पंजाब की Lovely Professional University में कथित यौन उत्पीड़न के दावे के बाद छात्र प्रदर्शन हिंसक हो गया। पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज कर सात सदस्यीय SIT बनाई। LPU ने आरोपों को अफवाह बताया। विश्वविद्यालय ने 28 सितंबर से 10 दिन कक्षाएं स्थगित कर मिड-टर्म परीक्षाएं टाल दीं।
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📍 फगवाड़ा, पंजाब 📰 28 सितंबर 2026 ✍️ Apurva Choudhary
LPU कैंपस में प्रदर्शन के बाद हालात बिगड़े
पंजाब के फगवाड़ा स्थित Lovely Professional University यानी LPU में कथित यौन उत्पीड़न के दावे के बाद शुरू हुआ छात्र प्रदर्शन रविवार को हिंसक हो गया। सोशल मीडिया और छात्रों के बीच एक छात्रा के साथ कथित रेप की खबर फैलने के बाद बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में जुटे और बाद में प्रदर्शन ने तोड़फोड़, आगजनी तथा पुलिस के साथ टकराव का रूप ले लिया।
प्रदर्शन के दौरान LPU परिसर में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के साथ Jalandhar-Phagwara National Highway यानी NH-44 पर भी यातायात बाधित हुआ। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बाद सोमवार को स्थिति नियंत्रण में होने की जानकारी दी गई और हाईवे पर यातायात बहाल कर दिया गया।
घटना के बाद विश्वविद्यालय ने सुरक्षा को देखते हुए 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। इसके साथ ही Mid-Term Examinations को भी अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। नया परीक्षा कार्यक्रम University Management System के जरिए जारी किया जाएगा।
कथित रेप के दावे की अभी जांच जारी
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कथित रेप को अभी स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं माना गया है। LPU प्रशासन ने आरोपों को गलत, निराधार और अफवाह बताया है, जबकि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इसलिए फिलहाल घटना को “रेप हुआ” के रूप में रिपोर्ट करने के बजाय “कथित यौन उत्पीड़न के दावे” के रूप में ही देखा जा रहा है।
हालांकि, स्थिति अब उस शुरुआती रिपोर्ट से आगे बढ़ चुकी है जिसमें आधिकारिक शिकायत नहीं होने की बात कही जा रही थी। पुलिस ने एक छात्रा के बयान के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक FIR दर्ज होने के बाद मामले की जांच के लिए Special Investigation Team का गठन किया गया है।
यानी FIR का दर्ज होना कथित घटना की पुष्टि नहीं है। FIR जांच की औपचारिक शुरुआत को दर्शाती है, जबकि आरोपों की वास्तविकता, घटना का स्थान, परिस्थितियां और जिम्मेदारी जैसे सवाल जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।
सात सदस्यीय SIT करेगी मामले की जांच
पुलिस ने मामले की जांच के लिए सात सदस्यीय SIT गठित की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार टीम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, एक महिला पुलिस अधिकारी और छात्र प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। Jalandhar Range के DIG Naveen Singla ने बताया कि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य तकनीकी जानकारी की भी पड़ताल की जाएगी।
जांच का उद्देश्य सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों और वास्तविक घटनाक्रम के बीच तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करना है। पुलिस कथित घटना से संबंधित बयान, उपलब्ध CCTV फुटेज, फोरेंसिक सामग्री और अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है।
इस बीच LPU ने छात्रों और अभिभावकों से सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा नहीं करने और विश्वविद्यालय के आधिकारिक संचार को प्राथमिकता देने की अपील की है।
प्रदर्शन कब और कैसे हिंसक हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शन की शुरुआत रविवार तड़के कैंपस के Girls' Hostel क्षेत्र के पास हुई। छात्रों के एक समूह ने कथित यौन उत्पीड़न के मामले में कार्रवाई की मांग की और प्रशासन पर मामले को गंभीरता से नहीं लेने के आरोप लगाए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है।
सुबह होते-होते प्रदर्शन कैंपस से बाहर तक पहुंच गया और Jalandhar-Phagwara Highway पर भी यातायात प्रभावित हुआ। कई घंटों तक सड़क पर गतिरोध बना रहा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से रास्ता खाली करने की अपील की, लेकिन स्थिति तत्काल सामान्य नहीं हो सकी।
बाद में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी। पुलिस के मुताबिक कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया। रिपोर्टों में कुछ वाहनों में आग लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई है। कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात भी अधिकारियों की ओर से कही गई है।
