गिरगिट दुनिया के उन जीवों में शामिल है, जिसकी सबसे खास पहचान उसका रंग बदलने की क्षमता है। आम धारणा है कि गिरगिट जिस जगह बैठता है, उसी के रंग का हो जाता है ताकि वह दिखाई न दे। लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है।वैज्ञानिक और प्राणी-विज्ञान संबंधी स्रोतों के अनुसार गिरगिट का रंग बदलना केवल छलावरण यानी Camouflage के लिए नहीं होता। अलग-अलग परिस्थितियों में रंग बदलने का संबंध संचार, व्यवहार, तापमान और पर्यावरणीय परिस्थितियों से भी हो सकता है।
क्या गिरगिट आसपास का रंग हूबहू अपना लेता है?
नहीं। गिरगिट को ऐसा जीव मानना कि वह किसी भी दीवार, कपड़े या वस्तु का रंग बिल्कुल उसी तरह अपना लेता है, एक आम गलतफहमी है।
Smithsonian’s National Zoo के अनुसार गिरगिटों का प्राकृतिक रंग और पैटर्न पहले से ही उनके रहने के वातावरण में उन्हें छिपने में मदद करता है। कई परिस्थितियों में रंग बदलना छलावरण के बजाय तनाव या संचार का संकेत हो सकता है।
हालांकि, प्रजाति के अनुसार रंग बदलने की भूमिका अलग हो सकती है। दक्षिण अफ्रीका के SANBI के अनुसार कुछ बौनी गिरगिट प्रजातियों में रंग परिवर्तन संचार, रक्षा, तापमान और प्रकाश जैसी पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़ा पाया जाता है।
फिर गिरगिट रंग क्यों बदलता है?
गिरगिट के रंग में बदलाव कई कारणों से हो सकता है। इनमें प्रमुख हैं:
1. दूसरे गिरगिट से संचार
रंग परिवर्तन उसके व्यवहार और सामाजिक संकेतों का हिस्सा हो सकता है। कुछ प्रजातियों में नर मादा को आकर्षित करने या दूसरे नर के सामने अपना प्रभाव दिखाने के दौरान चमकीले रंग प्रदर्शित करते हैं।
2. तनाव या डर
कुछ परिस्थितियों में गिरगिट का रंग गहरा पड़ सकता है। Smithsonian के अनुसार Meller’s chameleon में रंग परिवर्तन तनाव से जुड़ा हो सकता है।
3. तापमान का असर
कुछ गिरगिट गर्मी को नियंत्रित करने के लिए रंग में बदलाव करते हैं। SANBI के अनुसार Cape dwarf chameleon अधिक गर्मी पाने के लिए गहरा रंग धारण कर सकता है, जबकि हल्का रंग प्रकाश को अधिक परावर्तित करने में मदद कर सकता है।
4. छलावरण
गिरगिट की प्राकृतिक रंगत उसके आवास में छिपने में मदद करती है। कुछ प्रजातियों में रंग परिवर्तन छलावरण की भूमिका भी निभा सकता है, लेकिन इसे हर गिरगिट के लिए एकमात्र या मुख्य कारण मानना सही नहीं होगा।
रंग बदलने की प्रक्रिया कैसे होती है?
गिरगिट की त्वचा में विशेष संरचनाएं होती हैं, जिनकी मदद से उसके शरीर पर दिखाई देने वाले रंग और पैटर्न में बदलाव आता है। वैज्ञानिक साहित्य में गिरगिटों के रंग परिवर्तन को उनकी त्वचा की शारीरिक संरचना और प्रकाश के साथ होने वाली प्रक्रियाओं से जोड़ा गया है। इसका परिणाम अलग-अलग परिस्थितियों में अलग रंग और पैटर्न के रूप में दिखाई दे सकता है।
इसलिए यह प्रक्रिया केवल यह नहीं है कि गिरगिट अपने आसपास का रंग देखकर उसी रंग में बदल जाता है।
क्या सभी गिरगिट एक जैसे रंग बदलते हैं?
ऐसा जरूरी नहीं है। अलग-अलग प्रजातियों में रंग बदलने की क्षमता और उसका उद्देश्य अलग हो सकता है। कुछ प्रजातियों में रंग परिवर्तन संचार और तापमान से अधिक जुड़ा हो सकता है, जबकि कुछ में छलावरण की भूमिका भी देखी जाती है।
रोचक बात: गिरगिट की आंखें भी हैं खास
रंग बदलने के अलावा गिरगिट की एक और असाधारण विशेषता उसकी आंखें हैं। Smithsonian’s National Zoo के अनुसार गिरगिट अपनी दोनों आंखों को स्वतंत्र रूप से अलग-अलग दिशाओं में घुमा सकता है। इससे उसे अपने आसपास के क्षेत्र को देखने और शिकार का पता लगाने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष
गिरगिट का रंग बदलना प्रकृति की एक जटिल जैविक क्षमता है। यह कहना सही नहीं होगा कि गिरगिट हमेशा अपने आसपास की वस्तु का हूबहू रंग अपना लेता है। रंग परिवर्तन कई प्रजातियों में संचार, तनाव, तापमान, पर्यावरणीय परिस्थितियों और कुछ मामलों में छलावरण से संबंधित हो सकता है। यही वजह है कि गिरगिट का रंग बदलना केवल छिपने की कला नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और शरीर की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।