उत्तर प्रदेश में कपड़ा उद्योग को विस्तार देने के लिए मऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, सीतापुर और रायबरेली में संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क प्रस्तावित हैं।
📍 उत्तर प्रदेश
🗓️ 19 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
यूपी में कपड़ा उद्योग के विस्तार की तैयारी तेज
उत्तर प्रदेश में कपड़ा और अपैरल उद्योग को नया औद्योगिक आधार देने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार ने 5 जिलों में संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। मऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, सीतापुर और रायबरेली में इन पार्कों के लिए जमीन चिह्नित किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रस्ताव को अगले महीने राज्य कैबिनेट के सामने रखने की तैयारी है।
कौन-कौन से जिले योजना में शामिल हैं
प्रस्तावित योजना में मऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, सीतापुर और रायबरेली को शामिल किया गया है। इन जिलों में बंद कताई मिलों की जमीन को टेक्सटाइल पार्क के लिए इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
विभाग ने संबंधित जिलाधिकारियों से जमीन की पैमाइश और वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट मांगी है। इसका मकसद यह तय करना है कि उपलब्ध जमीन पर पार्क का दायरा कितना रखा जा सकता है। यदि चिह्नित जमीन पर्याप्त नहीं हुई तो अतिरिक्त भूमि की व्यवस्था करने की बात भी सामने आई है।
कैबिनेट मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगा काम
यह योजना अभी प्रस्ताव के स्तर पर है। विभाग की तैयारी के मुताबिक अगले महीने इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद चिह्नित स्थानों पर जरूरी आधारभूत ढांचा विकसित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इसके बाद निवेशकों को औद्योगिक भूखंड उपलब्ध कराने की योजना है। इसका अर्थ है कि मौजूदा चरण में जमीन की पहचान और प्रशासनिक प्रक्रिया पर जोर है, जबकि वास्तविक औद्योगिक विकास कैबिनेट मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगा।
बंद कताई मिलों की जमीन का इस्तेमाल
इस योजना का एक अहम पहलू बंद कताई मिलों की जमीन का पुनः उपयोग है। कपड़ा उद्योग से जुड़ी पुरानी औद्योगिक परिसंपत्तियों को नए टेक्सटाइल और अपैरल निवेश के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार की ओर से चिह्नित जमीन पर उद्यमियों की जरूरत के मुताबिक आधारभूत सुविधाएं विकसित करने की योजना बताई गई है। इसके बाद निवेशकों को जमीन आवंटित किए जाने की बात कही गई है।
निवेशकों ने दिखाई दिलचस्पी
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में टेक्सटाइल पार्कों को लेकर उद्यमियों की दिलचस्पी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार अहमदाबाद, सूरत और मुंबई से जुड़े कुछ कारोबारी भी प्रदेश में निवेश की इच्छा जता रहे हैं।
इन कारोबारियों के उत्पाद उत्तर प्रदेश के साथ बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे बाजारों तक पहुंचते हैं। विभागीय तर्क है कि उत्तर प्रदेश में औद्योगिक जगह और श्रम उपलब्धता के कारण उत्पादन और बाजार तक आपूर्ति की लागत तथा समय को नियंत्रित करने की गुंजाइश बनती है।
गुजरात और महाराष्ट्र से यूपी की ओर क्यों नजर
टेक्सटाइल कारोबार में औद्योगिक भूखंड और उत्पादन क्षमता महत्वपूर्ण कारक हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार गुजरात और महाराष्ट्र में कई इकाइयों के कारण अतिरिक्त वर्किंग स्पेस की मांग बनी हुई है।
ऐसे में उत्तर प्रदेश में नए औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना निवेशकों को वैकल्पिक उत्पादन केंद्र उपलब्ध कराने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। हालांकि नए पार्कों में वास्तविक निवेश की मात्रा और इकाइयों की संख्या कैबिनेट मंजूरी तथा आगे होने वाली निवेश प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
यूपी में पहले से भी चल रहा है टेक्सटाइल पार्क का विस्तार
संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना केवल इन 5 जिलों तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश में वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संतकबीर नगर और बिजनौर में भी पार्क विकसित करने की प्रक्रिया चल रही है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार वाराणसी के रमना में 75 एकड़, अमरोहा में करीब 78 एकड़, बरेली के बहेड़ी में करीब 80 एकड़, संतकबीर नगर के मगहर में करीब 50 एकड़ और बिजनौर के नगीना में करीब 53 एकड़ क्षेत्र को लेकर काम चल रहा है। अलग-अलग परियोजनाओं में जमीन का अंतिम क्षेत्रफल प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार बदल सकता है।
