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ईरान से जुड़े खतरे के बीच अमेरिका ने ब्रिटिश एयरबेस से B-1 बॉम्बर वापस बुलाए

Harish Qureshi • 2026-10-06 11:54:33
ईरान से जुड़े खतरे के बीच अमेरिका ने ब्रिटिश एयरबेस से B-1 बॉम्बर वापस बुलाए

अमेरिका ने ब्रिटेन के RAF Fairford से सभी B-1 बॉम्बर वापस अमेरिका भेज दिए। कदम संभावित सुरक्षा खतरे के बीच हुआ, लेकिन ईरान की सीधी भूमिका अभी जांच का विषय है।


फेयरफोर्ड, ग्लूस्टरशायर, यूनाइटेड किंगडम | 6 October 2026

By Mohd Haris


RAF फेयरफोर्ड से अमेरिकी B-1 बॉम्बर हटाए गए

अमेरिका ने ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस पर तैनात अपने सभी B-1 बॉम्बर वापस अमेरिका भेज दिए हैं। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि फेयरफोर्ड पर मौजूद अमेरिकी बॉम्बर अपने होम बेस लौट गए हैं। सुरक्षा कारणों से विमानों की आवाजाही की जानकारी रियल टाइम में सार्वजनिक नहीं की गई थी।

यह फैसला ऐसे वक्त हुआ है जब ब्रिटेन में फेयरफोर्ड एयरबेस के आसपास संदिग्ध गतिविधि को लेकर आतंकवाद-रोधी जांच चल रही है। ब्रिटिश पुलिस के मुताबिक 27 सितंबर को एयरबेस की तरफ बढ़ती संदिग्ध गाड़ियों की सूचना के बाद कार्रवाई की गई थी और 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।


संभावित ईरानी खतरे ने बढ़ाई सुरक्षा चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि बॉम्बर हटाने के पीछे एक संभावित खतरा था और विमानों को वहां रखना उचित नहीं समझा गया। अमेरिकी पक्ष से सामने आए बयानों में ईरान से जुड़े खतरे की ओर संकेत किया गया है।

हालांकि इस पूरे मामले में एक अहम सावधानी जरूरी है। RAF फेयरफोर्ड को निशाना बनाने की कथित साजिश में ईरान की सीधी भूमिका अभी सार्वजनिक रूप से निर्णायक तौर पर साबित नहीं हुई है। ब्रिटेन में जांच जारी है और ईरान ने ऐसे आरोपों को खारिज किया है। इसलिए इस घटनाक्रम को ईरान द्वारा हमले की पुष्टि के रूप में पेश करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।


फेयरफोर्ड पर क्या हुआ था?

27 सितंबर को काउंटर टेररिज्म पुलिसिंग को RAF फेयरफोर्ड के पास संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिली थी। पुलिस के अनुसार 3 संदिग्ध वाहन एयरबेस की दिशा में जाते हुए देखे गए थे।

सशस्त्र पुलिस ने कार्रवाई की और 5 लोगों को गिरफ्तार किया। उन पर एक्सप्लोसिव्स एक्ट के तहत अपराध और टेररिज्म एक्ट के तहत आतंकी कृत्य की तैयारी से संबंधित संदेह में कार्रवाई की गई। पुलिस ने उस समय कहा था कि जांच शुरुआती चरण में है और मामले की परिस्थितियों को समझने के लिए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

बाद की जांच में एयरबेस के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और संभावित खतरे को लेकर चिंता बनी रही। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वाहनों से विस्फोटक बरामद होने की पुष्टि नहीं हुई थी। इसलिए इस मामले में संदिग्धों के खिलाफ आरोपों और अंतिम निष्कर्ष के बीच फर्क बनाए रखना जरूरी है।


B-1 बॉम्बर क्यों अहम हैं?

B-1B लांसर अमेरिका का लंबी दूरी का रणनीतिक बॉम्बर है। यह भारी हथियार ले जाने और लंबी दूरी तक मिशन संचालित करने के लिए बनाया गया है।

RAF फेयरफोर्ड यूरोप में अमेरिकी भारी बॉम्बर तैनाती के लिए महत्वपूर्ण फॉरवर्ड ऑपरेटिंग लोकेशन रहा है। 2026 में ईरान से जुड़े सैन्य अभियान के दौरान भी यहां अमेरिकी बॉम्बर तैनात किए गए थे। ब्रिटेन ने अमेरिकी विमानों को ईरानी मिसाइलों के खिलाफ विशिष्ट डिफेंसिव ऑपरेशंस के लिए फेयरफोर्ड के इस्तेमाल की अनुमति दी थी।

इस वजह से फेयरफोर्ड से B-1 विमानों की अचानक वापसी का सैन्य और रणनीतिक महत्व है।


क्या अमेरिका की ईरान के खिलाफ क्षमता खत्म हुई?

