लिगड़ी क्या है? जानिए किस राज्य की मशहूर जंगली सब्जी है
हिमालय की अनोखी सब्जी लिगड़ी क्यों हो रही है लोकप्रिय?
लिगड़ी के स्वाद से लेकर सेहत तक, जानिए पूरी जानकारी
लिगड़ी, जिसे कई स्थानों पर लिंगड़ी, लुंगडू या फिडलहेड फर्न भी कहा जाता है, हिमालयी क्षेत्रों में उगने वाली एक जंगली खाद्य फर्न है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में यह पारंपरिक भोजन का हिस्सा है। पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
📍 स्थान: देहरादून
📰 Date: 7 अगस्त 2026
✍️ Neelam Saini
लिगड़ी क्या है और यह कौन से राज्य में पाई जाती है?
हिमालय की पारंपरिक जंगली सब्जी
भारत के पहाड़ी इलाकों में कई ऐसी वनस्पतियां पाई जाती हैं, जो स्थानीय लोगों के भोजन और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन्हीं में से एक है लिगड़ी (Lingdi या Lingri)। यह वास्तव में फर्न (Fern) पौधे की कोमल मुड़ी हुई नई पत्तियां होती हैं, जिन्हें अंग्रेज़ी में Fiddlehead Fern कहा जाता है। बरसात के मौसम में यह प्राकृतिक रूप से जंगलों और नम पहाड़ी क्षेत्रों में उगती है। स्थानीय समुदाय इसे वर्षों से पारंपरिक भोजन के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं।
किन राज्यों में पाई जाती है लिगड़ी?
भारत में लिगड़ी मुख्य रूप से हिमालयी और पहाड़ी राज्यों में पाई जाती है। इनमें प्रमुख हैं—
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के कुछ क्षेत्र, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मेघालय। नेपाल और भूटान के कई इलाकों में भी यह पारंपरिक भोजन का हिस्सा मानी जाती है।
कैसे खाई जाती है लिगड़ी?
स्थानीय लोग लिगड़ी को अच्छी तरह साफ करके उबालते हैं और फिर सरसों के तेल, लहसुन, प्याज, हरी मिर्च और मसालों के साथ सब्जी के रूप में पकाते हैं। कई क्षेत्रों में इसका अचार भी बनाया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्ची लिगड़ी का सेवन नहीं करना चाहिए। इसे हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाना सुरक्षित माना जाता है।
लिगड़ी में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं?
वनस्पति अनुसंधानों के अनुसार लिगड़ी में फाइबर, विटामिन ए, विटामिन सी, आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम और कई प्रकार के प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। हालांकि इनकी मात्रा प्रजाति और उगने वाले क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है।
लिगड़ी के संभावित स्वास्थ्य लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित मात्रा में और अच्छी तरह पकाकर खाई गई लिगड़ी से कई संभावित लाभ मिल सकते हैं। इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। एंटीऑक्सीडेंट शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक हो सकते हैं। विटामिन और खनिज शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को बनाए रखने में योगदान देते हैं। आयरन लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि कैल्शियम हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक माना जाता है। हालांकि किसी भी स्वास्थ्य लाभ को रोग के उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
क्या हर प्रकार की फर्न खाने योग्य होती है?
नहीं। वनस्पति वैज्ञानिकों के अनुसार सभी फर्न की प्रजातियां खाने योग्य नहीं होतीं। कुछ प्रजातियां विषैली भी हो सकती हैं। इसलिए केवल स्थानीय विशेषज्ञों द्वारा पहचानी गई सुरक्षित प्रजाति का ही सेवन करना चाहिए।
क्या हैं सावधानियां?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लिगड़ी को अच्छी तरह धोकर उबालने और पूरी तरह पकाने के बाद ही खाना चाहिए। पहली बार सेवन करने वाले लोग सीमित मात्रा से शुरुआत करें। यदि किसी को एलर्जी या विशेष स्वास्थ्य समस्या है तो चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
बढ़ रही है बाजार में मांग
पिछले कुछ वर्षों में ऑर्गेनिक और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग के कारण लिगड़ी अब स्थानीय मंडियों के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और बड़े शहरों के विशेष स्टोर्स में भी दिखाई देने लगी है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों और वन उत्पाद संग्राहकों को अतिरिक्त आय का अवसर भी मिल रहा है।
निष्कर्ष
लिगड़ी हिमालयी राज्यों की पारंपरिक खाद्य विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में प्राकृतिक रूप से पाई जाती है। पोषक तत्वों से भरपूर होने के बावजूद इसका सेवन हमेशा अच्छी तरह पकाकर और सुरक्षित पहचान वाली प्रजाति का ही करना चाहिए। यही सावधानी इसे स्वादिष्ट और सुरक्षित भोजन बनाती है।