थाईलैंड में ‘रेंटल वाइफ’ की चर्चा क्यों?
दुनिया के अलग-अलग देशों में पर्यटन के साथ कई तरह की सामाजिक और व्यावसायिक व्यवस्थाएं देखने को मिलती हैं। थाईलैंड के पर्यटन शहर पटाया से भी ऐसी ही एक व्यवस्था लंबे समय से चर्चा में है, जिसे मीडिया रिपोर्टों में ‘Rental Wife’ या ‘Wife on Hire’ कहा जाता है।हालांकि इस शब्द को लेकर सबसे पहले एक बात साफ करना जरूरी है—यह कानूनी रूप से पत्नी बनने की व्यवस्था या आधिकारिक सरकारी पर्यटन सेवा नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे कुछ मामलों में विदेशी पर्यटकों और स्थानीय महिलाओं के बीच निजी, अस्थायी और सहमति आधारित साथी व्यवस्था के रूप में बताया गया है।
क्या होती है ‘रेंटल वाइफ’?
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मामलों में कोई विदेशी पर्यटक किसी स्थानीय महिला के साथ एक निश्चित अवधि के लिए साथी के तौर पर रहने का निजी समझौता करता है। अवधि कुछ दिनों से लेकर लंबे समय तक हो सकती है और शर्तें संबंधित लोगों के बीच तय होती हैं। ऐसी व्यवस्था में महिला के साथ समय बिताना, यात्रा के दौरान साथ रहना या स्थानीय जगहों की जानकारी देने जैसी गतिविधियों का उल्लेख मिलता है। इसे पारंपरिक विवाह का विकल्प या कानूनी वैवाहिक रिश्ता नहीं माना जाना चाहिए।
‘सारे फर्ज’ वाली बात कितनी सही?
सोशल मीडिया और कुछ वायरल लेखों में इसे इस तरह पेश किया जाता है कि किराए पर ली गई महिला पत्नी की तरह खाना बनाती है, घूमने जाती है और घरेलू जिम्मेदारियां निभाती है। लेकिन इन सभी बातों को थाईलैंड की आधिकारिक पर्यटन व्यवस्था मानने का कोई आधार नहीं मिला।उपलब्ध रिपोर्टों में मुख्य रूप से companionship यानी साथ रहने, यात्रा में साथ देने और निजी समझौते की बात सामने आती है। इसलिए इसे “हर महिला सारे वैवाहिक फर्ज निभाती है” के रूप में सामान्यीकृत करना पत्रकारिता की दृष्टि से उचित नहीं होगा।
पटाया क्यों आता है चर्चा में?
पटाया थाईलैंड का प्रमुख पर्यटन केंद्र है और यहां नाइटलाइफ समेत विभिन्न पर्यटन गतिविधियां लंबे समय से विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। ‘रेंटल वाइफ’ की चर्चा भी खास तौर पर पटाया से जुड़ी रिपोर्टों में सामने आती रही है। एक प्रकाशित रिपोर्ट में इस व्यवस्था को लेकर Lavert A. Emmanuel की पुस्तक “Thai Taboo: The Rise of Wife Rental in Modern Society” का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक पुस्तक इस सामाजिक घटना और इससे जुड़े अस्थायी संबंधों पर चर्चा करती है।
क्या इसी वजह से थाईलैंड में पर्यटकों की भीड़ बढ़ रही है?
यहां भी तथ्य और सोशल मीडिया दावे अलग-अलग रखना जरूरी है। थाईलैंड निश्चित रूप से दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में है, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक आंकड़े यह साबित नहीं करते कि पर्यटकों की संख्या बढ़ने का कारण ‘रेंटल वाइफ’ व्यवस्था है।थाईलैंड के पर्यटन एवं खेल मंत्रालय के अनुसार, 2025 में देश में 32.97 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटक पहुंचे, जबकि भारत से आने वाले पर्यटकों की संख्या 24,87,319 रही। भारतीय पर्यटकों की संख्या 2024 की तुलना में 16.82 प्रतिशत अधिक थी। थाईलैंड की Tourism Authority ने 2026 में बताया कि 1 जनवरी से 23 फरवरी 2026 के बीच 3,82,768 भारतीय यात्री थाईलैंड पहुंचे। भारत उस अवधि में थाईलैंड के प्रमुख विदेशी बाजारों में शामिल था। यानी थाईलैंड में भारतीय पर्यटन की मजबूत मौजूदगी के आधिकारिक आंकड़े जरूर हैं, लेकिन इसे ‘रेंटल वाइफ’ ट्रेंड से जोड़ने वाला आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
यह व्यवस्था कानूनी विवाह क्यों नहीं है?
रिपोर्टों के अनुसार, ‘रेंटल वाइफ’ के नाम से चर्चित व्यवस्था निजी समझौतों पर आधारित होती है और इसे पारंपरिक विवाह नहीं माना जाता। कुछ रिपोर्टों ने इसे कानूनी रूप से स्पष्ट रूप से विनियमित न होने वाली व्यवस्था के रूप में भी वर्णित किया है। इसलिए “थाईलैंड में पत्नियां किराए पर मिलती हैं” जैसी लाइन को शाब्दिक अर्थ में लेना भ्रामक हो सकता है। ज्यादा सटीक शब्द होगा—कुछ पर्यटन क्षेत्रों में अस्थायी साथी व्यवस्था की रिपोर्टें सामने आती रही हैं।
भारत और थाईलैंड के बीच पर्यटन संबंध
थाईलैंड भारतीय पर्यटकों के लिए लोकप्रिय विदेशी पर्यटन स्थलों में शामिल है। Thailand Tourism Authority के अनुसार, 2025 में वहां करीब 24.87 लाख भारतीय पर्यटक पहुंचे थे। 2026 के लिए TAT ने भारतीय पर्यटकों की संख्या 25.5 लाख से अधिक पहुंचने का लक्ष्य बताया था। थाईलैंड भारतीय यात्रियों को समुद्र तट, खान-पान, वेलनेस, नाइटलाइफ, सांस्कृतिक अनुभव और अन्य पर्यटन गतिविधियों के जरिए आकर्षित करता है।
आगे क्या?
‘रेंटल वाइफ’ शब्द सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया में आकर्षण पैदा करता है, लेकिन इसके बारे में रिपोर्टिंग करते समय पूरे थाईलैंड या वहां की महिलाओं को इस व्यवस्था से जोड़ना उचित नहीं है।उपलब्ध सामग्री से इतना कहा जा सकता है कि पटाया और कुछ अन्य पर्यटन क्षेत्रों में अस्थायी साथी व्यवस्था की रिपोर्टें मौजूद हैं, लेकिन इसकी वास्तविक व्यापकता और पर्यटन पर इसके प्रभाव के लिए आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
निष्कर्ष
थाईलैंड में ‘रेंटल वाइफ’ की कहानी सोशल मीडिया पर जितनी सनसनीखेज दिखाई देती है, वास्तविकता उससे अधिक जटिल है। यह कोई सरकारी पर्यटन सुविधा या कानूनी विवाह व्यवस्था नहीं है, बल्कि कुछ रिपोर्टों में सामने आया निजी और अस्थायी संबंधों का एक रूप है। दूसरी ओर, थाईलैंड में भारतीय पर्यटकों की संख्या वास्तव में काफी बड़ी है, लेकिन आधिकारिक पर्यटन आंकड़े उनकी यात्रा को ‘रेंटल वाइफ’ व्यवस्था से नहीं जोड़ते।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।