पुलकित मणि स्टैंड-अप कॉमेडियन और डिजिटल क्रिएटर हैं। राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम में मोदी मिमिक्री के बाद उनका नाम सियासी विवाद में आया। पहले वे कॉपीराइट विवाद में भी कोर्ट पहुंचे।
Location | Date
इंदौर, मध्य प्रदेश | 22 सितंबर 2026
By Wasi siddiqui
स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि इन दिनों सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस में चर्चा का विषय बने हुए हैं। 19 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में मणि मंच पर नजर आए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैली और सार्वजनिक व्यवहार की मिमिक्री की। इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ और भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई।
पुलकित मणि की पहचान केवल इस कार्यक्रम से नहीं बनी है। वे पिछले कुछ वर्षों से स्टैंड-अप कॉमेडी और डिजिटल कंटेंट से जुड़े हैं। सोशल मीडिया पर उनका नाम ‘हनी’ और हैंडल ‘@hunnywhoisfunny’ के तौर पर सामने आता है। उनकी कॉमेडी में पब्लिक फिगर्स की मिमिक्री, राजनीतिक व्यंग्य और समसामयिक मुद्दों पर टिप्पणी शामिल रहती है।
उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पुलकित मणि ने करीब 2021 से प्रोफेशनल स्टैंड-अप कॉमेडी करना शुरू किया। कॉमेडी में आने से पहले वे नोएडा के एक स्कूल में फ्रेंच टीचर के तौर पर काम कर चुके हैं। उनके बारे में यह भी रिपोर्ट किया गया है कि उन्होंने ट्रांसलेशन से जुड़े काम किए थे। यह जानकारी सार्वजनिक प्रोफाइल और मीडिया रिपोर्टिंग पर आधारित है।
उनकी डिजिटल पहचान इंस्टाग्राम और यूट्यूब के जरिए मजबूत हुई। उनका इंस्टाग्राम अकाउंट ‘@hunnywhoisfunny’ है। सितंबर 2026 की विभिन्न रिपोर्टों में इस अकाउंट के करीब छह लाख से अधिक फॉलोअर्स बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में संख्या करीब 5.9 लाख से 6.1 लाख के बीच बताई गई है, इसलिए इसे एक स्थिर वर्तमान आंकड़े के बजाय रिपोर्टेड फॉलोअर काउंट के रूप में देखना उचित है।
पुलकित मणि ने डिजिटल कॉमेडी के साथ अपना स्टैंड-अप स्पेशल भी जारी किया। ‘रॉ हनी’ फरवरी 2026 में यूट्यूब पर रिलीज हुआ। रिपोर्टों के अनुसार उनका कॉमेडी कंटेंट राजनीतिक मिमिक्री और ऑब्जर्वेशनल ह्यूमर पर भी आधारित रहा है।
उनकी चर्चित प्रस्तुतियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैली की मिमिक्री भी शामिल रही है। 2026 में मोदी के विदेशी नेताओं के साथ संवाद, हावभाव और ‘माय फ्रेंड’ जैसे सार्वजनिक रूप से पहचाने जाने वाले अंदाज की पैरोडी वाला उनका एक वीडियो व्यापक चर्चा में आया। बाद में भारत में उस कंटेंट की उपलब्धता को लेकर भी विवाद हुआ। रिपोर्टों में इसे सरकारी कानूनी मांग के बाद इंस्टाग्राम द्वारा प्रतिबंधित किए जाने से जोड़ा गया है। हालांकि, इस घटना को लेकर किसी अदालत के ऐसे अंतिम फैसले की जानकारी सामने नहीं है जिसमें मणि की पैरोडी को गैरकानूनी घोषित किया गया हो।
19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की। उपलब्ध वीडियो और रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने प्रधानमंत्री की बोलने की शैली, विदेशी नेताओं के साथ संवाद और कुछ चर्चित सार्वजनिक प्रसंगों को कॉमेडी का हिस्सा बनाया। राहुल गांधी मंच पर मौजूद थे और प्रस्तुति के दौरान उनसे संवाद भी हुआ।
इस प्रस्तुति के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री और एक बुजुर्ग महिला के संदर्भ में आपत्तिजनक बताया। बीजेपी की ओर से राहुल गांधी और कांग्रेस पर भी निशाना साधा गया। दूसरी ओर, कांग्रेस से जुड़े पक्षों ने इसे राजनीतिक व्यंग्य और हास्य प्रस्तुति के तौर पर पेश किया। इन दोनों व्याख्याओं को अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के बयान के रूप में देखना चाहिए।
विवाद केवल मोदी की मिमिक्री तक सीमित नहीं रहा। प्रस्तुति में प्रधानमंत्री के एक बुजुर्ग महिला के लिए कुर्सी मंगाने वाले सार्वजनिक प्रसंग का भी संदर्भ आया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि इस हिस्से में प्रधानमंत्री और महिला का अपमान हुआ। यह राजनीतिक पक्ष का आरोप है, किसी न्यायिक निष्कर्ष का दर्जा इसे नहीं मिला है।
सोशल मीडिया पर वीडियो के प्रसार के बाद राहुल गांधी और पुलकित मणि की मंच पर मौजूदगी भी चर्चा में रही। कांग्रेस से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स ने कार्यक्रम के अंश साझा किए। इसके बाद राजनीतिक बहस और तेज हुई।
पुलकित मणि और कॉमेडियन कुणाल कामरा को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा है। दोनों के बीच तस्वीरें या कॉमेडी सर्किट से जुड़े संदर्भों की चर्चा कुछ जगहों पर दिखाई देती है। लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टिंग से यह स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं होता कि कुणाल कामरा को पुलकित मणि का ‘खास दोस्त’ कहना तथ्यात्मक रूप से सही है।
