व्हाट्सऐप ने टीन अकाउंट्स के लिए नए पैरेंटल कंट्रोल शुरू किए हैं। माता-पिता ग्रुप्स, स्टेटस, चैनल्स, प्रोफाइल फोटो और मेटा एआई से जुड़ी सेटिंग्स पर निगरानी रख सकेंगे।
ग्लोबल | 30 सितंबर 2026
By Mohd Haris
व्हाट्सऐप में किशोरों के लिए नया पैरेंटल कंट्रोल
व्हाट्सऐप ने किशोरों के लिए नए पैरेंटल कंट्रोल पेश किए हैं। कंपनी के अनुसार, ये टूल्स माता-पिता और किशोरों को मिलकर अकाउंट की प्राइवेसी और सेफ्टी सेटिंग तय करने में मदद करेंगे। नए फीचर्स का मकसद किशोरों की डिजिटल गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाना है, लेकिन निजी बातचीत की गोपनीयता बनाए रखना भी इसकी प्रमुख शर्त है।
नए पैरेंटल कंट्रोल वैकल्पिक हैं। यानी हर परिवार अपनी जरूरत के मुताबिक इन सेटिंग्स को सक्रिय या निष्क्रिय कर सकता है। कंपनी ने इसे ऐसा सिस्टम बताया है जिसमें माता-पिता को जरूरी जानकारी मिले, जबकि किशोरों की निजी चैट और कॉल की प्राइवेसी बनी रहे।
प्रोफाइल फोटो और ग्रुप्स पर नियंत्रण
नए अपडेट में माता-पिता अपने किशोर के व्हाट्सऐप अकाउंट के कुछ प्राइवेसी सेटिंग्स तय कर सकेंगे। इनमें यह तय करना शामिल है कि किशोर की प्रोफाइल फोटो कौन देख सकता है और उसे व्हाट्सऐप ग्रुप्स में कौन जोड़ सकता है।
अगर किशोर इन निर्धारित प्राइवेसी सीमाओं को बदलकर उन्हें कम प्रतिबंधित करना चाहता है, तो माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी। इसके लिए माता-पिता द्वारा तय किया गया पिन इस्तेमाल किया जाएगा।
इस व्यवस्था से अभिभावकों को किशोरों के डिजिटल संपर्कों को लेकर अधिक जानकारी मिलेगी, लेकिन इसका उद्देश्य निजी चैट को पढ़ने की सुविधा देना नहीं है।
ग्रुप गतिविधि पर मिलेगा अलर्ट
व्हाट्सऐप के नए सिस्टम में माता-पिता को कुछ ग्रुप गतिविधि के बारे में नोटिफिकेशन भी मिलेगा।
अगर किशोर किसी नए ग्रुप में शामिल होता है या किसी ग्रुप से बाहर निकलता है, तो माता-पिता को इसकी जानकारी मिल सकती है। इसके अलावा, जिस ग्रुप में किशोर शामिल है, उसके सदस्यों की संख्या में बड़ा इजाफा होने पर भी अलर्ट दिया जा सकता है।
यह सुविधा पैरेंट्स को यह समझने में मदद करती है कि किशोर किन डिजिटल कम्युनिटी से जुड़ रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसका मतलब निजी ग्रुप बातचीत पढ़ने की अनुमति नहीं है।
चैनल्स और स्टेटस पर भी नए विकल्प
नए पैरेंटल कंट्रोल केवल ग्रुप्स तक सीमित नहीं हैं। माता-पिता यह भी तय कर सकेंगे कि किशोर व्हाट्सऐप चैनल्स का इस्तेमाल किस तरह करे।
स्टेटस से जुड़े प्राइवेसी ऑप्शंस भी इस सिस्टम का हिस्सा हैं। माता-पिता तय कर सकेंगे कि किशोर किन स्टेटस अपडेट्स को देख सकता है और किशोर के अपने स्टेटस को कौन देख सकता है।
इससे किशोरों के पब्लिक और सेमी-पब्लिक डिजिटल इंटरैक्शन पर परिवार के स्तर पर ज्यादा नियंत्रण स्थापित होगा।
मेटा एआई के लिए अलग सेफ्टी सेटिंग्स
व्हाट्सऐप ने नए पैरेंटल कंट्रोल में मेटा एआई को भी शामिल किया है।
माता-पिता किशोर के लिए मेटा एआई का उपयुक्त अनुभव चुन सकेंगे। उपलब्ध विकल्पों में डिफॉल्ट 13+ सेटिंग और इससे अधिक प्रतिबंधित कंटेंट लिमिटेड सेटिंग शामिल है।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब किशोरों की एआई सर्विसेज के साथ बढ़ती बातचीत ने प्राइवेसी, एज एप्रोप्रियेटनेस और डिजिटल सेफ्टी को महत्वपूर्ण मुद्दा बना दिया है।
