सपा ने 2 उम्मीदवारों का नामांकन करा दिया है, लेकिन तीसरे नाम पर फैसला बाकी है। अखिलेश यादव ने कहा है कि जल्द गणित बैठाकर नाम घोषित होगा। Jagran
📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश
🗓️ 1 अक्टूबर 2026
✍️ Mohd Naved
तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार पर अखिलेश की चुप्पी क्यों?
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही समाजवादी पार्टी की रणनीति का सबसे बड़ा सस्पेंस तीसरे उम्मीदवार को लेकर बना हुआ है। सपा ने प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाकर दोनों के नामांकन भी करा दिए हैं, लेकिन तीसरे उम्मीदवार के नाम पर अभी फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है।
अखिलेश यादव ने 30 सितंबर के बाद पूछे गए सवालों पर तीसरे उम्मीदवार के नाम का ऐलान टालते हुए कहा कि जल्द गणित बैठाकर नाम घोषित किया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा के कई लोग उनके संपर्क में हैं, लेकिन किसी से ऐसा वादा नहीं करना चाहते जिसे बाद में पूरा न कर पाएं।
यही बयान तीसरे उम्मीदवार की रणनीति को समझने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में अखिलेश यादव ने किसी एक व्यक्ति की स्वीकृति का नाम लेकर जिक्र नहीं किया है। इसलिए यह कहना कि वह किसी खास नेता या विधायक की "हां" का इंतजार कर रहे हैं, अभी पुष्टि किया हुआ तथ्य नहीं है।
राज्यसभा चुनाव में वोटों का गणित
उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर 2026 को राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। मौजूदा विधानसभा संख्या 397 है। चुनाव में एक उम्मीदवार के लिए 37 प्रथम वरीयता वोटों का आंकड़ा निर्णायक है।
यही संख्या सपा की तीसरी सीट की रणनीति को कठिन बनाती है। उपलब्ध विधानसभा गणित के अनुसार सपा और उसके सहयोगी दलों के पास 2 उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त समर्थन है, जबकि तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे।
इस स्थिति में हर अतिरिक्त विधायक का समर्थन अहम हो जाता है। छोटे दलों, निर्दलीय विधायकों और दूसरे खेमे के असंतुष्ट विधायकों के रुख पर भी नजर रहती है। हालांकि किसी खास विधायक के समर्थन की पुष्टि किए बिना उसके बारे में दावा करना उचित नहीं होगा।
रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी का चयन
सपा ने पहले उम्मीदवार के रूप में अपने वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव को उतारा है। इसके बाद धनराज परिमल नथवानी का नाम सामने आया। नथवानी कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़े हैं और रिलायंस समूह में वरिष्ठ पद पर रहे हैं। वे परिमल नथवानी के पुत्र हैं।
अखिलेश यादव ने धनराज नथवानी के चयन को उद्योग जगत से जुड़ने और नई पीढ़ी को प्रतिनिधित्व देने की दिशा में बताया है। पार्टी की ओर से इस चयन को राजनीतिक और कारोबारी संपर्कों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है, लेकिन इसके आगे की रणनीति पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
तीसरे उम्मीदवार को लेकर चर्चा
तीसरे उम्मीदवार के तौर पर कई नाम राजनीतिक चर्चा में रहे हैं। इनमें पूर्व सांसद सलीम शेरवानी का नाम भी सामने आया है। कुछ रिपोर्टों में पूर्व नौकरशाह आलोक रंजन समेत अन्य नामों की भी चर्चा हुई है। लेकिन 1 अक्टूबर तक इनमें से किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
इसी बीच तंजीम फातिमा की अखिलेश यादव से मुलाकात की खबर भी सामने आई है। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक अटकलें तेज हुईं, लेकिन दोनों पक्षों की ओर से ऐसी कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है जिससे इसे तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार के फैसले से सीधे जोड़ा जा सके।
इसलिए फिलहाल दो चीजों को अलग रखना जरूरी है। पहला, तीसरे उम्मीदवार का नाम अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं हुआ है। दूसरा, संभावित उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जरूर चल रही हैं, लेकिन उन चर्चाओं को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
अखिलेश की चुप्पी के पीछे क्या?
