गुरुवार, 27 August 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 76933.59 ▼ -0.7%
BITCOIN $80471 ▲ 3.04%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Book Your Ads With Shah Times
India

भारत की सबसे बड़ी और पुरानी बावड़ी कौन सी है? जानिए पूरा इतिहास

Neelam Saini 2026-08-27 19:10:21
भारत की सबसे बड़ी और पुरानी बावड़ी कौन सी है? जानिए पूरा इतिहास

राजस्थान की चांद बावड़ी करीब आठवीं-नौवीं शताब्दी की मानी जाती है। इसकी गहराई लगभग 19.5 मीटर है और तीन तरफ बनी सीढ़ियों की कई कतारें इसे अद्भुत जल स्थापत्य बनाती हैं।

भारत की धरती पर पानी को सहेजने की परंपरा हजारों साल पुरानी है। इसी परंपरा ने ऐसे अद्भुत जल स्थापत्य को जन्म दिया, जिन्हें आज हम बावड़ी, वाव या सीढ़ीदार कुएं के नाम से जानते हैं। राजस्थान के दौसा जिले के आभानेरी गांव में स्थित चांद बावड़ी इसी परंपरा की ऐसी ऐतिहासिक मिसाल है, जिसे भारत की सबसे बड़ी और पुरानी बावड़ियों में गिना जाता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार यह बावड़ी करीब 19.5 मीटर गहरी है और इसकी बनावट में तीन तरफ सीढ़ियों की व्यवस्था है। 

हालांकि यहां एक जरूरी तथ्य समझना जरूरी है। भारत की एक ही बावड़ी को आधिकारिक तौर पर हर पैमाने पर ‘सबसे बड़ी और सबसे पुरानी’ कहना सही नहीं होगा। अलग-अलग बावड़ियों की तुलना गहराई, निर्माण काल, आकार, सीढ़ियों और स्थापत्य की जटिलता के आधार पर अलग-अलग होती है। चांद बावड़ी को उसकी प्राचीनता और विशाल सीढ़ीदार संरचना के कारण भारत की सबसे प्रसिद्ध और बड़ी ऐतिहासिक बावड़ियों में स्थान मिलता है।

कहां स्थित है चांद बावड़ी?

चांद बावड़ी राजस्थान के दौसा जिले के आभानेरी गांव में स्थित है। यह क्षेत्र राजस्थान के उन इलाकों में रहा है जहां पानी का संरक्षण सदियों से जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। रेगिस्तानी और अर्ध-शुष्क जलवायु वाले राजस्थान में वर्षा का पानी सीमित समय के लिए उपलब्ध रहता था। ऐसे में भूमिगत जल तक पहुंचने और उसे लंबे समय तक उपयोग करने के लिए बावड़ियों का निर्माण बेहद उपयोगी तकनीक साबित हुआ। चांद बावड़ी इसी सोच का शानदार उदाहरण है।

किसने बनवाई थी चांद बावड़ी?

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार चांद बावड़ी का नाम राजा चांद से जुड़ा है, जिन्हें आठवीं शताब्दी का राजपूत शासक माना जाता है। 
विभिन्न ऐतिहासिक स्रोत इसके निर्माण को लगभग आठवीं-नौवीं शताब्दी के बीच रखते हैं। इस वजह से चांद बावड़ी को भारत की प्राचीन सीढ़ीदार जल संरचनाओं में महत्वपूर्ण स्थान मिलता है। इतिहासकारों और विरासत विशेषज्ञों के लिए यह सिर्फ एक कुआं नहीं, बल्कि उस दौर की जल प्रबंधन तकनीक, सामाजिक जीवन और स्थापत्य कौशल को समझने का माध्यम है।