नहीं। अमेरिकी रक्षा तंत्र के अनुसार B-1 जैसे बॉम्बर अमेरिका की मुख्य भूमि से भी लंबी दूरी के मिशन संचालित कर सकते हैं।

इसलिए फेयरफोर्ड से विमानों की वापसी का मतलब अमेरिकी लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक कैपेबिलिटी का खत्म होना नहीं है। इसका सीधा अर्थ यह है कि यूरोप में मौजूद एक अग्रिम एयरबेस से बॉम्बर हटाकर उन्हें अमेरिका स्थित ठिकानों पर वापस भेजा गया है।

इससे ऑपरेशनल डिस्टेंस और रिस्पॉन्स टाइम पर असर पड़ सकता है, लेकिन इसे अमेरिकी सैन्य क्षमता में रणनीतिक वापसी के बराबर मानना जल्दबाजी होगी।


ब्रिटेन का रुख क्या है?

ब्रिटेन ने फेयरफोर्ड की सुरक्षा को लेकर आश्वासन दिया है। दूसरी ओर, एयरबेस के आसपास हुई घटना को लेकर काउंटर टेररिज्म पुलिसिंग की जांच जारी है।

ब्रिटिश सरकार पहले ही क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान अमेरिकी डिफेंसिव ऑपरेशंस के लिए फेयरफोर्ड के इस्तेमाल को मंजूरी दे चुकी थी। आधिकारिक बयान के मुताबिक इन अभियानों का उद्देश्य क्षेत्र में ईरानी मिसाइल खतरे को रोकना था।

यही वजह है कि फेयरफोर्ड अब केवल ब्रिटिश-अमेरिकी सैन्य सहयोग का मुद्दा नहीं है। यह ईरान, अमेरिका और यूरोपीय सुरक्षा समीकरण के बीच एक संवेदनशील स्ट्रैटेजिक पॉइंट बन गया है।


ईरान की भूमिका पर अभी सवाल बाकी

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि RAF फेयरफोर्ड के खिलाफ कथित खतरे का वास्तविक स्रोत क्या था।

ब्रिटिश अधिकारियों ने ईरानी इन्वॉल्वमेंट की संभावना को लेकर संकेत दिए हैं। दूसरी तरफ ईरान ने ऐसे आरोपों को खारिज किया है। अमेरिकी प्रशासन के अलग-अलग बयानों में भी खतरे और विमानों की वापसी को लेकर अलग स्तर की जानकारी सामने आई है।

इसलिए फिलहाल सबसे सुरक्षित निष्कर्ष यही है कि अमेरिका ने सुरक्षा जोखिम को गंभीरता से लेते हुए B-1 बॉम्बर वापस बुलाए हैं, जबकि कथित साजिश के पीछे ईरान की प्रत्यक्ष भूमिका जांच का विषय बनी हुई है।


इस फैसले का रणनीतिक असर

RAF फेयरफोर्ड से B-1 बॉम्बर हटने का पहला असर यूरोप से संभावित अमेरिकी लॉन्ग-रेंज ऑपरेशंस की तत्काल उपलब्धता पर पड़ सकता है।

लेकिन दूसरा पहलू ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर किसी अग्रिम सैन्य ठिकाने पर संभावित ड्रोन या आतंकी खतरे के कारण रणनीतिक बॉम्बर हटाने पड़ें, तो इससे मिलिट्री बेसिंग और फोर्स प्रोटेक्शन को लेकर नई चुनौतियां सामने आती हैं।

आधुनिक युद्ध में सैन्य विमान केवल मिसाइल और फाइटर एयरक्राफ्ट के खतरे से नहीं जूझते। कम लागत वाले ड्रोन, सर्विलांस और सबोटाज जैसी गतिविधियां भी बड़े सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए चुनौती बन रही हैं।


अमेरिका के लिए संदेश

अमेरिका के सामने अब 2 समानांतर जरूरतें हैं। पहली, अपने सैन्य संसाधनों को संभावित हमलों से सुरक्षित रखना। दूसरी, ईरान के खिलाफ अपनी डिटरेंस और स्ट्राइक कैपेबिलिटी को कमजोर न दिखने देना।

फेयरफोर्ड से B-1 की वापसी इसी संतुलन का हिस्सा दिखाई देती है। अमेरिका ने विमानों को हटाया है, लेकिन उन्हें निष्क्रिय नहीं किया है। वे अमेरिकी होम बेस पर लौटे हैं और लंबी दूरी के मिशनों के लिए उपलब्ध रह सकते हैं।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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