कब्ज क्या है?
कब्ज पाचन तंत्र से जुड़ी एक आम समस्या है। इसमें व्यक्ति को सामान्य से कम बार मल त्याग हो सकता है या मल कठोर, सूखा अथवा गांठदार हो सकता है। कई लोगों को मल त्याग करते समय अधिक जोर लगाना पड़ता है या ऐसा महसूस होता है कि पेट पूरी तरह साफ नहीं हुआ। हालांकि, हर व्यक्ति की सामान्य मल त्याग की आदत अलग हो सकती है। कब्ज को हमेशा केवल खान-पान की समस्या नहीं माना जा सकता। कुछ दवाएं, स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां और दिनचर्या में बदलाव भी इसके कारणों में शामिल हो सकते हैं। इसलिए बार-बार होने वाली या लंबे समय तक बनी रहने वाली कब्ज की समस्या पर ध्यान देना जरूरी है।
कम फाइबर वाला भोजन बन सकता है वजह
आहार में पर्याप्त फाइबर न होना कब्ज का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। साबुत अनाज, दालें, फल, सब्जियां और कुछ मेवे फाइबर के स्रोत हैं। फाइबर मल को अधिक आसानी से आगे बढ़ने में मदद करता है।राष्ट्रीय मधुमेह तथा पाचन एवं गुर्दा रोग संस्थान के अनुसार, वयस्कों के लिए उम्र और लिंग के आधार पर प्रतिदिन लगभग २२ से ३४ ग्राम फाइबर की जरूरत हो सकती है। हालांकि, भोजन में फाइबर की मात्रा अचानक बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना उचित माना जाता है।
पानी कम पीना भी डाल सकता है असर
शरीर में पर्याप्त तरल की कमी होने पर मल कठोर हो सकता है। खासकर जब कोई व्यक्ति अपने भोजन में फाइबर बढ़ाता है, तब पर्याप्त तरल लेना महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे फाइबर बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। हालांकि, हर व्यक्ति की तरल जरूरत एक जैसी नहीं होती। मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार पानी और अन्य तरल पदार्थों की आवश्यकता बदल सकती है।
शारीरिक गतिविधि की कमी
आज की दिनचर्या में लंबे समय तक बैठना और शारीरिक गतिविधि कम होना भी कब्ज से जुड़ा हो सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि कब्ज के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है। ऐसे में अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार रोजमर्रा की गतिविधियों में चलना-फिरना शामिल करना उपयोगी हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो नई व्यायाम दिनचर्या शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
मल त्याग की इच्छा को बार-बार रोकना
काम, यात्रा या अन्य वजहों से कई लोग मल त्याग की इच्छा को रोक देते हैं। यह आदत कब्ज की समस्या में योगदान दे सकती है। विशेषज्ञ जानकारी के अनुसार, मल त्याग की इच्छा को नजरअंदाज करना कब्ज के कारणों में शामिल हो सकता है। इसलिए शरीर के प्राकृतिक संकेतों को बार-बार रोकने के बजाय पर्याप्त समय निकालना जरूरी है।
दिनचर्या में बदलाव का भी असर
यात्रा, उम्र बढ़ना, गर्भावस्था या रोजमर्रा की दिनचर्या में बदलाव के दौरान भी मल त्याग की आदत प्रभावित हो सकती है। इसी तरह खान-पान में अचानक बदलाव या कुछ दवाओं का इस्तेमाल भी कब्ज से जुड़ा हो सकता है। कुछ दवाएं और सप्लीमेंट, जैसे आयरन की कुछ तैयारियां, कैल्शियम या एल्युमिनियम वाले कुछ एंटासिड और कुछ अन्य दवाएं कब्ज को बढ़ा सकती हैं। यदि किसी दवा के बाद कब्ज की समस्या शुरू हुई है तो उसे खुद से बंद करने के बजाय चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
कब्ज से बचाव के लिए क्या करें?
कब्ज से राहत और बचाव के लिए कुछ सामान्य उपाय मददगार हो सकते हैं। भोजन में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को धीरे-धीरे शामिल करना, पर्याप्त तरल लेना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना इनमें शामिल है। रोजाना लगभग एक ही समय पर शौचालय जाने की आदत विकसित करना भी कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है। फाइबर बढ़ाते समय शरीर को उसके अनुरूप ढलने का समय देना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को लगातार पेट फूलने, दर्द या अन्य पाचन संबंधी परेशानी रहती है, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी?
कभी-कभार होने वाली कब्ज सामान्य जीवनशैली बदलावों से ठीक हो सकती है, लेकिन समस्या लगातार बनी रहे या बार-बार लौटे तो चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है। मल में खून आना, बिना कोशिश वजन कम होना, लगातार पेट दर्द, उल्टी, बुखार, गैस पास न कर पाना या अचानक मल त्याग की आदत में बदलाव जैसे लक्षणों के साथ कब्ज हो तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
निष्कर्ष
कब्ज केवल पेट साफ न होने की परेशानी तक सीमित नहीं है। कम फाइबर वाला भोजन, पर्याप्त तरल न लेना, शारीरिक गतिविधि की कमी और मल त्याग की इच्छा को रोकने जैसी रोजमर्रा की आदतें इसमें भूमिका निभा सकती हैं। वहीं, कुछ दवाएं और स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी कारण बन सकती हैं। इसलिए समस्या बार-बार होने पर कारण समझना और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।