सूरज की रोशनी से मिलने वाला पराबैंगनी विकिरण शरीर में विटामिन डी के निर्माण में मदद करता है। हालांकि, अधिक धूप से बचना और पराबैंगनी सूचकांक का ध्यान रखना जरूरी है।
सुबह की धूप क्यों मानी जाती है जरूरी?
सुबह की हल्की धूप में कुछ समय बाहर रहना रोजमर्रा की स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा हो सकता है। सूर्य की पराबैंगनी किरणों में मौजूद पराबैंगनी-बी विकिरण त्वचा में विटामिन डी के निर्माण की प्रक्रिया को सक्रिय करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, सीमित मात्रा में पराबैंगनी विकिरण विटामिन डी के उत्पादन के लिए आवश्यक है। विटामिन डी शरीर में हड्डियों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर चिकित्सकीय जांच के आधार पर उपचार या पूरक की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए केवल धूप को ही विटामिन डी का एकमात्र स्रोत मानना उचित नहीं है।
विटामिन डी के निर्माण में मदद
शरीर विटामिन डी बनाने के लिए सूर्य से मिलने वाले पराबैंगनी-बी विकिरण का इस्तेमाल करता है। हालांकि, शरीर में बनने वाली विटामिन डी की मात्रा कई कारकों पर निर्भर करती है। इनमें त्वचा का प्रकार, स्थान, मौसम, दिन का समय और सूर्य की ऊंचाई जैसे कारक शामिल हैं। इसी वजह से हर व्यक्ति के लिए धूप में रहने का एक समान समय तय नहीं किया जा सकता। बहुत कम धूप मिलने वाले लोगों में विटामिन डी की कमी का जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि चिकित्सकीय जांच से ही की जानी चाहिए।
हड्डियों और मांसपेशियों के लिए महत्वपूर्ण
विटामिन डी शरीर के हड्डी और मांसपेशी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, शरीर में विटामिन डी का निर्माण पर्याप्त मात्रा में होना हड्डियों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अधिक देर तक धूप में बैठना स्वास्थ्य के लिए ज्यादा फायदेमंद होगा। विटामिन डी की जरूरत पूरी करने के लिए अत्यधिक पराबैंगनी विकिरण लेना उचित नहीं माना जाता।
क्या सुबह की धूप हमेशा सुरक्षित होती है?
सुबह की धूप को लेकर अक्सर यह धारणा रहती है कि इसमें पराबैंगनी विकिरण नहीं होता। यह पूरी तरह सही नहीं है। सूर्य की पराबैंगनी किरणों की तीव्रता समय, मौसम, अक्षांश, बादल, ऊंचाई और सतह से होने वाले परावर्तन जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दिन के मध्य में पराबैंगनी विकिरण अधिक तीव्र हो सकता है। इसलिए धूप में बाहर निकलते समय स्थानीय पराबैंगनी सूचकांक पर ध्यान देना उपयोगी है। जब पराबैंगनी सूचकांक तीन या उससे अधिक हो, तब त्वचा और आंखों की सुरक्षा के उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है।
ज्यादा देर धूप में रहने से क्या नुकसान हो सकता है?
धूप शरीर के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ जोखिम भी पैदा कर सकती है। अत्यधिक पराबैंगनी विकिरण से सनबर्न, त्वचा की समय से पहले उम्र बढ़ना और आंखों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक अत्यधिक पराबैंगनी संपर्क त्वचा कैंसर के जोखिम से भी जुड़ा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, बच्चों और किशोरों को विशेष रूप से अत्यधिक पराबैंगनी विकिरण से बचाना जरूरी है। बाहर काम करने वाले लोगों तथा अधिक धूप में रहने वालों को भी सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
धूप लेने के साथ इन बातों का रखें ध्यान
धूप में रहने का उद्देश्य त्वचा को जलाना या लंबे समय तक बिना सुरक्षा के धूप में रहना नहीं होना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन तेज धूप के समय छाया लेने, शरीर को कपड़ों से ढकने, चौड़ी किनारी वाली टोपी और उचित धूप से बचाव वाले चश्मे का इस्तेमाल करने की सलाह देता है। खुली त्वचा के लिए उपयुक्त सनस्क्रीन भी इस्तेमाल किया जा सकता है। खास तौर पर बच्चों को लंबे समय तक सीधे तेज सूर्यप्रकाश में रखने से बचना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को विटामिन डी की कमी की आशंका है, तो केवल धूप पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक उचित है।
क्या सुबह की धूप मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है?
बाहर समय बिताना और नियमित शारीरिक गतिविधि सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकती है। लेकिन यह कहना कि सुबह की धूप अकेले तनाव, अवसाद या किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या का इलाज करती है, वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा। सुबह बाहर टहलना जैसी गतिविधियां एक स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा हो सकती हैं। इसके साथ पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि पर भी ध्यान देना जरूरी है।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
बहुत छोटे बच्चों, बुजुर्गों, अधिक समय बाहर काम करने वाले लोगों और ऐसी दवाएं लेने वाले व्यक्तियों को पराबैंगनी विकिरण से जुड़े जोखिमों के प्रति विशेष सावधानी बरतनी पड़ सकती है। कुछ दवाएं त्वचा को सूर्यप्रकाश के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकती हैं। जिन लोगों में विटामिन डी की कमी का संदेह हो, उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के विटामिन डी की दवा या अत्यधिक धूप लेने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी विटामिन डी की कमी के निदान और उपचार को चिकित्सकीय निगरानी से जोड़ता है।
निष्कर्ष
सुबह की हल्की धूप शरीर में विटामिन डी के प्राकृतिक निर्माण में भूमिका निभा सकती है और बाहर समय बिताना स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा हो सकता है। लेकिन धूप को लेकर संतुलन जरूरी है। बहुत ज्यादा पराबैंगनी विकिरण त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है तथा लंबे समय में त्वचा कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए धूप का आनंद लेते समय समय, मौसम और स्थानीय पराबैंगनी सूचकांक का ध्यान रखना चाहिए। विटामिन डी की कमी की आशंका होने पर चिकित्सकीय जांच और विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता देना अधिक सुरक्षित तरीका है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।