कैंपस में पुलिस की भारी तैनाती
हिंसा के बाद LPU और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई और कैंपस के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर निगरानी बढ़ाई गई।
सोमवार सुबह पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रण में बताया। NH-44 पर बाधित यातायात को भी बहाल कर दिया गया। पुलिस ने कहा कि कैंपस में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त बल तैनात है।
हिंसा के बाद छात्रों के बीच भी असुरक्षा की स्थिति बनी। विश्वविद्यालय ने इसी को देखते हुए नियमित कक्षाएं 10 दिनों के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया।
28 सितंबर से 10 दिन बंद रहेंगी कक्षाएं
LPU की ओर से जारी सूचना के अनुसार 28 सितंबर 2026 से अगले 10 दिनों तक नियमित कक्षाएं नहीं होंगी। Mid-Term Examinations को भी अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है।
विश्वविद्यालय ने कहा है कि परीक्षा का संशोधित कार्यक्रम बाद में University Management System के माध्यम से साझा किया जाएगा। छात्रों को 10 दिनों की अवधि के दौरान अपने घर जाने का विकल्प भी दिया गया है, लेकिन इसके लिए अभिभावकों या Guardians से परामर्श करने की सलाह दी गई है।
जो छात्र कैंपस में ही रहने का निर्णय लेते हैं, उन्हें अपने Hostel या Residence के अंदर रहने और अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है। विश्वविद्यालय ने छात्रों से किसी भी तरह की अशांति या हिंसक गतिविधि में शामिल नहीं होने को कहा है।
LPU ने आरोपों को बताया अफवाह
LPU प्रशासन ने कथित रेप की घटना से संबंधित सोशल मीडिया दावों को खारिज किया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि उसके कैंपस में ऐसी घटना होने की जानकारी गलत और भ्रामक तरीके से प्रसारित की गई।
हालांकि पुलिस द्वारा FIR दर्ज किए जाने और SIT गठित किए जाने के बाद अब मामला औपचारिक जांच के दायरे में है। ऐसे में विश्वविद्यालय के दावे और शिकायत में लगाए गए आरोप दोनों को जांच के संदर्भ में देखा जाना जरूरी है।
किसी भी पक्ष के दावे को जांच पूरी होने से पहले अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा। खासकर यौन अपराध से जुड़े मामलों में पीड़ित या कथित पीड़ित की पहचान से जुड़ी जानकारी साझा करने से भी बचना जरूरी है।
सोशल मीडिया अफवाहों की भूमिका पर भी सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में सोशल मीडिया पर तेजी से फैली जानकारी की भूमिका अहम रही। कथित घटना से संबंधित संदेश और दावे छात्रों के बीच फैलने के बाद बड़ी संख्या में लोग कैंपस में जुटे और विरोध शुरू हुआ।
बाद में यही विरोध कानून-व्यवस्था की समस्या में बदल गया। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन दोनों ने अपुष्ट जानकारी को आगे प्रसारित नहीं करने की अपील की है।
यह मामला इस बात को भी रेखांकित करता है कि किसी गंभीर आपराधिक आरोप की सोशल मीडिया पर मौजूद जानकारी को सत्यापित तथ्य मानने से पहले आधिकारिक जांच और विश्वसनीय पुष्टि जरूरी है।
पंजाब महिला आयोग ने भी मांगी रिपोर्ट
LPU मामले को लेकर Punjab State Women Commission ने भी स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने Kapurthala के प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से मामले में कार्रवाई की रिपोर्ट तथा FIR की जानकारी मांगी है।
आयोग ने SIT के गठन और जांच की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी मांगी है। संबंधित अधिकारियों को 30 सितंबर तक Action Taken Report उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
इससे मामले की जांच अब केवल पुलिस स्तर तक सीमित नहीं रही है। हालांकि आयोग द्वारा रिपोर्ट मांगना भी कथित अपराध की पुष्टि नहीं है, बल्कि शिकायत और उससे जुड़े घटनाक्रम की संस्थागत समीक्षा का हिस्सा है।
अब जांच के नतीजे पर नजर
फिलहाल LPU में कक्षाएं स्थगित हैं और Mid-Term Examinations अगले आदेश तक टल गए हैं। कैंपस में सुरक्षा बढ़ाई गई है और पुलिस ने FIR के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
सबसे अहम सवाल अब यह है कि कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा दावा जांच में कितना सही पाया जाता है। इसके अलावा हिंसक प्रदर्शन, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, पुलिस वाहनों में आगजनी और हाईवे बाधित करने के मामलों में भी अलग से कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि LPU में हिंसक प्रदर्शन हुआ, पुलिस ने कथित रेप के दावे से जुड़े मामले में FIR दर्ज की और SIT गठित की, जबकि विश्वविद्यालय ने आरोपों को खारिज किया है। कथित यौन अपराध की अंतिम सच्चाई अभी जांच का विषय है।