अमेरिका ने 23 साल बाद इराक से सैन्य मिशन समाप्त किया। आखिरी अमेरिकी बल इरबिल से निकले और ISIS के खिलाफ अभियान अब इराकी नेतृत्व वाली सुरक्षा व्यवस्था के तहत आगे बढ़ेगा।
इराक | 30 सितंबर 2026
By Mohd Haris
अमेरिका ने 30 सितंबर 2026 को इराक में अपने सैन्य मिशन की समाप्ति पूरी कर ली। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक इरबिल एयर बेस से अमेरिकी बलों और सैन्य उपकरणों की व्यवस्थित वापसी के साथ Operation Inherent Resolve का इराकी चरण समाप्त हो गया।
यह वापसी 2003 में शुरू हुए अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के 23 साल बाद हुई है। शुरुआती दौर में अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सद्दाम हुसैन की सरकार को हटाने के लिए इराक पर हमला किया था। बाद के वर्षों में अमेरिकी सैन्य भूमिका कई चरणों से गुजरती हुई ISIS के खिलाफ अभियान तक पहुंची।
2003 के आक्रमण के बाद इराक में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बड़े पैमाने पर रही। 2011 में अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी हुई, लेकिन 2014 में ISIS के तेजी से विस्तार के बाद बगदाद के अनुरोध पर अमेरिकी नेतृत्व वाला सैन्य अभियान दोबारा शुरू हुआ।
Operation Inherent Resolve की स्थापना 2014 में हुई थी। इसका मकसद इराक और सीरिया में ISIS के खिलाफ स्थानीय साझेदार बलों को सलाह, प्रशिक्षण और सैन्य सहायता देना था।
अब अमेरिकी मिशन इराक से बाहर हो गया है। हालांकि इसका मतलब क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य भूमिका का पूर्ण अंत नहीं है। अमेरिकी नेतृत्व वाला संयुक्त टास्क फोर्स अब जॉर्डन में स्थित है और सीरिया में ISIS के खिलाफ अभियान जारी रखने की व्यवस्था रखता है।
अमेरिकी वापसी के बाद इराकी सुरक्षा बलों पर ISIS के बचे हुए नेटवर्क और दूसरे सुरक्षा खतरों से निपटने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा है कि इराकी सुरक्षा बल, जिसमें कुर्द पेशमर्गा भी शामिल हैं, देश की सुरक्षा संभालेंगे। अमेरिका इराक के साथ सामान्य द्विपक्षीय सुरक्षा संबंध के तहत लक्षित प्रशिक्षण और खुफिया सहयोग जारी रखने की बात कह चुका है।
इस बदलाव को इराक की संप्रभुता के लिए महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच यह सवाल भी है कि अमेरिकी सैन्य समर्थन घटने के बाद ISIS के बचे हुए नेटवर्क और सशस्त्र गुटों से निपटने की क्षमता कितनी प्रभावी रहेगी।
अमेरिकी वापसी के साथ इराक में ईरान के प्रभाव को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। ईरान से जुड़े कई इराकी सशस्त्र गुट पहले से देश की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में प्रभाव रखते हैं।
कुछ क्षेत्रीय विश्लेषकों का आकलन है कि अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खत्म होने से ईरान और उसके सहयोगी गुटों का रणनीतिक प्रभाव बढ़ने की गुंजाइश बनेगी। यह एक विश्लेषणात्मक आकलन है, न कि इराक के भविष्य का निश्चित परिणाम।
इराकी सरकार के सामने एक दूसरी चुनौती गैर-राज्य सशस्त्र गुटों को नियंत्रित करने की है। इन गुटों के निरस्त्रीकरण की समयसीमा को लेकर भी बदलाव हुए हैं और कुछ प्रभावशाली ईरान-समर्थित मिलिशिया अपने हथियार छोड़ने के संकेत नहीं दे रहे हैं।
सैन्य मिशन की बात करें तो 30 सितंबर को अमेरिकी वापसी पूरी हुई। लेकिन अमेरिका और इराक के संबंध समाप्त नहीं हुए हैं।
वाशिंगटन और बगदाद अब सैन्य गठबंधन के बजाय द्विपक्षीय सुरक्षा संबंध की ओर बढ़ रहे हैं। इसका अर्थ है कि प्रशिक्षण, खुफिया सहयोग और आतंकवाद विरोधी समन्वय जैसे क्षेत्रों में सहयोग जारी रहने की संभावना बनी हुई है।
इसलिए “अमेरिका ने इराक छोड़ दिया” को सैन्य मिशन की समाप्ति के संदर्भ में समझना अधिक सटीक है। इसे दोनों देशों के बीच सभी सुरक्षा या कूटनीतिक संबंधों के अंत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अमेरिकी वापसी के बाद इराक के सामने सबसे अहम सवाल अपनी सुरक्षा क्षमता को स्वतंत्र रूप से बनाए रखने का है।
ISIS का क्षेत्रीय नियंत्रण पहले जैसा नहीं है, लेकिन संगठन के बचे हुए नेटवर्क और sleeper cells सुरक्षा चुनौती बने हुए हैं। इसके साथ ही ईरान-समर्थित सशस्त्र गुटों की मौजूदगी इराकी सरकार के लिए अलग चुनौती पेश करती है।
अमेरिका के जाने के बाद इराक को इन दोनों मोर्चों के बीच संतुलन बनाना होगा। बगदाद के लिए चुनौती यह भी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थानों की कमान राज्य के हाथों में मजबूत रहे।
2003 से शुरू हुआ अमेरिकी सैन्य अध्याय अब औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है। लेकिन इसके राजनीतिक और सुरक्षा प्रभाव लंबे समय तक इराक और पूरे पश्चिम एशिया में दिखाई दे सकते हैं।
अमेरिका के लिए यह सैन्य भूमिका के एक लंबे चरण का अंत है। इराक के लिए यह अपनी सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी अधिक स्पष्ट रूप से अपने हाथ में लेने का दौर है। वहीं ईरान के प्रभाव, सशस्त्र गुटों और ISIS के बचे नेटवर्क के बीच आने वाला समय बगदाद की सुरक्षा नीति के लिए अहम रहेगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।