आयुर्वेद में च्यवनप्राश को सबसे शक्तिशाली औषधियों में से एक माना जाता है। यह कोई साधारण जेली या जैम नहीं, बल्कि एक रसायन है, जो शरीर को अंदर से मज़बूत बनाने के साथ-साथ इम्यूनिटी बढ़ाता है और मन को शांत करता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार च्यवनप्राश की उत्पत्ति तब हुई जब उम्र और कमजोरी से पीड़ित च्यवन ऋषि को अश्विनी कुमारों ने एक विशेष हर्बल टॉनिक के माध्यम से पुनर्जीवित किया। वही पारंपरिक नुस्खा आगे चलकर च्यवनप्राश के रूप में प्रसिद्ध हुआ है।
सर्दियों के मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में आयुर्वेद का रसायन च्यवनप्राश शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाने का सबसे अच्छा उपाय माना जाता है। यह न केवल इम्युनिटी को मजबूत बनाने में सहायक होता है, बल्कि फेफड़ों, हार्ट, त्वचा और दिमाग को भी पोषण देता है। हजारों साल पुरानी इस औषधि को महर्षि च्यवन की रोगमुक्ति से जोड़ा जाता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार, वृद्ध और कमजोर महर्षि च्यवन को अश्विनी कुमारों ने एक विशेष रसायन दिया, जिससे उनका शरीर फिर से युवा और ताकतवर और रोगमुक्त हो गया। इसी रसायन को च्यवनप्राश नाम दिया गया।
च्यवनप्राश का सेवन करने से होने फायदे।
सर्दी-खांसी से राहत
अगर रोजाना लिया जाय तो च्यवनप्राश सर्दी-जुकाम से जुड़ी खांसी को नियंत्रित करने के लिए रामबाण उपाय है। खांसी एक आम बीमारी है जो आमतौर पर सर्दी के साथ होती है। इसे आमतौर पर आयुर्वेद में कफ विकार के रूप में जाना जाता है। खांसी आमतौर पर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में बलगम के जमा होने के कारण होती है। च्यवनप्राश को शहद के साथ लेने से कफ को संतुलित करने और फेफड़ों को फिर से जीवंत करने में मदद मिलती है।
याददाश्त बढ़ाने में सहायक
च्यवनप्राश का नियमित सेवन याददाश्त बढ़ाने में मदद करता है। आयुर्वेद के अनुसार, याददाश्त कमजोर होना कफ की निष्क्रियता या वात दोष के बढ़ने के कारण होता है। च्यवनप्राश लेने से वात को संतुलित करने में मदद मिलती है और याददाश्त में सुधार होता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।