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डीज़ल संकट पर अमेरिका का दबाव, फ्रांस-जर्मनी से रिजर्व जारी करने को कहा

Harish Qureshi • 2026-10-02 14:55:43
डीज़ल संकट पर अमेरिका का दबाव, फ्रांस-जर्मनी से रिजर्व जारी करने को कहा
  • अमेरिका ने फ्रांस-जर्मनी से मांगा डीजल रिजर्व, एक्सपोर्ट रोकने की चेतावनी
  • डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच यूरोप पर US का दबाव, 120 मिलियन बैरल की मांग
  • अमेरिका-यूरोप में डीजल को लेकर तनाव, फ्रांस और जर्मनी के रणनीतिक भंडार पर नजर

  • अमेरिका ने बढ़ती डीजल कीमतों के बीच फ्रांस और जर्मनी से रणनीतिक भंडार जारी करने को कहा है। रिपोर्ट के अनुसार US ने संभावित डीजल एक्सपोर्ट प्रतिबंध की चेतावनी भी दी है। 


    वॉशिंगटन | ब्रसेल्स | पेरिस | 2 अक्टूबर 2026

    By Mohd Haris


    डीजल संकट पर अमेरिका का यूरोप पर दबाव


    वैश्विक डीजल बाजार में बढ़ती कीमतों और आपूर्ति दबाव के बीच अमेरिका ने यूरोपीय देशों से अपने रणनीतिक ईंधन भंडार का कुछ हिस्सा बाजार में जारी करने का आग्रह किया है। अमेरिकी प्रशासन ने खास तौर पर फ्रांस और जर्मनी से आपातकालीन डीजल स्टॉक घटाने को कहा है। 


    रिपोर्टों के मुताबिक वॉशिंगटन ने यूरोप से डीजल उपलब्धता बढ़ाने के लिए कदम उठाने को कहा है। इसके साथ ही अमेरिका ने अपने डीजल एक्सपोर्ट पर संभावित प्रतिबंध का विकल्प भी सामने रखा है।


    120 मिलियन बैरल की मांग


    अमेरिकी दबाव के बीच यूरोप से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि वॉशिंगटन ने अगले 6 महीनों में यूरोपीय संघ से 120 मिलियन बैरल डीजल बाजार में लाने को कहा है।


    यह मात्रा EU देशों के मौजूदा आपातकालीन गैसोइल और डीजल भंडार का 40% से ज्यादा हिस्सा होगी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक EU के पास करीब 39 मिलियन टन आपातकालीन गैसोइल और डीजल स्टॉक था। 


    यह मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रणनीतिक भंडार सामान्य बाजार आपूर्ति के लिए नहीं, बल्कि गंभीर ऊर्जा संकट या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में इस्तेमाल के लिए रखा जाता है।


    फ्रांस और जर्मनी के पास बड़ा भंडार


    फ्रांस और जर्मनी यूरोप के महत्वपूर्ण रणनीतिक डीजल भंडार रखने वाले देशों में शामिल हैं।


    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मई 2025 में जर्मनी के पास करीब 5.6 मिलियन टन और फ्रांस के पास करीब 8.2 मिलियन टन डीजल तथा गैसोइल भंडार था। दोनों देशों का संयुक्त हिस्सा EU के रणनीतिक भंडार का लगभग 35% था। 


    इसी वजह से वॉशिंगटन का दबाव खास तौर पर इन दोनों देशों पर केंद्रित है।


    अमेरिका एक्सपोर्ट प्रतिबंध क्यों सोच रहा है


    अमेरिका में भी डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। ट्रंप प्रशासन घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करने की कोशिश कर रहा है।


    अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर यूरोपीय देश अतिरिक्त डीजल बाजार में नहीं लाते, तो अमेरिका अपने डीजल एक्सपोर्ट को सीमित करने पर विचार कर सकता है। 


    यह अभी संभावित नीति विकल्प है। इसे लागू किए जाने का अंतिम निर्णय घोषित नहीं हुआ है।


    अमेरिका ने अपने हिस्से का हवाला दिया


    अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि मार्च में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा भंडार से जुड़े समझौते के तहत अमेरिका ने अपनी ओर से 172 मिलियन बैरल जारी किए हैं।


    उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों से अपने पहले के प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और अतिरिक्त आपूर्ति बाजार में उपलब्ध कराने का आग्रह किया। 


    अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने भी कहा कि यूरोप के पास डीजल भंडार मौजूद हैं और मौजूदा परिस्थितियों में इन स्टॉक्स को बाजार में लाने का समय है।


    यूरोप के सामने मुश्किल फैसला


    यूरोपीय देशों के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ रणनीतिक भंडार बाजार में लाने से तत्काल डीजल आपूर्ति बढ़ सकती है। दूसरी तरफ इससे भविष्य के ऊर्जा संकट के लिए उपलब्ध सुरक्षा कवच कमजोर हो सकता है।


