सोमवार, 24 August 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Book Your Ads With Shah Times
Education & Careers

स्कूल चलो अभियान 2026, यूपी में 1 जुलाई से शुरू होगा दूसरा चरण, हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने पर जोर

Shahana 2026-06-29 06:14:47
स्कूल चलो अभियान 2026, यूपी में 1 जुलाई से शुरू होगा दूसरा चरण, हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने पर जोर

उत्तर प्रदेश सरकार 1 जुलाई से स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण शुरू कर रही है। इसका उद्देश्य स्कूल से बाहर रह गए बच्चों का नामांकन बढ़ाना और प्राथमिक शिक्षा तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए अभिभावकों और समाज से सक्रिय भागीदारी की अपील की।

Location:- Lucknow, Uttar Pradesh

Date:- 29 June 2026

Byline:- Shahana

शिक्षा का नया अभियान या सामाजिक जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर शिक्षा को लेकर व्यापक जनअभियान शुरू होने जा रहा है। 1 जुलाई से "स्कूल चलो अभियान" का दूसरा चरण आरंभ होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम जारी अपने संदेश में इसे केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के साझा दायित्व के रूप में प्रस्तुत किया है। उनका कहना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित रहे, यही इस अभियान का मूल उद्देश्य है। सरकार का यह प्रयास ऐसे समय में सामने आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर भी स्कूली शिक्षा, ड्रॉपआउट दर और बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता पर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में यह अभियान केवल नामांकन बढ़ाने तक सीमित रहेगा या वास्तविक सीखने के स्तर में भी बदलाव लाएगा, यही इसकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

स्कूल से बाहर बच्चों तक पहुंचने की कोशिश

बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार अभियान का प्रमुख लक्ष्य उन बच्चों की पहचान करना है जो किसी कारणवश विद्यालय नहीं पहुंच पा रहे हैं। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे, प्रवासी श्रमिकों के बच्चे, ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी तथा सामाजिक रूप से वंचित वर्ग शामिल हैं। राज्य सरकार चाहती है कि प्रत्येक गांव, प्रत्येक वार्ड और प्रत्येक मोहल्ले में स्थानीय प्रशासन, शिक्षक, ग्राम प्रधान, स्वयंसेवी संस्थाएं और अभिभावक मिलकर ऐसे बच्चों को विद्यालय तक पहुंचाएं। इस मॉडल में सरकारी मशीनरी के साथ सामाजिक भागीदारी को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

मुख्यमंत्री का संदेश और उसका व्यापक अर्थ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षा जीवन की सबसे मूल्यवान पूंजी है और ज्ञान बच्चों के भविष्य की सबसे मजबूत नींव बनता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि प्रत्येक बच्चा विद्यालय पहुंचे और नियमित रूप से पढ़ाई करे। यह संदेश केवल भावनात्मक अपील नहीं है। इसके पीछे राज्य सरकार की वह नीति भी दिखाई देती है जिसमें शिक्षा को दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक विकास से जोड़ा जा रहा है। गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा भविष्य के मानव संसाधन निर्माण की पहली सीढ़ी मानी जाती है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में अभियान

स्कूल चलो अभियान को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस लक्ष्य से भी जुड़ता है जिसमें सभी बच्चों के लिए समान और समावेशी शिक्षा की बात कही गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रारंभिक कक्षाओं में नामांकन जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण नियमित उपस्थिति, आधारभूत साक्षरता और गणितीय दक्षता भी है। यदि अभियान इन तीनों क्षेत्रों में प्रभावी परिणाम देता है तो इसका असर आने वाले वर्षों में दिखाई देगा।

केवल प्रवेश नहीं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी चुनौती

शिक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि विद्यालय में प्रवेश पहला कदम है, अंतिम लक्ष्य नहीं। कई बार बड़ी संख्या में बच्चों का नामांकन तो हो जाता है, लेकिन नियमित उपस्थिति, प्रशिक्षित शिक्षक, पर्याप्त संसाधन और सीखने के परिणाम अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाते। इसी कारण शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि स्कूल चलो अभियान की सफलता केवल नामांकन के आंकड़ों से नहीं, बल्कि बच्चों के सीखने, विद्यालय में टिके रहने और शैक्षिक उपलब्धियों से आंकी जानी चाहिए।

शिक्षा अभियान की वास्तविक कसौटी नामांकन के साथ सीखने की गुणवत्ता भी जरूरी

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में कई योजनाएं लागू की हैं। विद्यालयों में आधारभूत ढांचे का विस्तार, स्मार्ट क्लास, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, मिड-डे मील और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे कदम उठाए गए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य केवल बच्चों को स्कूल तक लाना नहीं, बल्कि उन्हें विद्यालय में बनाए रखना भी है। फिर भी शिक्षा विशेषज्ञ यह याद दिलाते हैं कि किसी भी अभियान की सफलता का सबसे विश्वसनीय पैमाना कक्षा में होने वाला वास्तविक शिक्षण है। यदि बच्चा पढ़ना, लिखना और बुनियादी गणित नहीं सीख पा रहा, तो केवल नामांकन बढ़ना पर्याप्त उपलब्धि नहीं माना जाएगा।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की अलग चुनौतियां

उत्तर प्रदेश जैसा विशाल राज्य सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से विविध परिस्थितियों वाला प्रदेश है। ग्रामीण इलाकों में कई परिवार आज भी कृषि, दिहाड़ी मजदूरी या मौसमी रोजगार पर निर्भर हैं। ऐसे परिवारों के बच्चों की नियमित स्कूल उपस्थिति सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए चुनौती बना रहता है। दूसरी ओर शहरी क्षेत्रों में प्रवासी श्रमिकों के परिवार, अस्थायी बस्तियां और लगातार बदलते निवास स्थान बच्चों की शिक्षा को प्रभावित करते हैं। ऐसे मामलों में केवल विद्यालय खोल देना पर्याप्त नहीं होता। स्थानीय प्रशासन, शिक्षकों और समुदाय के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक होता है।

सामाजिक भागीदारी कितनी प्रभावी होगी

मुख्यमंत्री के संदेश में समाज की भागीदारी पर विशेष बल दिया गया है। यह दृष्टिकोण इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि शिक्षा केवल सरकारी विभाग का विषय नहीं है। अभिभावकों, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भूमिका बच्चों के विद्यालय से जुड़ाव को मजबूत बना सकती है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सामाजिक अपील तभी प्रभावी होती है जब उसके साथ पर्याप्त संसाधन, प्रशिक्षित शिक्षक, समयबद्ध निगरानी और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही की व्यवस्था भी मौजूद हो।

आलोचनाएं और दूसरा पक्ष

कुछ शिक्षा विश्लेषकों का मत है कि विभिन्न राज्यों में चलने वाले नामांकन अभियान अक्सर शुरुआती दिनों में व्यापक प्रचार प्राप्त करते हैं, लेकिन बाद में उनकी गति धीमी पड़ जाती है। उनका तर्क है कि वास्तविक चुनौती बच्चों को पूरे शैक्षणिक सत्र तक विद्यालय में बनाए रखने की होती है। वहीं सरकार का पक्ष है कि पिछले वर्षों में विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं, डिजिटल निगरानी और छात्र कल्याण योजनाओं के कारण विद्यालयों में उपस्थिति और नामांकन दोनों में सुधार दर्ज हुआ है। सरकार का कहना है कि दूसरा चरण इन्हीं प्रयासों को और व्यापक बनाने के उद्देश्य से शुरू किया जा रहा है।

शिक्षा और भविष्य की अर्थव्यवस्था

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए अनेक अध्ययन यह संकेत देते हैं कि प्राथमिक शिक्षा में निवेश किसी भी राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति से जुड़ा होता है। बेहतर शिक्षा रोजगार क्षमता, सामाजिक समानता, स्वास्थ्य जागरूकता और उत्पादकता पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। इसी संदर्भ में उत्तर प्रदेश का स्कूल चलो अभियान केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव संसाधन विकास की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी माना जा सकता है। यदि अधिक बच्चे विद्यालयों तक पहुंचते हैं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करते हैं, तो इसका प्रभाव आने वाले वर्षों में राज्य की सामाजिक और आर्थिक संरचना पर भी दिखाई देगा।

आगे की राह

1 जुलाई से शुरू होने वाला दूसरा चरण प्रशासनिक तैयारी और सामाजिक सहयोग, दोनों की परीक्षा होगा। अभियान की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि कितने बच्चे विद्यालयों तक पहुंचे, कितने नियमित रूप से पढ़ाई जारी रखें और उनके सीखने के स्तर में कितना सुधार आए। आने वाले महीनों में शिक्षा विभाग के लिए केवल लक्ष्य प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं होगा। पारदर्शी आंकड़े, स्वतंत्र मूल्यांकन और निरंतर समीक्षा यह तय करेंगे कि यह अभियान स्थायी परिवर्तन ला पाया या केवल एक वार्षिक नामांकन कार्यक्रम बनकर रह गया। स्कूल चलो अभियान उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश शिक्षा को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करने का प्रयास करता है। लेकिन किसी भी सार्वजनिक नीति की तरह इसकी सफलता भावनात्मक अपील से नहीं, बल्कि जमीनी परिणामों से मापी जाएगी। यदि राज्य सरकार विद्यालयों तक बच्चों की पहुंच, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता और नियमित उपस्थिति को समान प्राथमिकता देती है, तो यह अभियान लाखों बच्चों के भविष्य को नई दिशा दे सकता है। वहीं यदि यह केवल नामांकन तक सीमित रह गया, तो शिक्षा सुधार का व्यापक लक्ष्य अधूरा रह जाएगा। आने वाले शैक्षणिक सत्र में इसी अंतर की सबसे अधिक समीक्षा होगी।

 

ADVERTISEMENT
Shahana

Shahana

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

संबंधित खबरें

CBSE 3-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग, लाखों छात्रों की निगाहें फैसले पर

2026-08-05 15:17:08

NEET Protest: संसद से सड़क तक बढ़ा विवाद, छात्रों का आंदोलन तेज

2026-07-22 19:21:22

IOQM 2026 रजिस्ट्रेशन शुरू, गणित प्रतिभाओं के लिए सुनहरा मौका

2026-07-21 16:55:14

चतरा का अनोखा रिकॉर्ड, एक ही परिवार के तीन बच्चों ने पास किया NEET

2026-07-19 07:55:04

UGC NET 2026 Controversy: पेपर लीक आरोप, Question Errors और NTA पर फिर उठे गंभीर सवाल

2026-07-18 11:25:05

सोनम वांगचुक का बड़ा दावा, "20% शरीर खत्म", NEET आंदोलन तेज

2026-07-18 07:52:14

नीट रिजल्ट 2026: सिल्वर बेल्स स्कूल की सौम्यता ने 608 अंक हासिल किए

2026-07-18 07:31:34

सोनम वांगचुक का अनशन 19वें दिन में, शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली पर सरकार से निर्णायक कदम की मांग तेज

2026-07-17 00:26:09

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर