जडेजा बनाम अक्षर, विश्व कप से पहले टीम इंडिया में बढ़ी ऑलराउंडर की जंग
2027 विश्व कप की तैयारी, बहुतुले ने जडेजा और अक्षर पर दिया बड़ा संकेत
जडेजा की जगह पक्की नहीं, अक्षर के साथ प्रदर्शन और उपयोगिता पर होगा फैसला
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गुवाहाटी, भारत
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30 सितंबर 2026
✍️Mohd Naved
भारत के सामने चयन का अहम सवाल
2027 वनडे विश्व कप की तैयारियां अब भारतीय टीम के लिए औपचारिक चर्चा से आगे बढ़कर चयन और संयोजन के दौर में पहुंच चुकी हैं। स्पिन गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले ने साफ किया है कि रविंद्र जडेजा और अक्षर पटेल जैसे विकल्पों के बीच फैसला केवल नाम या अनुभव के आधार पर नहीं होगा। आगामी सीरीज में प्रदर्शन और अलग-अलग परिस्थितियों में खिलाड़ी की उपयोगिता को परखा जाएगा। icc
बहुतुले के मुताबिक जडेजा अभी भी टीम की योजना में हैं। उन्होंने जडेजा को ऐसा खिलाड़ी बताया जो बल्ले और गेंद दोनों से योगदान दे सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि पिछले 6 महीनों में जडेजा की गेंदबाजी में सुधार हुआ है।
इस बयान का सीधा मतलब यह नहीं है कि जडेजा की विश्व कप जगह तय हो गई है। टीम प्रबंधन के सामने विकल्पों का आकलन जारी है और अक्षर पटेल भी इस समीकरण का हिस्सा हैं।
जडेजा की उपयोगिता पर बहुतुले का भरोसा
बहुतुले ने जडेजा की बल्लेबाजी और अनुभव को उनके पक्ष में महत्वपूर्ण पहलू बताया। उनके मुताबिक जडेजा लंबे समय से टीम के लिए उपयोगी ऑलराउंडर रहे हैं और बल्ले तथा गेंद दोनों से योगदान देने की क्षमता रखते हैं। icc
जडेजा ने श्रीलंका के खिलाफ 2 टेस्ट मैचों की सीरीज से भारतीय टीम में वापसी की थी। इसके बाद उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ 3 मैचों की वनडे सीरीज के लिए भी टीम में शामिल किया गया। इससे पहले वह न्यूजीलैंड के खिलाफ जनवरी 2026 के वनडे के बाद चोट के कारण क्रिकेट से बाहर रहे थे। icc
वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में जडेजा को 10 ओवर गेंदबाजी का मौका मिला, लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिला और उन्होंने 54 रन दिए। दूसरी ओर कुलदीप यादव ने 4 विकेट लेकर प्रभाव छोड़ा। भारत ने यह मुकाबला 8 विकेट से जीता। icc
अक्षर पटेल भी समीकरण में मौजूद
भारत के पास स्पिन विभाग में अक्षर पटेल के अलावा कुलदीप यादव और वॉशिंगटन सुंदर जैसे विकल्प भी मौजूद हैं। ऐसे में टीम प्रबंधन के सामने केवल जडेजा बनाम अक्षर का सवाल नहीं है। यह पूरे स्पिन और ऑलराउंड संयोजन का मामला है।
बहुतुले ने कहा कि अक्षर के मौजूद रहने पर आगामी टूर्नामेंट और सीरीज के दौरान प्रदर्शन को देखकर यह आकलन किया जाएगा कि टीम के लिए कौन अधिक उपयोगी साबित होता है। icc
यहां उपयोगिता का अर्थ केवल विकेट लेने या रन बनाने तक सीमित नहीं है। निचले क्रम में बल्लेबाजी, गेंदबाजी के ओवर, फील्डिंग और टीम के संतुलन में योगदान भी चयन प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं।
वेस्टइंडीज सीरीज से मिल रहा अहम डेटा
वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा वनडे सीरीज भारत के लिए 2027 विश्व कप की तैयारी का हिस्सा है। पहला मुकाबला 27 सितंबर को तिरुवनंतपुरम में हुआ, जबकि दूसरा मुकाबला 30 सितंबर को गुवाहाटी में खेला गया। तीसरा वनडे 3 अक्टूबर को न्यू चंडीगढ़ में निर्धारित है। icc
पहले वनडे में भारत ने वेस्टइंडीज के 295 रन के लक्ष्य को 41.4 ओवर में 2 विकेट खोकर हासिल किया। कुलदीप यादव ने 4 विकेट लिए, जबकि विराट कोहली और शुभमन गिल ने शतक बनाए। icc
गुवाहाटी में मुकाबला इससे अलग तस्वीर लेकर आया। वेस्टइंडीज ने 405/7 का स्कोर बनाया, जो वनडे में उसका सर्वोच्च स्कोर बना। भारत ने जवाब में 406 रन का लक्ष्य 43.3 ओवर में हासिल कर लिया और सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। icc
गुवाहाटी का मुकाबला मुख्य रूप से बल्लेबाजी के दबदबे के लिए याद रखा जाएगा। ऐसे मैचों में स्पिनर की भूमिका परिस्थितियों और मैच की स्थिति के साथ बदलती है। यही वजह है कि टीम प्रबंधन अलग-अलग मैदानों और मैच परिस्थितियों में खिलाड़ियों की उपयोगिता देखना चाहता है।
2027 विश्व कप में अलग होंगी परिस्थितियां
2027 का ICC पुरुष वनडे विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में आयोजित होगा। कुल 12 मैदानों को मेजबानी के लिए चुना गया है। icc
दक्षिण अफ्रीका के मैदानों की परिस्थितियां भारतीय उपमहाद्वीप से अलग हो सकती हैं। पिच की प्रकृति, उछाल, मौसम और मैदान के आकार जैसे पहलू टीम संयोजन को प्रभावित करेंगे।
यही कारण है कि भारतीय टीम केवल घरेलू परिस्थितियों के प्रदर्शन के आधार पर अंतिम फैसला नहीं लेना चाहेगी। विश्व कप के मेजबान देशों में किस तरह का संयोजन प्रभावी रहेगा, इसका आकलन भी चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रहेगा।
बहुतुले ने भी विश्व कप की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सही संयोजन तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया है। icc
जडेजा के पक्ष में अनुभव और बल्लेबाजी
जडेजा का सबसे बड़ा पक्ष उनकी बहुआयामी भूमिका है। वह बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं, बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज हैं और फील्डिंग में भी लंबे समय से भारतीय टीम के महत्वपूर्ण खिलाड़ी रहे हैं।
विश्व कप जैसे लंबे टूर्नामेंट में ऐसा खिलाड़ी टीम संयोजन को अतिरिक्त विकल्प दे सकता है। अगर टीम को निचले क्रम में बल्लेबाजी की जरूरत हो तो जडेजा की मौजूदगी उपयोगी हो सकती है। इसी तरह 10 ओवर गेंदबाजी की क्षमता टीम को अतिरिक्त संतुलन देती है।
बहुतुले ने इसी पहलू को रेखांकित करते हुए जडेजा की बल्लेबाजी और अनुभव को महत्व दिया है। icc
हालांकि पहले वनडे में उनकी गेंदबाजी से तत्काल प्रभाव नहीं मिला। इसलिए आने वाली सीरीज में उनके प्रदर्शन पर नजर रहना स्वाभाविक है।
अक्षर के पक्ष में क्या देखा जाएगा
अक्षर पटेल भी गेंद और बल्ले दोनों से योगदान देने वाले बाएं हाथ के ऑलराउंडर हैं। इसलिए जडेजा और अक्षर के बीच तुलना मुख्य रूप से टीम की जरूरत और मैच परिस्थितियों से जुड़ी होगी।
अगर टीम को निचले क्रम में बाएं हाथ का बल्लेबाज और नियंत्रित स्पिन विकल्प चाहिए, तो दोनों खिलाड़ियों की भूमिकाएं कई जगह एक-दूसरे से मिलती हैं। ऐसे में चयनकर्ताओं के लिए अंतर पैदा करने वाले पहलू प्रदर्शन, फिटनेस, गेंदबाजी की प्रभावशीलता, बल्लेबाजी योगदान और फील्डिंग हो सकते हैं।