वाराणसी में मास्टर डेवलपर की प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश के हथकरघा एवं वस्त्र निदेशालय की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक वाराणसी के रमना में संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क के विकास, संचालन और अनुरक्षण के लिए मास्टर डेवलपर के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई है। परियोजना के लिए निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण से जुड़ा मॉडल अपनाया जा रहा है।
इससे संकेत मिलता है कि सरकार अलग-अलग पार्कों के लिए निजी निवेश और औद्योगिक भागीदारी को परियोजना के विकास ढांचे में शामिल कर रही है।
सरकार की व्यापक टेक्सटाइल रणनीति
उत्तर प्रदेश पहले से ही कपड़ा और परिधान क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए अलग-अलग नीतिगत उपाय चला रहा है। राज्य की टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति में नए निवेश को आकर्षित करने और नई इकाइयों के साथ विस्तार करने वाली मौजूदा इकाइयों को प्रोत्साहन देने का प्रावधान है।
राज्य में लखनऊ-हरदोई सीमा पर 1,000 एकड़ में पीएम मित्र पार्क भी विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास से जुड़ी योजनाएं भी शुरू की गई हैं।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
टेक्सटाइल पार्कों की सबसे अहम संभावित भूमिका स्थानीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधि बढ़ाने की है। एक पार्क में केवल कपड़ा निर्माण इकाइयां ही नहीं, बल्कि अपैरल, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन और अन्य सहायक गतिविधियों के लिए भी कारोबारी अवसर बनते हैं।
हालांकि प्रस्तावित 5 पार्कों से कितने रोजगार पैदा होंगे, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक संयुक्त आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए रोजगार की निश्चित संख्या बताना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
मऊ और कानपुर के लिए क्यों अहम है योजना
मऊ लंबे समय से कपड़ा और बुनाई से जुड़ी गतिविधियों के लिए जाना जाता है। कानपुर का औद्योगिक आधार भी पुराना है। ऐसे में इन इलाकों में टेक्सटाइल और अपैरल आधारित औद्योगिक ढांचे को संगठित रूप देने की कोशिश स्थानीय कारोबारी नेटवर्क को नई दिशा दे सकती है।
सीतापुर और रायबरेली में पार्कों की योजना भी क्षेत्रीय औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश है। रायबरेली में राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान जैसी संस्थागत क्षमता मौजूद है, जबकि सीतापुर और आसपास के क्षेत्र में वस्त्र से जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों का आधार पहले से मौजूद है।
योजना के सामने चुनौती क्या है
टेक्सटाइल पार्क की घोषणा से लेकर वास्तविक उत्पादन शुरू होने तक कई चरण होते हैं। जमीन का हस्तांतरण, आधारभूत ढांचा, सड़क और बिजली जैसी सुविधाएं, निवेशकों को भूखंड आवंटन और इकाइयों की स्थापना इस प्रक्रिया के अहम हिस्से हैं।
इसलिए मौजूदा स्थिति को निवेश की अंतिम उपलब्धि के रूप में देखना उचित नहीं होगा। फिलहाल 5 नए पार्कों के लिए जमीन की पहचान और प्रशासनिक तैयारी चल रही है। अगला महत्वपूर्ण चरण कैबिनेट की मंजूरी और उसके बाद परियोजनाओं का क्रियान्वयन होगा।
आगे क्या होगा
अब संबंधित जिलों में जमीन की पैमाइश और रिपोर्ट तैयार होने के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने रखने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मंजूरी मिलने पर आधारभूत ढांचे के विकास और निवेशकों के लिए औद्योगिक भूखंड उपलब्ध कराने की दिशा में काम शुरू होगा।
यूपी सरकार पहले से चल रही टेक्सटाइल पार्क परियोजनाओं के साथ इन 5 नए प्रस्तावित पार्कों को जोड़कर राज्य में कपड़ा और अपैरल उद्योग का विस्तृत नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रही है। इस योजना की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि कितनी इकाइयां जमीन पर उतरती हैं, कितना निजी निवेश आता है और स्थानीय स्तर पर उत्पादन तथा रोजगार में कितना ठोस इजाफा होता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।