खाना खाने के दौरान मोबाइल चलाना क्यों बढ़ रही है आदत?
नई दिल्ली। स्मार्टफोन ने बातचीत, मनोरंजन, समाचार और सोशल मीडिया को बेहद आसान बना दिया है। यही वजह है कि मोबाइल अब दिन के कई हिस्सों में लोगों के साथ रहता है। भोजन का समय भी इससे अछूता नहीं है। खाना खाते समय वीडियो देखना, सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, मैसेज का जवाब देना या समाचार पढ़ना कई लोगों की रोजमर्रा की आदत का हिस्सा बन गया है।
हालांकि, भोजन के दौरान मोबाइल इस्तेमाल करने को केवल एक ही कारण से जोड़ना सही नहीं होगा। काम, मनोरंजन, आदत, लगातार आने वाले नोटिफिकेशन और अकेले खाना खाने जैसी अलग-अलग परिस्थितियां इसके पीछे हो सकती हैं।
मोबाइल भोजन के समय क्यों पहुंच जाता है हाथ में?
स्मार्टफोन में लगातार आने वाले नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया की उपलब्धता लोगों का ध्यान बार-बार स्क्रीन की तरफ खींच सकती है। इसके अलावा वीडियो देखने या इंटरनेट ब्राउज करने की आदत भी भोजन के समय जारी रह सकती है।
खासकर जब कोई व्यक्ति अकेले खाना खा रहा हो, तब फोन मनोरंजन या साथ का साधन बन सकता है। परिवार में यदि दूसरे लोग भी भोजन के समय मोबाइल इस्तेमाल करते हैं तो यह व्यवहार सामान्य दिनचर्या का हिस्सा बन सकता है।
हालांकि, उपलब्ध शोध से किसी एक कारण को सभी लोगों पर लागू करना उचित नहीं है।
भोजन के समय फोन इस्तेमाल करने को लेकर विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स यानी AAP परिवारों के लिए भोजन के समय को स्क्रीन-मुक्त रखने की सलाह देती रही है। AAP के मौजूदा डिजिटल-मीडिया मार्गदर्शन में परिवारों को भोजन के दौरान फोन-मुक्त समय और स्थान तय करने की सलाह दी गई है। AAP का जोर केवल बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नहीं, बल्कि पूरे परिवार के डिजिटल व्यवहार पर है। उसके अनुसार माता-पिता स्वयं भी उचित डिजिटल आदतों का उदाहरण पेश कर सकते हैं।
भोजन सिर्फ खाना नहीं, परिवार से जुड़ने का समय भी
भोजन के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल कम करने से परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे से बातचीत के लिए अधिक अवसर मिल सकता है। AAP की स्वस्थ जीवनशैली संबंधी सलाह में बच्चों और किशोरों के लिए परिवार के साथ भोजन करने को प्रोत्साहित किया गया है। 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन ने परिवार के भोजन के दौरान माता-पिता और बच्चों के फोन इस्तेमाल तथा खाने से जुड़े कुछ व्यवहारों के बीच संबंधों की जांच की। शोधकर्ताओं ने बताया कि इस विषय पर पहले भी सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाह दी जाती रही है, लेकिन भोजन के दौरान फोन इस्तेमाल और खाने से जुड़े व्यवहारों पर शोध अभी अपेक्षाकृत सीमित है। इसलिए इससे किसी सीधा कारण-परिणाम का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
बच्चों के मामले में क्यों जरूरी है ध्यान देना?
बच्चे अपने आसपास के वयस्कों के व्यवहार से भी सीखते हैं। यदि घर में भोजन के समय लगातार फोन इस्तेमाल होता है, तो बच्चों के लिए भी इसे सामान्य व्यवहार मानना आसान हो सकता है। AAP परिवारों को उम्र और जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत Family Media Plan बनाने की सलाह देती है। इसमें भोजन, नींद, शारीरिक गतिविधि और परिवार के समय जैसी प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर डिजिटल मीडिया के लिए सीमाएं तय की जा सकती हैं।
क्या मोबाइल देखते हुए खाना हमेशा नुकसानदायक है?
ऐसा कहना सही नहीं होगा कि भोजन के दौरान मोबाइल देखने से हर व्यक्ति को निश्चित रूप से कोई स्वास्थ्य समस्या होगी। स्क्रीन के प्रभाव व्यक्ति की उम्र, स्क्रीन के प्रकार, इस्तेमाल की अवधि और परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकते हैं। AAP भी मीडिया इस्तेमाल के प्रभावों को कई कारकों पर निर्भर मानती है।
इसलिए इसे किसी बीमारी का सीधा कारण बताने के बजाय डिजिटल आदत और भोजन के समय के बीच संतुलन के रूप में देखना अधिक उचित है।
भोजन के समय मोबाइल से दूरी बनाने के आसान तरीके
परिवार चाहे तो कुछ सरल नियम बना सकता है—
AAP भी परिवारों को अपनी जरूरत के अनुसार मीडिया नियम बनाने और समय-समय पर उन्हें दोबारा देखने की सलाह देती है।
क्या होता है आगे?
स्मार्टफोन और डिजिटल मीडिया आधुनिक जीवन का हिस्सा बने रहेंगे। ऐसे में पूरी तरह फोन से दूरी बनाना हर व्यक्ति के लिए संभव या जरूरी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल के लिए ऐसे समय और स्थान तय किए जाएं जहां आमने-सामने बातचीत और परिवार का समय प्रभावित न हो।
निष्कर्ष
खाना खाते समय मोबाइल चलाने की बढ़ती आदत को केवल अनुशासन की कमी मानना सही नहीं होगा। डिजिटल नोटिफिकेशन, मनोरंजन, अकेले भोजन करना और परिवार में बनी आदतें इसके पीछे अलग-अलग कारण हो सकती हैं। उपलब्ध विशेषज्ञीय मार्गदर्शन भोजन के समय स्क्रीन-मुक्त माहौल को प्रोत्साहित करता है। ऐसे में दिन में कम से कम भोजन का समय परिवार और भोजन पर केंद्रित रखना डिजिटल जीवनशैली में एक सरल बदलाव हो सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।