कटरीना कैफ की मां सुजैन टरकोटे तमिलनाडु के ग्रामीण इलाके में बच्चों की शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े काम करती हैं। 2008 में वहां पहुंचने के बाद उन्होंने राहत परियोजनाओं के जरिए शिक्षा पहल शुरू की। 2015 में माउंटेन व्यू स्कूल की शुरुआत हुई, जो अब 300 से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच चुका है।
📍 तमिलनाडु
🗓️ 22 सितंबर 2026
✍️ वसी सिद्दीकी
बॉलीवुड अभिनेत्री कटरीना कैफ की पहचान फिल्म इंडस्ट्री की कामयाब अभिनेत्रियों में होती है, लेकिन उनकी मां सुजैन टरकोटे ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा ग्लैमर से दूर सामाजिक सेवा में लगाया है। वह तमिलनाडु के ग्रामीण इलाके में रहकर वंचित बच्चों की शिक्षा और समुदाय से जुड़े कामों में सक्रिय हैं।
सुजैन की जिंदगी चर्चा में इसलिए आई है क्योंकि जिस ग्रामीण इलाके में वह रहती हैं, वहां बिजली की आपूर्ति सीमित है और इंटरनेट कनेक्टिविटी भी हमेशा उपलब्ध नहीं रहती। कटरीना ने अपने पुराने इंटरव्यू में बताया था कि कई बार बिजली और इंटरनेट नहीं होने की वजह से वह अपनी मां से वीडियो कॉल तक नहीं कर पातीं।
रिपोर्टों के मुताबिक सुजैन पहले लंदन में रहती थीं। साल 2008 में उन्होंने तमिलनाडु का रुख किया और ग्रामीण इलाकों में बच्चों की शिक्षा के लिए काम शुरू किया। उन्होंने रिलीफ प्रोजेक्ट्स इंडिया नाम की सामाजिक संस्था के जरिए सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मुफ्त शाम की शिक्षा की पहल शुरू की।
समय के साथ यह पहल केवल ट्यूशन तक सीमित नहीं रही। संस्था ने शिक्षा के अलावा स्वास्थ्य, बाल संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण समुदाय के विकास से जुड़े कार्यक्रमों पर भी काम किया। इंडिया टुडे के अनुसार संस्था की गतिविधियां तमिलनाडु के 25 ग्रामीण गांवों तक फैली हुई हैं।
सुजैन ने साल 2015 में माउंटेन व्यू स्कूल की शुरुआत की। शुरुआती दौर में यहां सीमित संख्या में छोटे बच्चे पढ़ते थे। बाद में यह पहल प्राथमिक स्कूल के रूप में विकसित हुई और विद्यार्थियों की संख्या 300 से अधिक बताई गई है।
स्कूल का फोकस आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवारों के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराना है। सुजैन खुद भी शिक्षण गतिविधियों से जुड़ी रही हैं। कटरीना ने सार्वजनिक तौर पर अपनी मां को शिक्षक और समाजसेवी के रूप में याद किया है।
कटरीना ने पुराने इंटरव्यू में अपनी मां के जीवन की कठिनाइयों का जिक्र किया था। उनके मुताबिक गांव में दिन के कई घंटों तक बिजली उपलब्ध नहीं रहती। उन्होंने यह भी बताया था कि इंटरनेट सेवा हर समय काम नहीं करती, इसलिए मां से संपर्क के लिए सामान्य फोन कॉल का सहारा लेना पड़ता है।
गर्मी भी वहां बड़ी चुनौती है। कटरीना ने कहा था कि बिजली की कमी के कारण एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाएं हमेशा उपलब्ध नहीं होतीं। उनके मुताबिक उनकी मां ने लोगों के बीच रहकर काम करने के लिए इस जीवनशैली को स्वीकार किया है।
कटरीना कई मौकों पर अपनी मां के सामाजिक काम की तारीफ कर चुकी हैं। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उनकी मां बच्चों के लिए स्कूल चलाती हैं और वहां पढ़ाती हैं। कटरीना ने अपने जीवन में मां के परोपकारी काम के असर का भी जिक्र किया था।
एक अन्य बातचीत में कटरीना ने अपनी मां की ग्रामीण जिंदगी को कठिन बताया था। उन्होंने कहा था कि ऐसी परिस्थितियों में रहकर लोगों की मदद करने के लिए अलग तरह की प्रतिबद्धता चाहिए। यह बयान कटरीना के निजी अनुभव और उनकी मां के बारे में उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है।
कटरीना की ओर से अपनी मां के सामाजिक काम को आर्थिक सहयोग दिए जाने की रिपोर्टें पहले भी सामने आती रही हैं। मिड-डे ने साल 2018 में रिपोर्ट किया था कि कटरीना फिल्मों और रियलिटी शो से होने वाली कमाई का एक हिस्सा माउंटेन व्यू स्कूल के लिए देती रही हैं।