इसलिए इस दावे को स्थापित तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा। दोनों कॉमेडियनों का राजनीतिक व्यंग्य और समसामयिक मुद्दों पर कॉमेडी से जुड़ाव जरूर अलग-अलग रिपोर्टों में सामने आता है, लेकिन व्यक्तिगत रिश्ते की प्रकृति पर ठोस सार्वजनिक प्रमाण जरूरी है।
पुलकित मणि सितंबर 2026 में एक अलग कानूनी मामले के कारण भी खबरों में आए। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी दो रील्स हटाए जाने और कॉपीराइट स्ट्राइक लगाए जाने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।
मणि का आरोप था कि अज्ञात लोगों की कॉपीराइट शिकायतों के आधार पर उनकी मूल सामग्री हटाई गई। मुकदमे में मेटा प्लेटफॉर्म्स, गूगल, व्हाट्सऐप, माइक्रोसॉफ्ट, केंद्र सरकार के संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग और कुछ अज्ञात पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया।
9 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान मेटा ने अदालत को बताया कि संबंधित दो इंस्टाग्राम रील्स बहाल कर दी गई हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को समन जारी किया और अंतरिम राहत की अर्जी पर नोटिस जारी किया। अदालत ने उस चरण पर मणि के आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं की थी।
मणि की याचिका के मुताबिक, हटाई गई दो रील्स में एक उनके अपने स्टैंड-अप प्रदर्शन का हिस्सा थी। दूसरी सामग्री के बारे में उन्होंने दावा किया कि उसे मूल निर्माता की जानकारी, भागीदारी और सहमति के साथ एडिट और रीमिक्स किया गया था।
मणि ने आरोप लगाया कि कॉपीराइट शिकायतों के बाद मेटा ने सामग्री हटाई और उनके अकाउंट पर स्ट्राइक दर्ज की। उन्होंने बाद में अपील भी की और अपनी सामग्री के लेखकत्व तथा पहले प्रकाशित होने से जुड़े दस्तावेज देने का दावा किया। अदालत में इन आरोपों पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
मेटा ने अदालत को संबंधित रील्स बहाल करने की जानकारी दी। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया में शिकायतों की वैधता, संबंधित पक्षों की पहचान और दूसरे राहत संबंधी सवालों पर सुनवाई होनी है।
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद पुलकित मणि के नोएडा, लखनऊ और कानपुर में प्रस्तावित शो भी चर्चा में आए। मणि ने सोशल मीडिया पर शो रद्द होने की जानकारी दी। लखनऊ और कानपुर के शो रद्द करने की वजह उन्होंने कथित धमकियों को बताया।
हालांकि, शो किस पक्ष ने रद्द किए और आयोजन संबंधी अंतिम फैसला किस स्तर पर हुआ, इस बारे में उपलब्ध रिपोर्टों में पूरी तरह एक समान जानकारी नहीं है। इसलिए इसे उनके बयान के रूप में ही रिपोर्ट करना उचित है।
पुलकित मणि का मामला भारत में राजनीतिक व्यंग्य और कॉमेडी को लेकर चल रही व्यापक बहस का एक नया उदाहरण है। एक तरफ कॉमेडियन सार्वजनिक व्यक्तियों की मिमिक्री को हास्य और राजनीतिक टिप्पणी का हिस्सा मानते हैं। दूसरी तरफ राजनीतिक दल और उनके समर्थक ऐसी प्रस्तुतियों को सम्मान, मर्यादा और सार्वजनिक संवाद के संदर्भ में देखते हैं।
इस मामले में भी दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया अलग रही। बीजेपी नेताओं ने प्रस्तुति पर आपत्ति जताई, जबकि कांग्रेस से जुड़े लोगों ने इसे व्यंग्य और राजनीतिक कॉमेडी के तौर पर देखा। किसी भी पक्ष की राजनीतिक व्याख्या को न्यायिक निष्कर्ष के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
पुलकित मणि के सामने फिलहाल दो अलग-अलग तरह के घटनाक्रम हैं। एक ओर ‘छात्रों की गूंज’ में हुई प्रस्तुति से जुड़ा राजनीतिक विवाद है। दूसरी ओर दिल्ली हाईकोर्ट में कॉपीराइट स्ट्राइक से संबंधित मामला जारी है।
उनके शो की वापसी, सोशल मीडिया कंटेंट की स्थिति और अदालत की अगली कार्यवाही आने वाले दिनों में उनकी सार्वजनिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। लेकिन मौजूदा स्थिति में यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन विवादों का उनके कॉमेडी करियर पर स्थायी असर पड़ेगा।
लेकिन उनकी पहचान केवल इस विवाद तक सीमित नहीं है। वे 2021 से स्टैंड-अप कॉमेडी कर रहे हैं, ‘रॉ हनी’ जैसा स्पेशल जारी कर चुके हैं और सोशल मीडिया पर राजनीतिक व्यंग्य तथा मिमिक्री के जरिए बड़ी ऑडियंस बना चुके हैं। साथ ही, कॉपीराइट स्ट्राइक को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहा मामला उनके डिजिटल करियर का एक अलग और महत्वपूर्ण अध्याय है।
इसलिए पुलकित मणि की मौजूदा कहानी को केवल राहुल गांधी के साथ एक वायरल वीडियो के नजरिए से देखना अधूरा होगा। उपलब्ध रिकॉर्ड उन्हें ऐसे कॉमेडियन के रूप में दिखाते हैं जिसकी डिजिटल लोकप्रियता, राजनीतिक व्यंग्य और कानूनी विवाद अब एक ही सार्वजनिक विमर्श में आ गए हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।