यहां एक महत्वपूर्ण फर्क समझना जरूरी है। मेटा एआई से जुड़ी सेफ्टी सेटिंग और निजी व्हाट्सऐप मैसेज की प्राइवेसी अलग-अलग व्यवस्था हैं। कंपनी के अनुसार, नए पैरेंटल कंट्रोल सक्रिय होने के बाद भी व्यक्तिगत मैसेज और कॉल एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहेंगे।
निजी चैट माता-पिता को नहीं दिखाई जाएगी
नए सिस्टम का सबसे अहम हिस्सा प्राइवेसी से जुड़ा है।
कंपनी के अनुसार, पैरेंटल कंट्रोल सक्रिय होने के बावजूद किशोरों के पर्सनल मैसेज और कॉल निजी रहेंगे। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के कारण बातचीत को चैट के बाहर मौजूद लोग, यहां तक कि व्हाट्सऐप भी, पढ़ या सुन नहीं सकता।
इसका अर्थ है कि पैरेंटल कंट्रोल को कन्वर्सेशन मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में पेश नहीं किया गया है। इसका फोकस अकाउंट प्राइवेसी सेटिंग्स, ग्रुप गतिविधि और कुछ सेफ्टी ऑप्शंस पर है।
किशोरों की सुरक्षा और अभिभावकों की भूमिका
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किशोरों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल यह रहा है कि पैरेंट्स को कितनी निगरानी मिलनी चाहिए और किशोरों की प्राइवेसी कितनी बरकरार रहनी चाहिए।
व्हाट्सऐप का नया मॉडल इन दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। माता-पिता को कुछ महत्वपूर्ण अकाउंट सेटिंग्स पर अधिकार मिलता है, जबकि पर्सनल चैट्स और कॉल्स को निजी रखा जाता है।
कंपनी ने यह भी कहा है कि इन कंट्रोल्स को परिवारों की जरूरतों के आधार पर आगे विकसित किया जाएगा। यानी मौजूदा फीचर सेट अंतिम रूप नहीं माना गया है।
पिन आधारित अनुमति व्यवस्था
नए सिस्टम में पिन की भूमिका महत्वपूर्ण है। अगर किशोर किसी ऐसी प्राइवेसी सेटिंग को कम प्रतिबंधित करना चाहता है जिसे माता-पिता ने नियंत्रित किया है, तो अभिभावक की अनुमति जरूरी होगी।
इससे अकाउंट सेटिंग्स में अनधिकृत बदलाव रोकने की कोशिश की गई है। साथ ही, पैरेंट्स के पास अपने परिवार की जरूरत के अनुसार कंट्रोल लेवल बदलने का विकल्प रहेगा।
कंपनी के मुताबिक, पैरेंट्स इन कंट्रोल्स को बाद में बदल भी सकते हैं या बंद कर सकते हैं।
यह अपडेट क्यों महत्वपूर्ण है
किशोरों के लिए मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स केवल निजी बातचीत तक सीमित नहीं रहे हैं। ग्रुप्स, चैनल्स, स्टेटस और एआई सर्विसेज ने कम्युनिकेशन का दायरा बढ़ाया है।
ऐसे में पैरेंट्स के लिए केवल स्क्रीन टाइम जानना पर्याप्त नहीं होता। उन्हें यह भी समझना होता है कि बच्चा किन तरह के डिजिटल स्पेसेज से जुड़ रहा है और उसकी प्राइवेसी सेटिंग्स किस स्तर पर हैं।
व्हाट्सऐप का नया अपडेट इसी हिस्से पर ध्यान देता है। इसमें पैरेंट्स को हर बातचीत देखने की सुविधा देने के बजाय कुछ महत्वपूर्ण इंटरैक्शन और प्राइवेसी कंट्रोल्स दिए गए हैं।
प्राइवेसी और पैरेंटल कंट्रोल के बीच संतुलन
इस अपडेट की एक अहम विशेषता यह है कि पैरेंटल सुपरविजन को निजी बातचीत तक नहीं बढ़ाया गया है।