हजारों सीढ़ियों की अनोखी बनावट

चांद बावड़ी की सबसे खास बात इसकी सीढ़ियां हैं।

बावड़ी में पानी के स्तर तक पहुंचने के लिए दोनों ओर से व्यवस्थित सीढ़ियां नीचे की तरफ जाती हैं। इसकी सीढ़ियों की ज्यामितीय व्यवस्था दूर से देखने पर एक विशाल उल्टे पिरामिड जैसी आकृति बनाती है। विभिन्न स्रोतों में इसकी सीढ़ियों की संख्या करीब ३५०० बताई जाती है। यही कारण है कि चांद बावड़ी की तस्वीरें देखने पर इसकी ज्यामितीय संरचना तुरंत ध्यान खींचती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इसे करीब 19.5 मीटर गहरी संरचना बताता है और तीन तरफ दस स्तरों पर सीढ़ियों की व्यवस्था का उल्लेख करता है। चौथी तरफ बहुमंजिला गलियारा बना है, जिसमें स्तंभ और नक्काशीदार हिस्से मौजूद हैं। 

पानी के लिए बनी, लेकिन बन गई स्थापत्य कला की मिसाल

बावड़ी का मूल उद्देश्य पानी तक पहुंच उपलब्ध कराना था, लेकिन चांद बावड़ी का निर्माण केवल उपयोगिता तक सीमित नहीं रहा।
इसके आसपास बने गलियारों, स्तंभों और सजावटी तत्वों में उस समय के स्थापत्य कौशल की झलक दिखाई देती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के विवरण के अनुसार उत्तर दिशा में बहुमंजिला गलियारा है और वहां सुंदर प्रतिमाओं वाले आले भी मौजूद हैं। इससे पता चलता है कि प्राचीन भारत में जल संरचनाओं को केवल तकनीकी ढांचे के रूप में नहीं देखा जाता था। वे सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का भी हिस्सा थीं।

गर्मियों में क्यों महत्वपूर्ण थी बावड़ी?

राजस्थान जैसे गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क क्षेत्र में पानी का महत्व हमेशा बहुत अधिक रहा है। बावड़ी की गहरी संरचना का एक फायदा यह था कि जैसे-जैसे लोग सीढ़ियों से नीचे जाते थे, तापमान अपेक्षाकृत ठंडा महसूस होता था। यही कारण है कि ऐतिहासिक बावड़ियां यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ कुछ समय आराम करने की जगह भी बन गई थीं। चांद बावड़ी की गहराई और भूमिगत संरचना इसे गर्म जलवायु में विशेष रूप से उपयोगी बनाती थी।

बावड़ी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं थी

पुराने समय में बावड़ियां सामाजिक जीवन का भी हिस्सा हुआ करती थीं। यात्रियों के लिए पानी, स्थानीय लोगों के लिए दैनिक जरूरत और आसपास रहने वाले समुदायों के लिए मेल-जोल की जगह—इन सभी भूमिकाओं ने बावड़ियों को महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल बना दिया।
चांद बावड़ी की संरचना में भी पानी के साथ-साथ आवागमन और विश्राम के लिए बनाए गए स्थापत्य तत्व दिखाई देते हैं। यानी आज जिस जगह को हम ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में देखते हैं, कभी वह स्थानीय जीवन की व्यावहारिक जरूरतों का अहम केंद्र रही होगी।

चांद बावड़ी और रानी की वाव में क्या अंतर है?

भारत की प्रसिद्ध बावड़ियों की चर्चा में गुजरात की रानी की वाव का नाम भी प्रमुखता से आता है। लेकिन दोनों की विशेषताएं अलग हैं।
रानी की वाव गुजरात के पाटन में सरस्वती नदी के किनारे 11वीं शताब्दी में निर्मित हुई थी। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अनुसार यह सात स्तरों तक उतरती है और इसमें 500 से अधिक प्रमुख मूर्तियां तथा 1000 से अधिक छोटी नक्काशियां हैं। 

यूनेस्को के अनुसार रानी की वाव को भूमिगत जल वास्तुकला और मारू-गुर्जर स्थापत्य की उत्कृष्ट मिसाल माना जाता है। इसे 2014 में विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया। इसलिए यदि सवाल सबसे पुरानी और विशाल सीढ़ीदार बावड़ियों का हो तो चांद बावड़ी का नाम प्रमुखता से आता है, जबकि सबसे विकसित, अलंकृत और कलात्मक बावड़ियों की बात हो तो रानी की वाव का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है।

क्या चांद बावड़ी भारत की सबसे गहरी बावड़ी है?

