टीएमयू डेंटल कॉलेज ने 12 वर्षीय बच्चे के तालू से इंपेक्टिड दांत निकालकर दुर्लभ सर्जरी में सफलता हासिल की। यह दुनिया का चौथा केस है।
Moradabad,(Shah Times)। मुरादाबाद की तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी का डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर एक बार फिर सुर्खियों में है। यहां 12 बरस के किशोर के तालू से इंपेक्टिड दांत को निकालकर वह उपलब्धि दर्ज की गई, जो न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए मेडिकल साइंस का दुर्लभ अध्याय बन गई। यह ऑपरेशन लगभग चार घंटे तक चला और इसे बिना एनेस्थीसिया सफलतापूर्वक अंजाम देना चिकित्सकों के कौशल का अनूठा उदाहरण है।
यह सर्जरी इस मायने में भी ऐतिहासिक है कि अब तक दुनिया में इस तरह के केवल तीन मामले सामने आए थे – 2011 में चीन, 2014 में भारत-चेन्नई और 2024 में नेपाल। टीएमयू का यह केस चौथा और भारत का दूसरा केस माना जा रहा है।
मेडिकल एनालिसिस
आरव यादव नामक 12 वर्षीय किशोर, जनपद अमरोहा के जलालपुर कलां गांव का निवासी है। उसके तालू में एक अतिरिक्त दांत और ऊपरी जबड़े के पीछे एक और दांत विकसित हो गया था। मेडिकल साइंस में इस स्थिति को "सुपर न्यूमेररी टीथ" कहा जाता है।
इस एनोमली की वजह से बच्चे के मुंह में तेज सूजन हो गई थी, जिससे भोजन निगलना भी मुश्किल हो गया। डॉक्टर्स ने सीबीसीटी स्कैन किया और पाया कि यह केस रेयर कैटेगरी में आता है। चुनौती यह थी कि यदि ऑपरेशन में जरा-सी चूक होती तो दांत नाक या पेट में चला जाता और मरीज जीवनभर असामान्य स्थिति का शिकार हो जाता।
डॉ. दीपशिखा के नेतृत्व में चली सर्जिकल टीम में डॉ. समन सिराज, डॉ. वजाहत अली और डॉ. अंबुज माथुर जैसे विशेषज्ञ शामिल रहे।
वैश्विक संदर्भ
डेंटल रिसर्च की दुनिया में "सुपर न्यूमेररी टीथ" के इतने जटिल केस बेहद दुर्लभ माने जाते हैं। चीन, भारत-चेन्नई और नेपाल में हुए पूर्ववर्ती तीन केस मेडिकल लिटरेचर में दर्ज हैं। अब टीएमयू का यह केस चौथे नंबर पर शामिल हो जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस सफलता की अहमियत इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इस केस को इंटरनेशनल जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री में प्रकाशन के लिए भेजा गया है। अनुमान है कि दिसंबर तक यह केस स्टडी प्रकाशित हो जाएगी, जिससे भारत की पहचान वैश्विक रिसर्च मानचित्र पर और मजबूत होगी।
संस्थान की प्रतिक्रिया
टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन, जीवीसी मनीष जैन और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन ने इस सफलता को संस्थान की मेडिकल उत्कृष्टता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक उपकरणों और अनुभवी चिकित्सकों की बदौलत ही यह असंभव लगने वाला ऑपरेशन संभव हो पाया।
वहीं डेंटल कॉलेज की एचओडी प्रो. रचना बहुगुणा और वाइस प्रिंसिपल डॉ. अंकिता जैन ने इसे "दुर्लभतम उपलब्धि" करार दिया। उनका कहना है कि यह केस आने वाली पीढ़ियों के लिए एक लैंडमार्क रिसर्च साबित होगा।
काउंटरपॉइंट और चुनौतियां
हालांकि यह सफलता उल्लेखनीय है, लेकिन मेडिकल जगत में कुछ विशेषज्ञ यह भी सवाल उठाते हैं कि ऐसे रेयर केस को पब्लिक प्लेटफॉर्म पर प्रोजेक्ट करते समय मरीज की प्राइवेसी और लॉन्ग-टर्म फॉलोअप डेटा भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
दूसरा अहम बिंदु यह है कि भारत में अब भी ग्रामीण इलाकों के अधिकांश बच्चे ओरल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज करते हैं। यदि जागरूकता और शुरुआती जांच समय रहते हो, तो कई गंभीर स्थितियों को पहले ही रोका जा सकता है।
निष्कर्ष
टीएमयू डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की यह उपलब्धि केवल एक सर्जरी की सफलता नहीं है, बल्कि यह भारत के हेल्थ सेक्टर के बढ़ते आत्मविश्वास और मेडिकल रिसर्च की नई दिशा का प्रतीक है।
आरव यादव आज पूरी तरह स्वस्थ है और उसका केस मेडिकल जर्नल में दर्ज होकर आने वाले वर्षों में हजारों स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स के लिए अध्ययन का हिस्सा बनेगा। निश्चय ही यह उपलब्धि मुरादाबाद और उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।