अंकुरित अनाज को डाइट में शामिल करने के क्या फायदे हैं?
आजकल अंकुरित अनाज और बीजों को संतुलित आहार का हिस्सा बनाने की सलाह अक्सर दी जाती है। मूंग, चना, गेहूं और अन्य अनाज या बीजों को पानी में भिगोकर अंकुरित किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान बीज के भीतर कई जैव-रासायनिक बदलाव होते हैं, जिससे उसके पोषण संबंधी गुणों में परिवर्तन आ सकता है। वैज्ञानिक समीक्षाओं में अंकुरण के दौरान कुछ पोषक तत्वों की उपलब्धता, पाचन क्षमता और जैव-सक्रिय यौगिकों में बदलाव की जानकारी सामने आई है।
अंकुरण के दौरान क्या होता है?
जब बीज अंकुरित होता है तो उसके भीतर मौजूद एंजाइम सक्रिय होने लगते हैं। ये जटिल कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और अन्य घटकों को छोटे रूपों में तोड़ने की प्रक्रिया में भूमिका निभाते हैं। शोध समीक्षाओं के अनुसार, अंकुरण से कुछ अनाजों में प्रोटीन और स्टार्च की पाचन क्षमता बेहतर हो सकती है तथा कुछ विटामिन, अमीनो एसिड और जैव-सक्रिय यौगिकों में बदलाव देखा गया है।
हालांकि यह बदलाव हर अनाज या बीज में एक जैसा नहीं होता। अंकुरण की अवधि, तापमान, बीज की गुणवत्ता और इस्तेमाल किए गए अनाज या बीज के प्रकार के आधार पर पोषण संबंधी परिवर्तन अलग-अलग हो सकते हैं।
पाचन के लिहाज से हो सकता है उपयोगी
अंकुरण के दौरान कुछ जटिल पोषक घटकों का आंशिक विघटन होता है। इसी वजह से कुछ अध्ययनों में अंकुरित अनाज के स्टार्च और प्रोटीन की पाचन क्षमता में सुधार की बात सामने आई है। हालांकि इसे हर व्यक्ति में पाचन संबंधी समस्या का इलाज मानना उचित नहीं है।
पोषक तत्वों में हो सकता है बदलाव
वैज्ञानिक साहित्य के अनुसार अंकुरण के दौरान कुछ अनाजों में बी-समूह के विटामिन, अमीनो एसिड, फेनोलिक यौगिक और अन्य जैव-सक्रिय घटकों की मात्रा या उपलब्धता में बदलाव हो सकता है। लेकिन इसका प्रभाव खाद्य पदार्थ और अंकुरण की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
क्या अंकुरित अनाज बीमारियों से बचाता है?
अंकुरित अनाज को लेकर कई स्वास्थ्य दावे किए जाते हैं, लेकिन यहां सावधानी जरूरी है। एक वैज्ञानिक समीक्षा में कहा गया है कि अंकुरण से पोषण संबंधी बदलाव जरूर देखे गए हैं, लेकिन मनुष्यों में स्वास्थ्य लाभों को लेकर पर्याप्त क्लिनिकल प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए इनके आधार पर किसी बीमारी की रोकथाम या उपचार का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
इसलिए अंकुरित अनाज को संतुलित आहार का एक हिस्सा माना जा सकता है, किसी बीमारी की दवा या इलाज नहीं।
कच्चे स्प्राउट्स में खाद्य सुरक्षा का सवाल
अंकुरित अनाज के साथ खाद्य सुरक्षा पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुसार कच्चे या हल्के पके स्प्राउट्स में साल्मोनेला, लिस्टेरिया और ई. कोली जैसे हानिकारक बैक्टीरिया पनप सकते हैं। अंकुरण के लिए इस्तेमाल होने वाला गर्म और नम वातावरण बैक्टीरिया की वृद्धि के लिए भी अनुकूल हो सकता है।
FDA कच्चे स्प्राउट्स के बजाय उन्हें अच्छी तरह पकाने की सलाह देता है, क्योंकि पर्याप्त पकाने से खाद्यजनित संक्रमण का जोखिम कम होता है।
हाल में स्प्राउट्स से जुड़े खाद्य-सुरक्षा मामले भी सामने आए
सितंबर 2026 में FDA ने अमेरिका में ब्रोकली स्प्राउट्स से जुड़े साल्मोनेला संक्रमण की जांच की जानकारी दी थी और संबंधित वापस बुलाए गए उत्पादों को न खाने, न परोसने और न बेचने की सलाह दी थी। यह मामला यह समझने के लिए महत्वपूर्ण है कि पोषण के साथ खाद्य-सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
डाइट में कैसे शामिल करें?
अंकुरित मूंग, चना या अन्य उपयुक्त बीजों को भोजन में सलाद, चाट या पके हुए व्यंजन के रूप में शामिल किया जा सकता है। घर पर अंकुरण करते समय साफ पानी, साफ बर्तन और स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है। विशेष रूप से कच्चे स्प्राउट्स खाने से पहले खाद्य-सुरक्षा संबंधी जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए।
निष्कर्ष
अंकुरित अनाज में अंकुरण के दौरान कई पोषण संबंधी बदलाव होते हैं। कुछ मामलों में पोषक तत्वों की उपलब्धता और पाचन क्षमता में सुधार देखा गया है, लेकिन सभी स्वास्थ्य दावों के लिए पर्याप्त मानव-आधारित प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इन्हें संतुलित आहार का हिस्सा बनाना अधिक उचित है और कच्चे स्प्राउट्स की खाद्य-सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।