    EU पहले ही रूसी ईंधन आयात में कमी और मध्य पूर्व से आपूर्ति में व्यवधान का सामना कर रहा है। ऐसे माहौल में बड़े पैमाने पर रणनीतिक भंडार जारी करने का फैसला यूरोपीय सरकारों के लिए आसान नहीं है। 


    EU ने अभी अंतिम फैसला नहीं किया


    यूरोपीय आयोग और सदस्य देशों के अधिकारियों ने डीजल रिजर्व को लेकर बातचीत शुरू कर दी है। 1 अक्टूबर को यूरोपीय आयोग, फ्रांस, जर्मनी, इटली, आयरलैंड और ब्रिटेन के बीच संभावित स्टॉक रिलीज पर चर्चा हुई।


    2 अक्टूबर को ईयू ऊर्जा संघ कार्य समूह की बैठक में भी इस मुद्दे पर विचार किया गया। जर्मनी के अर्थव्यवस्था मंत्रालय ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अभी जर्मनी से औपचारिक रूप से स्टॉक जारी करने को नहीं कहा है। 


    इससे स्पष्ट है कि अमेरिका की मांग और यूरोपीय निर्णय प्रक्रिया के बीच अभी अंतर बना हुआ है।


    एक्सपोर्ट प्रतिबंध पर यूरोप की चिंता


    EU व्यापार आयुक्त मारोश शेफचोविच ने संकेत दिया है कि अमेरिकी डीजल एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध यूरोपीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर असर डाल सकता है।


    यूरोप अमेरिकी डीजल पर पहले की तुलना में ज्यादा निर्भर हो चुका है। रूस से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में कमी और मध्य पूर्व से आपूर्ति बाधित होने के कारण अमेरिकी ईंधन की भूमिका बढ़ी है। 


    ऐसे में अमेरिकी एक्सपोर्ट प्रतिबंध यूरोपीय परिवहन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा सकता है।


    वैश्विक आपूर्ति संकट की पृष्ठभूमि


    डीजल बाजार पर एक साथ कई घटनाओं का असर पड़ा है। मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण क्षेत्रीय ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है। रूस ने भी डीजल एक्सपोर्ट प्रतिबंध को अक्टूबर के अंत तक बढ़ाया है।


    इसके अलावा चीन ने घरेलू स्टॉक मजबूत करने के लिए अक्टूबर में ईंधन एक्सपोर्ट रोकने के कदम उठाए हैं। इन घटनाओं ने वैश्विक डीजल सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव डाला है। 


    यूरोप के लिए सर्दी और हार्वेस्ट सीजन अहम


    डीजल की मांग कृषि, ट्रकिंग और औद्योगिक गतिविधियों से सीधे जुड़ी है। यूरोप में सर्दियों से पहले ही ईंधन उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है।


    अमेरिकी ऊर्जा सचिव ने भी हार्वेस्ट सीजन और विंटर हीटिंग ऑयल सीजन से पहले बाजार में अतिरिक्त डीजल उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया है। 


    इसका मतलब है कि मौजूदा विवाद केवल पेट्रोल पंपों पर कीमतों तक सीमित नहीं है। इसका असर माल ढुलाई, कृषि लागत और औद्योगिक उत्पादन तक पहुंच सकता है।


    फ्रांस और जर्मनी की स्थिति


    फ्रांस के ऊर्जा मंत्रालय ने अमेरिकी मांग पर तत्काल टिप्पणी नहीं की है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया मुलाकात में भी यह मुद्दा सीधे चर्चा में नहीं आया था।


    हालांकि फ्रांसीसी पक्ष ने G7 नेताओं के साथ ईंधन कीमतों और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की वैश्विक उपलब्धता पर चर्चा के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की बात कही है।


    जर्मनी ने भी संकेत दिया है कि वह अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की औपचारिक प्रक्रिया का इंतजार कर रहा है।


    आगे की तस्वीर


    अमेरिका चाहता है कि यूरोप अतिरिक्त डीजल बाजार में लाए, जबकि यूरोपीय देश अपने रणनीतिक भंडार को लेकर सावधानी बरत रहे हैं।


    अगर बड़े पैमाने पर रिजर्व जारी होता है, तो इससे अल्पावधि में वैश्विक डीजल उपलब्धता बढ़ सकती है। दूसरी तरफ, अगर अमेरिका डीजल एक्सपोर्ट सीमित करता है, तो यूरोप में आपूर्ति और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।


    फिलहाल EU ने अंतिम सामूहिक फैसला नहीं लिया है। आने वाले दिनों में अमेरिकी नीति, International Energy Agency की भूमिका और यूरोपीय सरकारों के निर्णय इस ऊर्जा संकट की दिशा तय करेंगे।

    वीडियो देखें

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    Harish Qureshi

    Harish Qureshi

    Shah Times Reporter

    शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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