इंडिया टुडे ने भी हालिया रिपोर्ट में उनके आर्थिक सहयोग का उल्लेख किया है। हालांकि कटरीना खुद इस तरह की मदद को प्रचार का विषय नहीं बनातीं।
साल 2022 में कटरीना ने स्कूल के कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो साझा किए थे। उन्होंने बताया था कि स्कूल में 3 नए क्लासरूम बनाए गए हैं, जिनके लिए दानदाताओं से मिली मदद का इस्तेमाल हुआ।
रिपोर्टों में सुजैन के निजी जीवन का भी उल्लेख मिलता है। कटरीना के मुताबिक, अलगाव के बाद उनकी मां ने 8 बच्चों की परवरिश की। अभिनेत्री ने अपने बचपन को भी सादगी और सीमित साधनों वाला बताया है।
कटरीना के सार्वजनिक बयानों से यह संकेत मिलता है कि सामाजिक सेवा उनके परिवार के लिए कोई नया अध्याय नहीं था। उन्होंने बचपन से अपनी मां को जरूरतमंद लोगों के लिए काम करते देखा था।
रिलीफ प्रोजेक्ट्स इंडिया से जुड़ी हालिया जानकारी के मुताबिक संगठन की गतिविधियों का दायरा शिक्षा से आगे बढ़कर स्वास्थ्य, किशोर विकास, महिला सशक्तीकरण, जीवन कौशल, करियर मार्गदर्शन और स्वास्थ्य जांच जैसे क्षेत्रों तक पहुंचा है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि तमिलनाडु में सुजैन की मौजूदगी केवल एक स्कूल चलाने तक सीमित नहीं है। उनका काम ग्रामीण समुदायों में शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े कई पहलुओं को कवर करता है।
सुजैन के ग्रामीण जीवन को लेकर सामने आई रिपोर्टों में एक बात लगातार सामने आती है। सीमित सुविधाओं के बावजूद उनका वहां रहना किसी आर्थिक मजबूरी के तौर पर पेश नहीं किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने सामाजिक सेवा और ग्रामीण बच्चों के साथ काम करने के उद्देश्य से वहां रहना चुना।
कटरीना की प्रसिद्धि और परिवार की आर्थिक स्थिति से अलग सुजैन का सार्वजनिक जीवन कम दिखाई देता है। उनका अधिकांश समय स्कूल और सामाजिक परियोजनाओं से जुड़े काम में बीतता है।
माउंटेन व्यू स्कूल की कहानी ग्रामीण शिक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। शुरुआती छोटे स्तर से शुरू हुई पहल के 300 से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि किसी भी सामाजिक परियोजना के असर का आकलन केवल विद्यार्थियों की संख्या से नहीं किया जा सकता। स्कूल की शैक्षणिक गुणवत्ता, लंबे समय की निरंतरता और स्थानीय समुदाय पर वास्तविक प्रभाव का आकलन अलग-अलग आंकड़ों और स्वतंत्र मूल्यांकन से ही संभव होगा।
कटरीना ने कई बार अपनी मां को शिक्षक, समाजसेवी और अपने जीवन की अहम प्रेरणा के तौर पर याद किया है। साल 2017 में उन्होंने अपनी मां की स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हुए तस्वीर भी साझा की थी।
साल 2019 में कटरीना ने अपनी मां को शिक्षक और मानवतावादी के रूप में पेश करते हुए उनके सामाजिक काम की सार्वजनिक सराहना की थी।
सुजैन टरकोटे की कहानी का मुख्य पहलू उनकी व्यक्तिगत जीवनशैली से ज्यादा ग्रामीण बच्चों और समुदायों के लिए चल रही शिक्षा एवं सामाजिक पहलों से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह वर्षों से इसी क्षेत्र में सक्रिय हैं और माउंटेन व्यू स्कूल इस काम का एक प्रमुख हिस्सा है।
कटरीना की ओर से भी इस पहल को समर्थन मिलता रहा है। स्कूल के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी और आर्थिक सहयोग से जुड़ी रिपोर्टें इस पारिवारिक जुड़ाव को सामने लाती हैं।
उनकी कहानी का अहम पहलू यह है कि व्यक्तिगत सुविधाओं के बजाय उन्होंने लंबे समय तक ग्रामीण शिक्षा से जुड़े काम को प्राथमिकता दी। माउंटेन व्यू स्कूल और रिलीफ प्रोजेक्ट्स इंडिया के जरिए चल रही गतिविधियां अब शिक्षा के साथ कई सामाजिक क्षेत्रों तक फैल चुकी हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।