किशोरों के पर्सनल मैसेज और कॉल्स एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड रहेंगे। वहीं पैरेंट्स को ग्रुप्स में शामिल होने या छोड़ने जैसी गतिविधियों की सूचना मिल सकती है।
इस अंतर को समझना जरूरी है क्योंकि पैरेंटल कंट्रोल का मतलब यहां फुल अकाउंट सर्विलांस नहीं है। यह मुख्य रूप से सेटिंग्स और एक्टिविटी अलर्ट्स पर आधारित व्यवस्था है।
किशोरों के लिए डिजिटल सेफ्टी का बदलता मॉडल
व्हाट्सऐप पहले भी कम उम्र के यूजर्स के लिए अलग सेफ्टी व्यवस्था विकसित कर चुका है। 2026 में कंपनी ने पैरेंट-मैनेज्ड अकाउंट्स की दिशा में भी कदम बढ़ाया था, जिसमें छोटे बच्चों के व्हाट्सऐप इस्तेमाल को मैसेज और कॉल्स तक सीमित करने तथा कॉन्टैक्ट और ग्रुप सेटिंग्स को पैरेंट्स के नियंत्रण में रखने की व्यवस्था शामिल थी।
अब टीन अकाउंट्स के लिए नया मॉडल अलग है। इसमें किशोरों को ज्यादा स्वतंत्रता के साथ पैरेंट्स को कुछ अतिरिक्त सुपरविजन कंट्रोल्स दिए जा रहे हैं।
यह बदलाव उम्र के साथ डिजिटल इंडिपेंडेंस बढ़ाने और सेफ्टी ओवरसाइट बनाए रखने के बीच एक अलग नीति दृष्टिकोण को दिखाता है।
जमीनी हकीकत में क्या बदलेगा
व्यवहारिक तौर पर नए कंट्रोल्स का असर परिवारों के इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करेगा।
अगर पैरेंट्स प्राइवेसी सेटिंग्स, ग्रुप अलर्ट्स और स्टेटस कंट्रोल्स का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें किशोरों के व्हाट्सऐप नेटवर्क के बारे में अधिक कॉन्टेक्स्ट मिलेगा।
लेकिन इससे हर ऑनलाइन रिस्क खत्म नहीं होगा। किशोर दूसरे प्लेटफॉर्म्स, वेबसाइट्स या ऐप्स का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसलिए व्हाट्सऐप का यह अपडेट डिजिटल सेफ्टी का एक हिस्सा है, पूरी सुरक्षा व्यवस्था नहीं।
पैरेंट्स के लिए क्या जरूरी है
माता-पिता को सबसे पहले यह समझना होगा कि कौन सी सेटिंग उनके किशोर के लिए उपयुक्त है। हर परिवार के लिए एक जैसा कंट्रोल लेवल जरूरी नहीं है।
पैरेंट्स को किशोर के साथ बातचीत करके प्राइवेसी सेटिंग्स तय करनी चाहिए। पिन आधारित परमिशन सिस्टम को भी स्पष्ट तरीके से समझाना जरूरी है।
साथ ही, ग्रुप अलर्ट्स मिलने का अर्थ यह नहीं है कि हर ग्रुप या कॉन्टैक्ट अपने आप जोखिमपूर्ण है। किसी डिजिटल गतिविधि का कॉन्टेक्स्ट समझना जरूरी रहेगा।
आगे क्या
व्हाट्सऐप ने संकेत दिया है कि टीन पैरेंटल कंट्रोल्स को आगे भी विकसित किया जाएगा। कंपनी के अनुसार, यह शुरुआत है और परिवारों से मिलने वाली जरूरतों के आधार पर नए विकल्प जोड़े जा सकते हैं।
फिलहाल नया अपडेट पैरेंट्स को ग्रुप्स, प्रोफाइल फोटो, चैनल्स, स्टेटस और मेटा एआई जैसी सुविधाओं पर अतिरिक्त नियंत्रण देता है। दूसरी तरफ पर्सनल मैसेज और कॉल्स की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन बरकरार रखी गई है।
व्हाट्सऐप का नया कदम किशोरों की डिजिटल सेफ्टी और पर्सनल प्राइवेसी के बीच एक नियंत्रित संतुलन तैयार करने की कोशिश है। इसकी वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि फैमिलीज इन कंट्रोल्स को किस तरह इस्तेमाल करती हैं और किशोरों के साथ डिजिटल सेफ्टी को लेकर कितना संवाद होता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।