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ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका ने घोषित किया $20 मिलियन का इनाम

Harish Qureshi • 2026-11-07 12:09:15
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका ने घोषित किया $20 मिलियन का इनाम

अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए $20 मिलियन तक के इनाम की पेशकश की है। इस अमेरिकी पहल में परमाणु ठिकानों, उपकरणों, वैज्ञानिकों और उनसे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी देने वालों को संभावित स्थानांतरण की सुविधा भी देने की बात कही गई है।


वॉशिंगटन डीसी, अमेरिका | 7 नवंबर 2026

By Mohd Haris


परमाणु कार्यक्रम की जानकारी पर $20 मिलियन का इनाम

ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव के बीच वॉशिंगटन ने एक नई रणनीतिक पहल की है। अमेरिकी विदेश विभाग के रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस कार्यक्रम ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी देने वालों के लिए अधिकतम $20 मिलियन के इनाम की घोषणा की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने 6 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस पेशकश की जानकारी साझा की। इसके मुताबिक, इनाम की योजना में संभावित स्थानांतरण यानी रिलॉकेशन की सुविधा भी शामिल है।


किन जानकारियों की तलाश कर रहा है अमेरिका?

अमेरिकी पेशकश का दायरा केवल परमाणु ठिकानों तक सीमित नहीं है। रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस के आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, अमेरिका को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित कई तरह की जानकारियां चाहिए। इनमें परमाणु सुविधाओं की लोकेशन, वहां इस्तेमाल होने वाले उपकरण, परमाणु वैज्ञानिकों और दूसरे संबंधित कर्मचारियों की पहचान तथा उनकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी शामिल है। इसके अलावा, ऐसे उपकरणों और संबंधित व्यक्तियों की आवाजाही से जुड़ी सूचनाएं भी इस कार्यक्रम के दायरे में आती हैं।

हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने सार्वजनिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि किस प्रकार की सूचना पर अधिकतम $20 मिलियन का इनाम दिया जाएगा। इसलिए इस राशि को अधिकतम संभावित इनाम के रूप में ही देखा जाना चाहिए।


रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस क्या है?

रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस अमेरिकी विदेश विभाग का एक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा इनाम कार्यक्रम है। इसकी शुरुआत 1984 में हुई थी। इसका उद्देश्य ऐसी सूचनाएं हासिल करना है, जो अमेरिका के नागरिकों और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा में मददगार हों। ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुताल्लिक़ मौजूदा पेशकश इसी कार्यक्रम का हिस्सा है। आधिकारिक वेबसाइट पर सुरक्षित माध्यमों से सूचना देने के विकल्प भी उपलब्ध कराए गए हैं।


60 फीसदी यूरेनियम संवर्धन को लेकर अमेरिकी चिंता

इस घोषणा के पीछे परमाणु ईंधन के संवर्धन का मुद्दा भी अहम है। अमेरिकी रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस वेबसाइट ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA की 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि ईरान 60 फीसदी शुद्धता तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा था। आधिकारिक अमेरिकी नोटिस के मुताबिक, 60 फीसदी संवर्धन का स्तर हथियार-स्तर के लगभग 90 फीसदी संवर्धन से तकनीकी तौर पर एक महत्वपूर्ण कदम दूर है। यहां एक अहम फर्क समझना जरूरी है। 60 फीसदी तक संवर्धित यूरेनियम अपने आप में परमाणु हथियार होने का प्रमाण नहीं है। परमाणु हथियार बनाने के लिए अतिरिक्त तकनीकी, इंजीनियरिंग और हथियार-निर्माण प्रक्रियाओं की जरूरत होती है। अमेरिकी वेबसाइट का दावा है कि ईरान के पास मौजूद इस स्तर के यूरेनियम को आगे संवर्धित किया जाए तो उसकी मात्रा कई परमाणु हथियारों के लिए पर्याप्त हो सकती है। यह अमेरिकी कार्यक्रम में दर्ज आकलन है, इसे किसी तैयार परमाणु हथियार के अस्तित्व का प्रमाण नहीं समझना चाहिए।


IAEA की निगरानी पर क्या है विवाद?

अमेरिकी विदेश विभाग के आधिकारिक नोटिस में ईरान की IAEA के प्रति सुरक्षा दायित्वों के अनुपालन को लेकर चिंता जाहिर की गई है। इसमें कहा गया है कि निगरानी संबंधी दायित्वों पर असहमति के कारण एजेंसी को ईरान के परमाणु कार्यक्रम के कुछ अहम हिस्सों, खासकर सेंट्रीफ्यूज के उत्पादन और उपलब्ध भंडार की निरंतर निगरानी में कठिनाई हुई है। इसे तकनीकी भाषा में 'कंटिन्यूटी ऑफ नॉलेज' यानी जानकारी की निरंतरता का नुकसान कहा गया है। सेंट्रीफ्यूज ऐसे उपकरण हैं, जिनका इस्तेमाल यूरेनियम संवर्धन में किया जाता है। इसलिए इनके उत्पादन, उपलब्धता और आवाजाही की निगरानी परमाणु कार्यक्रम की वास्तविक स्थिति समझने के लिए अहम होती है।


ट्रंप के दावों और नई पेशकश के बीच सवाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले कई बार दावा कर चुके हैं कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में परमाणु ठिकानों, उपकरणों और वैज्ञानिकों से संबंधित जानकारी के लिए $20 मिलियन तक का इनाम घोषित करना एक महत्वपूर्ण रणनीतिक घटनाक्रम है। इससे यह सवाल उठता है कि यदि अमेरिकी प्रशासन के आकलन के मुताबिक ईरान की परमाणु क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा है, तो फिर उसके परमाणु नेटवर्क की जानकारी जुटाने के लिए इतनी बड़ी वित्तीय पेशकश की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है?

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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