अखिलेश यादव का सार्वजनिक बयान इस मामले में सबसे अहम संकेत देता है। उन्होंने कहा कि तीसरे उम्मीदवार का नाम जल्द घोषित किया जाएगा और इसके लिए गणित बैठाया जा रहा है। उन्होंने भाजपा के कई लोगों के संपर्क में होने की बात भी कही।
इससे यह संकेत मिलता है कि तीसरे उम्मीदवार का चयन केवल पार्टी के अंदर नाम तय करने का मामला नहीं है। उम्मीदवार ऐसा होना चाहिए जिसके पक्ष में जरूरी संख्या जुटाने की गुंजाइश हो।
राज्यसभा चुनाव प्रत्यक्ष जनता के वोट से नहीं होता। इसमें विधानसभा के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के तहत प्राथमिकता के आधार पर वोट डाले जाते हैं। इसलिए उम्मीदवार की व्यक्तिगत राजनीतिक स्वीकार्यता के साथ विधायक समर्थन का गणित भी महत्वपूर्ण होता है।
यूपी में 37 वोट का आंकड़ा
उत्तर प्रदेश विधानसभा में वर्तमान प्रभावी संख्या 397 बताई गई है। 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने के कारण एक सीट के लिए प्रथम वरीयता वोटों का आंकड़ा 37 बैठता है।
यही वजह है कि सपा के लिए तीसरी सीट अलग तरह की चुनौती है। दो उम्मीदवारों के बाद उपलब्ध अतिरिक्त वोटों को तीसरे उम्मीदवार के पक्ष में जोड़ना होगा।
इस समीकरण में केवल सपा के विधायक पर्याप्त नहीं होंगे। सहयोगी दलों का रुख, छोटे दलों के विधायक और संभावित क्रॉस वोटिंग चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है। हालांकि क्रॉस वोटिंग की संभावना को अभी घटना के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
पिछले चुनाव का संदर्भ
राज्यसभा चुनाव में यूपी का राजनीतिक इतिहास बताता है कि अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने के साथ मुकाबला संख्या से आगे बढ़कर रणनीति का विषय बन जाता है। 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी क्रॉस वोटिंग ने परिणामों को प्रभावित किया था। मौजूदा चुनाव में भी इसी वजह से हर विधायक के रुख पर राजनीतिक दलों की नजर है।
लेकिन पिछली घटना को मौजूदा चुनाव का निश्चित परिणाम मानना सही नहीं होगा। 2026 में विधानसभा का संख्याबल और उम्मीदवारों की स्थिति अलग है।
क्या मुस्लिम चेहरे पर दांव होगा?
तीसरे उम्मीदवार को लेकर मुस्लिम चेहरे की चर्चा इसलिए भी हुई है क्योंकि सपा की राजनीति में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व का सवाल लगातार राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहा है। कुछ रिपोर्टों में सलीम शेरवानी का नाम इसी संदर्भ में सामने आया है।
लेकिन अभी इसे सपा का अंतिम फैसला कहना सही नहीं होगा। पार्टी नेतृत्व ने तीसरे उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है।
अगर कोई उम्मीदवार ऐसा चुना जाता है जिसके पक्ष में दूसरे खेमे के विधायक भी मतदान करें, तो उसका प्रभाव केवल राज्यसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा। इससे आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक संवाद और गठबंधन की संभावनाओं पर भी असर पड़ सकता है। यह एक संभावित राजनीतिक प्रभाव है, अंतिम परिणाम नहीं।
किसके 'हां' का इंतजार?
इस सवाल का सीधा जवाब अभी सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। अखिलेश यादव ने किसी एक व्यक्ति या दल का नाम लेकर यह नहीं कहा है कि वह उसकी मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।
हां, उनके बयान से यह जरूर स्पष्ट होता है कि वह तीसरे उम्मीदवार के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाने की स्थिति को देख रहे हैं। उनका "गणित बैठाने" वाला बयान इसी दिशा में सबसे ठोस सार्वजनिक संकेत है।
इसलिए मौजूदा स्थिति को "किसी एक नेता की हां का इंतजार" कहने के बजाय "समर्थन और वोटों के गणित पर अंतिम फैसला" कहना अधिक तथ्यपरक होगा।
अब आगे क्या?
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। मतदान 16 अक्टूबर को होना है। इसलिए सपा के पास तीसरे उम्मीदवार का नाम सार्वजनिक करने के लिए सीमित समय बचा है।
अगले कुछ दिनों में सबसे महत्वपूर्ण संकेत उम्मीदवार के नाम से ज्यादा उसके समर्थन आधार से मिलेंगे। क्या सपा अपने अतिरिक्त वोटों को एक जगह रखने में सफल होती है, क्या उसे सहयोगी दलों का समर्थन मिलता है, और क्या दूसरे खेमे से कोई विधायक उसके उम्मीदवार के पक्ष में जाता है, यही सवाल तीसरी सीट की दिशा तय करेंगे।
फिलहाल इतना साफ है कि अखिलेश यादव ने तीसरे उम्मीदवार को रोककर रखा है और सार्वजनिक तौर पर इसके पीछे वोटों का गणित बताया है। किसी खास व्यक्ति की "हां" या किसी तय उम्मीदवार के नाम की पुष्टि अभी नहीं हुई है। 6 अक्टूबर की नामांकन सीमा से पहले यह सस्पेंस खत्म होना है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।