेरिका भी शामिल हुआ था।

रीजनल सिक्योरिटी पर असर

खाड़ी देशों में अमेरिकी बेस रीजनल सिक्योरिटी का अहम हिस्सा माने जाते हैं। इन ठिकानों से एयर पेट्रोलिंग, इंटेलिजेंस और लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलता है।

कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने फिलहाल अपने यहां अमेरिकी फोर्सेज़ की सुरक्षा बढ़ा दी है। लोकल अथॉरिटीज़ के मुताबिक एयर डिफेंस और बेस सिक्योरिटी को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

आगे की स्थिति

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव का असर पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ सकता है। कतर से कुछ अमेरिकी कर्मियों का हटना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वॉशिंगटन संभावित खतरों को लेकर तैयारियां कर रहा है।

हालांकि अभी तक किसी फुल-स्केल मिलिट्री मूवमेंट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दोनों पक्षों के बयान और ग्राउंड सिचुएशन आने वाले दिनों में हालात की दिशा तय करेंगे।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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