बहुतुले के बयान से इतना स्पष्ट है कि भारत इस तुलना को अभी बंद नहीं कर रहा है। आने वाली सीरीज खिलाड़ियों को अपनी दावेदारी मजबूत करने का मौका देंगी। icc
कुलदीप और वॉशिंगटन भी दौड़ में
इस समीकरण को केवल जडेजा और अक्षर तक सीमित करना सही तस्वीर नहीं होगी। कुलदीप यादव भारत के स्पिन विभाग में अलग तरह का विकल्प देते हैं।
पहले वनडे में कुलदीप ने 4/40 का प्रदर्शन किया था। दूसरे वनडे में उन्होंने 2/65 लिए और वनडे क्रिकेट में 200 विकेट पूरे करने वाले सबसे तेज भारतीय स्पिनर बने। icc
वॉशिंगटन सुंदर भी टीम के स्पिन और बल्लेबाजी संयोजन में विकल्प देते हैं। ऐसे में भारत के पास बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर, कलाई के स्पिनर और ऑफ-स्पिन ऑलराउंडर के अलग-अलग संयोजन मौजूद हैं।
यही गहराई चयन प्रक्रिया को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाती है।
महत्वपूर्ण तारीखें
भारत और वेस्टइंडीज की मौजूदा वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 27 सितंबर को हुआ। भारत ने इसे 8 विकेट से जीता।
दूसरा मुकाबला 30 सितंबर को गुवाहाटी में हुआ। भारत ने 406 रन का लक्ष्य हासिल करके 8 विकेट से जीत दर्ज की और 3 मैचों की सीरीज अपने नाम कर ली। icc
तीसरा वनडे 3 अक्टूबर को न्यू चंडीगढ़ में खेला जाएगा। इसके बाद भारत की सीमित ओवरों की तैयारी में श्रीलंका और जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे सीरीज भी शामिल है। icc
2027 विश्व कप अक्टूबर और नवंबर में दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होगा। टूर्नामेंट में 14 टीमें हिस्सा लेंगी। icc
फैसला अभी बाकी है
बहुतुले का बयान जडेजा के पक्ष में समर्थन जरूर दिखाता है, लेकिन इसे अंतिम चयन संकेत के रूप में देखना सही नहीं होगा। उन्होंने खुद अक्षर के साथ आगामी मैचों में प्रदर्शन और उपयोगिता के आकलन की बात कही है। icc
इसलिए आने वाले महीनों में जडेजा और अक्षर के प्रदर्शन का मूल्यांकन अलग-अलग परिस्थितियों में होगा। बल्लेबाजी योगदान, गेंदबाजी प्रभाव, फील्डिंग, फिटनेस और टीम संतुलन जैसे पहलू चयन प्रक्रिया में अहम रहेंगे।
भारत के पास विश्व कप से पहले पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मौजूद है। यही मैच टीम प्रबंधन को अलग-अलग संयोजन आजमाने और परिस्थितियों के अनुसार विकल्प तय करने का अवसर देंगे।
आगे क्या होगा
भारत के लिए अगला तत्काल पड़ाव वेस्टइंडीज के खिलाफ 3 अक्टूबर का वनडे है। इसके बाद आने वाली वनडे सीरीज खिलाड़ियों को अपनी दावेदारी मजबूत करने का मौका देंगी। icc
जडेजा के मामले में सबसे अहम सवाल उनकी बहुआयामी उपयोगिता और मौजूदा प्रदर्शन के बीच संतुलन का होगा। अक्षर के मामले में भी प्रदर्शन को समान कसौटी पर देखा जाएगा।
इस समय उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि भारत ने इस स्थान पर अंतिम फैसला नहीं किया है। जडेजा विश्व कप योजना से बाहर नहीं हैं और अक्षर भी प्रतिस्पर्धा में हैं। अंतिम चयन का आधार आने वाली सीरीज, प्रदर्शन और 2027 विश्व कप की परिस्थितियों के अनुरूप टीम संतुलन रहेगा।