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US vs BRICS: ट्रंप की नई रणनीति और भारत की कूटनीतिक दुविधा

None 2025-07-08 09:49:31
US vs BRICS: ट्रंप की नई रणनीति और भारत की कूटनीतिक दुविधा

14 देशों पर टैरिफ, भारत को छोड़ा बाहर: क्या है ट्रंप की रणनीति?

India-US ट्रेड डील के करीब ट्रंप, लेकिन शर्तें क्या हैं?

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, 14 देशों पर नया टैरिफ और ब्रिक्स की नीतियों के खिलाफ सख्त रुख। जानिए इसका भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर क्या असर होगा।

वाशिंगटन/रियो डी जनेरियो,(Shah Times) । ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2025) की पूर्व संध्या पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भू-राजनीतिक संतुलन के केंद्र में हैं। ट्रंप ने न केवल 14 देशों पर भारी टैरिफ का ऐलान किया है, बल्कि ब्रिक्स (BRICS) समूह के प्रति आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वे अमेरिका के हितों से किसी भी समझौते को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

यह घटनाक्रम उस समय आया है जब ब्राजील के रियो डी जनेरियो में 6-7 जुलाई को 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें नए सदस्य देशों — मिस्र, ईथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया — ने भी भाग लिया। ट्रंप का यह बयान वैश्विक भू-राजनीति में एक नए व्यापार युद्ध की आहट दे रहा है।


ट्रंप का टैरिफ बम: किसे मिला झटका?

ट्रंप ने एक साथ 14 देशों को साइन किया हुआ ‘ट्रेड लेटर’ भेजा है, जिसमें जापान और दक्षिण कोरिया से लेकर म्यांमार, बांग्लादेश, थाईलैंड और सर्बिया तक शामिल हैं। इन पर 25% से लेकर 40% तक का टैरिफ लगाया गया है, जो 1 अगस्त 2025 से लागू होगा।

देशनया टैरिफ
जापान25%
साउथ कोरिया25%
म्यांमार40%
लाओस40%
दक्षिण अफ्रीका30%
कजाकिस्तान25%
मलेशिया25%
ट्यूनीशिया25%
इंडोनेशिया32%
बोस्निया30%
बांग्लादेश35%
सर्बिया35%
कंबोडिया36%
थाईलैंड36%

यह टैरिफ नीति बताती है कि ट्रंप न केवल चीन या यूरोप पर बल्कि विकासशील और मिडल-इनकम देशों पर भी दबाव बनाने की रणनीति पर चल रहे हैं।

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India-US Trade Deal: अब भी अटका हुआ

ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि भारत के साथ ट्रेड डील बेहद करीब है, लेकिन इसे लेकर वर्षों से बातचीत हो रही है। सौदे में देरी का बड़ा कारण अमेरिका की यह मांग है कि भारत अपने कृषि और डेयरी उत्पादों पर टैरिफ कम करे और अमेरिकी बाजार के लिए द्वार खोले।

भारत सरकार की स्पष्ट नीति है कि वह अपने घरेलू कृषि और डेयरी सेक्टर के साथ समझौता नहीं कर सकती। इस कारण समझौता लंबे समय से टलता आ रहा है। हालांकि, ट्रंप का नरम रुख भारत के लिए एक अवसर हो सकता है यदि वह इन क्षेत्रों में संतुलन बना सके।


ट्रंप बनाम BRICS: क्या कहती है यह टक्कर?

ब्रिक्स समूह की नई विस्तारवादी नीति, जिसमें अब यह समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी और 40% वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करता है, अमेरिका को रणनीतिक रूप से चुनौती देता दिख रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि,

"जो भी देश ब्रिक्स की एंटी-अमेरिकन नीतियों के साथ खड़ा होगा, उस पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगेगा। कोई अपवाद नहीं होगा।" — ट्रंप, ट्रुथ सोशल पर

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने बताया कि ट्रंप ब्रिक्स के हर कदम पर नजर बनाए हुए हैं और अमेरिका के खिलाफ किसी भी गठबंधन पर कड़ी प्रतिक्रिया दी जाएगी।


ब्रिक्स का पलटवार: वैश्विक व्यापार की चिंता

ब्रिक्स देशों ने संयुक्त बयान में कहा कि वे एकतरफा टैरिफ और प्रतिबंधों से चिंतित हैं। उन्होंने WTO जैसे नियम आधारित संस्थानों की पुनर्बहाली की मांग की और वैश्विक व्यापार को “राजनीतिक हथियार” बनाए जाने पर चिंता जताई।

“हमें एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों, टैरिफ बढ़ोतरी और अन्य गैर-शुल्क उपायों पर गंभीर चिंता है, जो वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचाते हैं।” — ब्रिक्स संयुक्त बयान


भारत के लिए क्या है चुनौती?

भारत एक तरफ ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और दूसरी ओर अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को गहरा करना चाहता है। ऐसे में यह स्थिति भारत के लिए एक राजनयिक संतुलन की परीक्षा है। यदि भारत ट्रंप की टैरिफ नीति के दायरे में नहीं आता, तो यह एक सकारात्मक संकेत हो सकता है, लेकिन ब्रिक्स में उसकी मौजूदगी और सक्रिय भूमिका उसे ट्रंप के रडार में ला सकती है।

भारत को तय करना होगा कि वह ब्रिक्स के सामूहिक हितों के साथ खड़ा रहता है या अमेरिका के साथ द्विपक्षीय समझौतों के जरिए अपनी आर्थिक कूटनीति को आगे बढ़ाता है।


टैरिफ से ट्रेड वार तक

ट्रंप का ताजा कदम सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक हमला है। यह अमेरिका की नई विश्व नीति का संकेत है जिसमें 'अमेरिका फर्स्ट' के नाम पर अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों को चुनौती दी जा रही है। ब्रिक्स जैसी संस्थाएं जहां मल्टीपोलर वर्ल्ड का समर्थन करती हैं, वहीं ट्रंप एक यूनिपोलर अमेरिका के मॉडल की ओर लौटते दिखते हैं।

आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि क्या यह टैरिफ बम विश्व व्यापार व्यवस्था को फिर से बदल देगा, या यह एक अस्थायी चुनावी रणनीति मात्र है। भारत जैसे देशों के लिए यह वक्त चुप रहने का नहीं, बल्कि रणनीतिक चतुराई दिखाने का है।


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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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