
सुलखान सिंह पूर्व डीजीपी यूपी
आजकल देश में एक लहर सी चल रही है अपनी धार्मिकता साबित करने की। इसी बीच 'सनातन धर्म' (Sanatana Dharma), 'हिंदू धर्म' (Hinduism), 'सनातनी' (Sanatani) आदि सिक्के की तरह उछाले जा रहे हैं। इस सब प्रतिक्रिया में सबसे गौर करने वाली बात है - आक्रामकता, अहंकार, दम्भ, दूसरों के प्रति नफ़रत और ज़रा सी असहमति पर गाली-गलौज और निजी आरोप लगाना।
भारत में वेद, उपनिषद, महाभारत (Mahabharata) और रामायण (Ramayan) आदि में कहीं भी सनातन धर्म (Sanatana Dharma) अथवा हिन्दू धर्म (Hinduism) का जिक्र नहीं किया गया है। हमारे समाज में 'धर्म' शब्द निरपवाद रूप से 'कर्तव्य' के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। थोड़ा और विस्तार करके धर्म को 'वर्णाश्रम धर्म' के रूप में, दो श्रेणी में किया गया है -
अपने को पहचानना, आत्म-साक्षात्कार आदि आश्रम धर्म (Ashram religion) का ही एक घटक है। यह जीवन पर्यन्त का कर्तव्य है परन्तु यह भी वैकल्पिक है। अर्थात् इसका पालन न करने वाला अधर्मी नहीं कहा गया है।
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अब आधुनिक काल में प्रयुक्त हो रहे धर्म शब्द पर चर्चा जरूरी है। धर्म शब्द अंग्रेजी शब्द Religion और अरबी/फारसी शब्द 'मज़हब' के लिए प्रयुक्त हो रहा है यद्यपि कि यह ग़लत है। इसके लिए कोई अन्य शब्द बनाना चाहिये था। खैर रिलीजन/मज़हब की बात करें तो भारत में रिलीजन/मज़हब कई तरह के थे इनमें से किसी को भी अधर्म नहीं कहा गया और न ही इनके अनुयाई को अधर्मी। पूजा/उपासना की दृष्टि से भारत में शैव, वैष्णव, शाक्त, स्मार्त एवं अनन्य मूर्त/अमूर्त चर-अचर की पूजा करने वाले लोग भारत में रहे हैं। किंतु 'सनातन धर्म' अथवा 'हिंदू धर्म' (Hinduism) नामक कोई धर्म नहीं रहा है। कुछ लोग फिर से कर्मकाण्ड, जातिवाद, छुआछूत, जातीय श्रेष्ठता आदि अवांछनीय बातों को धर्म के रूप में स्थापित करने पर उतारू हैं।
इस तरह की दकियानूसी स्थापित करने में 'लोकतंत्र' सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए चुनाव के उद्देश्य से साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण किया गया है। उद्देश्य वही है - फिर से जातिवादी व्यवस्था स्थापित करना। इसीलिए, जो कोई भी इसके विरोध में अथवा सौहार्द की बात करता है, उसके ऊपर बहुत आक्रामक और अक्सर हिंसक प्रतिक्रिया व्यक्त की जाती है। अधिकांश/बहुसंख्यक हिन्दू समाज ही इस साज़िश का लक्ष्य है। इसलिए - सा व धा न , हो शि या र ।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।