उत्तर प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय हो चुका है। कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज हुई है, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई और किसानों को राहत मिली। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के दौरान कई जिलों में भारी बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका जताई है।
उत्तर प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने प्रभावी दस्तक दे दी है। पिछले कई सप्ताह से भीषण गर्मी और उमस झेल रहे प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अब मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। मंगलवार को हुई व्यापक बारिश ने न केवल तापमान को नीचे लाया, बल्कि खरीफ सीजन की खेती के लिए भी अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर दीं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर मानसून पूरे प्रदेश को कवर कर सकता है।
प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा बरेली में दर्ज की गई, जहां 157 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। इसके अलावा ललितपुर, लखीमपुर खीरी, अयोध्या और अंबेडकरनगर सहित कई जिलों में अच्छी बारिश हुई। लगातार हुई वर्षा से कई इलाकों में गर्मी से राहत मिली, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों की नमी बढ़ने से धान सहित खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अनुसार पूर्वांचल और तराई के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय हो चुका है। सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़, गोरखपुर और अयोध्या सहित कई जिलों में मानसूनी गतिविधियां तेज हुई हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के अनुसार बुधवार को बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर और बरेली में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा प्रयागराज, बांदा, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, वाराणसी सहित कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। प्रशासन को सतर्क रहने और लोगों को आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मानसून की सक्रियता ने उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत दी है। पिछले कई सप्ताह से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और तराई के कई हिस्सों में खेतों में पर्याप्त नमी पहुंची है, जिससे धान, मक्का, बाजरा और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई तेज होने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर हुई बारिश उत्पादन क्षमता को बेहतर बना सकती है। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि यदि बहुत कम समय में अत्यधिक वर्षा होती है तो जलभराव, मिट्टी का कटाव और नई बोई गई फसलों को नुकसान भी हो सकता है। इसलिए केवल मानसून का पहुंचना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका संतुलित वितरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
राजधानी लखनऊ में मंगलवार को दिनभर रुक-रुक कर बारिश होती रही। मलिहाबाद, काकोरी, मोहनलालगंज और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी वर्षा दर्ज की गई। इसके चलते अधिकतम तापमान करीब 7.6 डिग्री सेल्सियस गिरकर 32.1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान 28.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के अनुसार पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी वर्षा के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है। ऐसे मौसम में खुले मैदान, पेड़ों के नीचे और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के शुरुआती दौर में स्थानीय स्तर पर मौसम तेजी से बदलता है। कई बार कुछ घंटों के भीतर सामान्य बारिश अत्यधिक वर्षा में बदल जाती है। इसलिए स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी और मौसम विभाग के आधिकारिक अपडेट पर लगातार नजर रखना जरूरी है।
मानसून के प्रवेश के बाद अक्सर यह धारणा बन जाती है कि पूरे प्रदेश में एक जैसी बारिश होगी, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग होती है। मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि मानसूनी बादलों की सक्रियता, हवा की दिशा, स्थानीय दबाव प्रणाली और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अलग-अलग जिलों में वर्षा की मात्रा काफी भिन्न हो सकती है। यही वजह है कि बरेली जैसे जिले में रिकॉर्ड वर्षा दर्ज हुई, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में केवल हल्की फुहारें देखने को मिलीं। अगले कुछ दिनों में भी यही स्थिति बनी रह सकती है।
जहां उत्तर प्रदेश में मानसून राहत लेकर आया है, वहीं पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में यही बारिश बड़ी चुनौती बन गई है। असम और अरुणाचल प्रदेश के अनेक हिस्सों में लगातार हो रही वर्षा के कारण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं और कई गांवों का संपर्क टूट गया है। यह स्थिति दिखाती है कि मानसून का असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होता। कहीं यह खेती और जलस्रोतों के लिए वरदान बनता है, तो कहीं अत्यधिक वर्षा जनजीवन और आधारभूत ढांचे पर भारी दबाव डालती है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अगले 48 से 72 घंटों में मानसून उत्तर प्रदेश के शेष जिलों में भी तेजी से आगे बढ़ सकता है। कई स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है। यदि वर्तमान प्रणाली सक्रिय रही तो प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अच्छी बारिश दर्ज हो सकती है। फिलहाल किसानों के लिए यह सकारात्मक संकेत है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में जलभराव, कमजोर ड्रेनेज व्यवस्था और बिजली आपूर्ति जैसी चुनौतियां प्रशासन की परीक्षा लेंगी। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि मानसून केवल राहत देता है या कुछ क्षेत्रों में नई मुश्किलें भी खड़ी करता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।