इस सवाल का जवाब भी सावधानी से देना जरूरी है।

चांद बावड़ी निश्चित रूप से भारत की सबसे गहरी और बड़ी ऐतिहासिक बावड़ियों में शामिल है, लेकिन भारत की सभी बावड़ियों को एक ही पैमाने पर मापकर इसे निर्विवाद रूप से ‘सबसे गहरी’ कहना उचित नहीं होगा। भारतीय उपमहाद्वीप में अलग-अलग काल और क्षेत्रों में अनेक प्रकार की जल संरचनाएं बनाई गईं। उनकी गहराई, चौड़ाई, जलाशय और निर्माण शैली अलग-अलग रही है। इसलिए चांद बावड़ी की सबसे बड़ी विशेषता केवल उसकी गहराई नहीं, बल्कि उसकी प्राचीनता, हजारों सीढ़ियों वाली ज्यामितीय संरचना और स्थापत्य की भव्यता का एक साथ दिखाई देना है।

सदियों तक कैसे बची रही?

चांद बावड़ी की सबसे बड़ी खूबी यह भी है कि सदियों बाद भी इसकी मूल संरचना लोगों को उस समय की तकनीकी क्षमता का अंदाजा देती है। पत्थरों से बनी विशाल सीढ़ियां, गहरी जल संरचना और उसके चारों तरफ की वास्तुकला यह बताती है कि उस दौर के निर्माणकर्ताओं को जल, भूगोल और स्थानीय परिस्थितियों की गहरी समझ रही होगी। आज यह स्थल भारतीय पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आज पर्यटकों के लिए क्यों खास है?

चांद बावड़ी आज राजस्थान आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र है। इसकी सबसे खास पहचान है—ऊपर से नीचे तक जाती असंख्य सीढ़ियां और उनका लगभग एक समान ज्यामितीय पैटर्न। कैमरे में कैद होने वाला यह दृश्य इसे भारत की सबसे चर्चित ऐतिहासिक बावड़ियों में शामिल करता है। इतिहास, वास्तुकला और फोटोग्राफी में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह जगह खास महत्व रखती है।

भारत की प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली की मिसाल

चांद बावड़ी का इतिहास केवल राजाओं और स्थापत्य तक सीमित नहीं है। यह उस दौर की जल प्रबंधन की समझ को भी सामने लाता है।आज जब जल संरक्षण को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है, तब सदियों पुरानी ये संरचनाएं यह याद दिलाती हैं कि भारतीय समाज ने स्थानीय जलवायु और भूगोल के अनुसार पानी को सहेजने के कई व्यावहारिक तरीके विकसित किए थे। रानी की वाव पर यूनेस्को भी इसे भूमिगत जल संसाधन और जल प्रबंधन प्रणाली का असाधारण उदाहरण बताता है। 

निष्कर्ष

राजस्थान की चांद बावड़ी सिर्फ पत्थरों से बनी एक पुरानी बावड़ी नहीं है। यह भारत की प्राचीन जल संरक्षण परंपरा, स्थापत्य कौशल और सामाजिक जीवन की जीवंत विरासत है। करीब आठवीं-नौवीं शताब्दी से जुड़ी यह संरचना अपनी लगभग 19.5 मीटर गहराई, हजारों सीढ़ियों और अनोखी ज्यामितीय बनावट के कारण आज भी लोगों को आकर्षित करती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इसे राजा चांद से जुड़ी ऐतिहासिक बावड़ी के रूप में दर्ज करता है। इसलिए अगर सवाल हो कि भारत की सबसे प्रसिद्ध प्राचीन और विशाल सीढ़ीदार बावड़ियों में कौन सी बावड़ी सबसे खास है, तो चांद बावड़ी का नाम सबसे पहले लिए जाने वाले नामों में शामिल होगा। वहीं भारत की बावड़ी स्थापत्य परंपरा की भव्यता समझने के लिए गुजरात की रानी की वाव भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। 

ADVERTISEMENT
Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर