
Rampur MP-MLA Court verdict in Azam Khan case – Shah Times
2019 चुनाव भाषण केस में आज़म खान को कोर्ट से राहत
📍 Rampur ✍️ Asif Khan
रामपुर की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने 2019 लोकसभा चुनाव से जुड़े भड़काऊ भाषण मामले में सपा नेता आज़म खान को बरी कर दिया। अदालत ने साक्ष्यों को अपर्याप्त मानते हुए आरोप सिद्ध न होने का निष्कर्ष दिया।
अदालत का फैसला
रामपुर की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने भड़काऊ भाषण से जुड़े एक मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आज़म खान को बरी कर दिया है। शुक्रवार को सुनाए गए इस फैसले में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को ठोस साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध नहीं कर सका। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची।
मामला किससे जुड़ा
यह मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान दर्ज किया गया था। उस समय आज़म खान रामपुर संसदीय सीट से समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन प्रत्याशी थे। चुनाव प्रचार के दौरान सपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दिए गए एक भाषण के आधार पर उनके खिलाफ भड़काऊ भाषण का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
एफआईआर के आरोप
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि आज़म खान ने अपने भाषण के जरिए कार्यकर्ताओं को हिंसा के लिए उकसाने की कोशिश की। साथ ही तत्कालीन जिलाधिकारी रामपुर और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियां करने का आरोप भी लगाया गया था। यह एफआईआर रामपुर शहर कोतवाली में दर्ज की गई थी।
शिकायतकर्ता और पृष्ठभूमि
मामले में शिकायतकर्ता के तौर पर आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता और उस समय के कांग्रेसी नेता फैसल खान लाला का नाम सामने आया था। शिकायत में कहा गया था कि भाषण से चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है और इससे सार्वजनिक शांति को खतरा पैदा हो सकता है। इसी आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
अभियोजन पक्ष के साक्ष्य
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में एक सीडी साक्ष्य के रूप में पेश की गई। अभियोजन का दावा था कि इस सीडी में आज़म खान का कथित भाषण रिकॉर्ड है। इसमें यह कहा गया था कि कुछ अधिकारी “रामपुर को खून से नहलाना चाहते हैं” और जिन जिलों में वे तैनात रहे हैं वहां “कमजोरों पर तेज़ाब डलवाकर उन्हें गलाया गया है।” अभियोजन ने इन बयानों को भड़काऊ और प्रशासन के खिलाफ उकसावे वाला बताया।
बचाव पक्ष की दलीलें
बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। बचाव पक्ष का कहना था कि सीडी की प्रामाणिकता और संदर्भ स्पष्ट नहीं है तथा कथित भाषण को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि भाषण का आशय हिंसा भड़काने का नहीं था।
अदालत की टिप्पणी
दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि भाषण से सीधे तौर पर हिंसा भड़काने का इरादा था या सार्वजनिक शांति को तत्काल खतरा उत्पन्न हुआ। इसी आधार पर अदालत ने आरोप प्रमाणित न होने की बात कही।
कानूनी राहत का महत्व
इस फैसले को आज़म खान के लिए अहम कानूनी राहत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अदालत ने अपने आदेश में केवल इस मामले तक सीमित टिप्पणी की और अन्य मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं की। आज़म खान के खिलाफ दर्ज कई मामले अभी भी अलग-अलग अदालतों में विचाराधीन हैं।
वर्तमान स्थिति
गौरतलब है कि आज़म खान 17 नवंबर 2025 से रामपुर जिला जेल में बंद हैं। उन्हें एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा एक अन्य मामले में सात वर्ष की सजा सुनाई जा चुकी है। भड़काऊ भाषण से जुड़ा यह मामला लंबे समय से अदालत में चल रहा था, जिसमें कई तारीखों पर सुनवाई हुई।
आगे की प्रक्रिया
अदालत के इस फैसले के बाद संबंधित पक्षों को आदेश की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाएगी। अभियोजन पक्ष के पास उच्च अदालत में अपील का विकल्प कानून के तहत खुला है। फिलहाल, इस मामले में आज़म खान को दोषमुक्त करार दिया गया है और अदालत ने केस का निस्तारण कर दिया है।





