नागपुर,(Shah Times )। RSS ने जिस बेबाकी से सरकार और साम्प्रदायिक सोच को आईना दिखाया है उससे साम्प्रदायिकता के हामी सख्ते में आ गए है यह बात अपनी जगह है लेकिन बोया पेड़ बबूल का फल कहाँ से लाए जबसे गठन हुआ तबसे लेकर अभी तक जहर ही परोसा जा रहा है हां समय समय पर रंग भी बदलते रहते है उसी रंग के चलते यह माना जा रहा है जिस तरह से आरएसएस को मोदी ने साइड लाईन किया है उससे भी जोडकर देखा जा सकता हैं जे पी नड्डा के द्वारा कराई गई या की गई आरएसएस को लेकर टिप्पणी भी आरएसएस के हजम नहीं हो पा रही है सत्ता के या सियासी गलियारों में यह चर्चा काफ़ी चटकारे लेकर की जा रही है कि जेपी नड्डा की इतनी ओकात नहीं है कि वह उस संगठन की जरूरत को नकार दे जिस संगठन की बुनियाद पर भाजपा की सियासी इमारत खडी़ है अगर आरएसएस धर्म के नाम पर हिन्दुत्व को लेकर काम ना करता तो भाजपा का आज सत्ता में होना शायद नामुमकिन होता लेकिन देखा जाए तो आरएसएस की भाजपा को अब जरूरत नहीं है यह सही भी है क्योंकि आरएसएस के बिना सहयोग के मोदी की भाजपा अपने दम पर 240 सीट लेकर आई यह भी सच्चाई है इससे इंकार नहीं किया जा सकता हैं।
खैर मोदी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह संपन्न होने के एक दिन के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सभी धर्मों को लेकर बड़ा बयान दिया है। मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि सभी धर्मों का सम्मान करना है। सभी की पूजा का सम्मान करना है, ये मान कर चलना है कि हमारे जैसा उनका धर्म भी सच्चा है।
दरअसल, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय समापन समारोह को संबोधित करने के दौरान ये टिप्पणियां की। उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतंत्र की एक अनिवार्य प्रक्रिया है, इसमें दो पक्ष होने के कारण प्रतिस्पर्धा होती है, चूंकि यह एक प्रतिस्पर्धा है, इस लिए खुद को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाता है, लेकिन इसमें एक गरिमा होती है, झूठ का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, संसद में जाने और देश चलाने के लिए लोगों को चुना जा रहा है, वे सहमति बनाकर ऐसा करेंगे,यह प्रतिस्पर्धा कोई युद्ध नहीं है,एक-दूसरे की जिस तरह की आलोचना की गई, जिस तरह से अभियान चलाने से समाज में मतभेद पैदा होगा और विभाजन होगा, इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया, आरएसएस जैसे संगठनों को भी इसमें बेवजह घसीटा गया।
मोहन भागवत ने कहा, ''तकनीक की मदद से झूठ को पेश किया गया, झूठ को प्रचारित करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। ऐसे देश कैसे चलेगा ? विपक्ष को विरोधी नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि वे विपक्ष हैं और एक पक्ष को उजागर कर रहे हैं, उनकी राय भी सामने आनी चाहिए चुनाव, लड़ने की एक गरिमा होती है, उस गरिमा का ख्याल नहीं रखागया, ऐसा करना जरूरी है क्योंकि हमारे देश के सामने चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं, वही एनडीए सरकार फिर से सत्ता में आ गई है, यह सही है कि पिछले 10 सालों में बहुत सारी सकारात्मक चीजें हुई हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अब हम चुनौतियों से मुक्त हो गए हैं.''
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मणिपुर हिंसा पर भी चुप्पी तोड़ी. उन्होंने कहा, ''मणिपुर पिछले एक साल से शांति की राह देख रहा है। प्राथमिकता के साथ उसका विचार करना होगा। मणिपुर राज्य पिछले 10 साल शांत रहा, लेकिन अचानक से गन कल्चर फिर से बढ़ा, जो कलह वहां पर हुई. उसपर प्राथमिकता देकर विचार करना जरूरी है.''
मोहन भागवत ने धर्मों की बात करते हुए आगे कहा कि देश में सभी धर्मों का सम्मान करना, उनकी पूजा को सम्मान देना चाहिए,हमें ये मानकर चलना चाहिए कि उनका धर्म भी हमारी तरह सच्चा है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।