
ED Raid on I-PAC: WB Govt Files Caveat in Supreme Court
ईडी कार्रवाई पर बंगाल सरकार की सुप्रीम कोर्ट में औपचारिक एंट्री
आई-पेक रेड मामले में सुनवाई से पहले आदेश पर रोक की मांग
आई-पेक से जुड़ी ईडी छापेमारी के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल किया है। सरकार ने आग्रह किया है कि उसका पक्ष सुने बिना कोई आदेश पारित न हो।
📍 Kolkata ✍️ Asif Khan
कोलकाता में एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पेक ( I-PAC) से जुड़े परिसरों पर ईडी की छापेमारी के बाद यह मामला न्यायिक मंच तक पहुंच गया है। ईडी ने यह कार्रवाई कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग इन्वेस्टिगेशन के तहत की थी। एजेंसी के अनुसार, इस केस में कई करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन और डिजिटल एविडेंस की जांच की जा रही है, जिनका संबंध कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं से जोड़ा जा रहा है।
राज्य सरकार का केविएट
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक केविएट फाइल किया है। केविएट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी भी पक्ष के खिलाफ कोई अंतरिम या अंतिम आदेश देने से पहले उसे सुना जाए। राज्य सरकार ने अदालत से अनुरोध किया है कि आई-पेक से जुड़ी ईडी की छापेमारी और उससे जुड़े किसी भी आवेदन पर उसके पक्ष को सुने बिना कोई आदेश न दिया जाए।
केविएट का कानूनी अर्थ
केविएट एक फॉर्मल लीगल नोटिस होता है जिसे कोई पार्टी कोर्ट में दाखिल करती है। इसका मकसद यह होता है कि यदि संबंधित मामले में कोई याचिका या प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया जाए, तो कोर्ट उस पार्टी को सुनवाई का अवसर दे। इस प्रक्रिया के जरिए एकतरफा आदेश से बचाव किया जाता है और न्यायिक संतुलन बनाए रखा जाता है।
ईडी की कार्रवाई
ईडी ने गुरुवार को कोलकाता में आई-पेक और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई कथित कोयला चोरी घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग इन्वेस्टिगेशन का हिस्सा बताई गई है। एजेंसी के अनुसार, तलाशी के दौरान डॉक्युमेंट्स, डिजिटल डिवाइस और अन्य मटेरियल एकत्र किए गए, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है।
कोलकाता में स्थिति
छापेमारी के दौरान संबंधित जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में ईडी की टीम ने प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान कुछ स्थानों पर भीड़ जमा होने और हंगामे की सूचना भी सामने आई, हालांकि आधिकारिक तौर पर सुरक्षा एजेंसियों ने ऑपरेशन जारी रखा।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी
ईडी के अनुसार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तलाशी वाले स्थान पर पहुंचीं। एजेंसी का कहना है कि उन्होंने वहां मौजूद कुछ डॉक्युमेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस अपने साथ ले लिए। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ने एजेंसी पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया है और कहा है कि राज्य की सहमति के बिना इस तरह की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।
ईडी का आरोप
ईडी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। एजेंसी ने अदालत से अनुरोध किया है कि मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए। ईडी का दावा है कि छापेमारी के दौरान पुलिस की मदद से कुछ ऐसे दस्तावेज और डिजिटल एविडेंस हटाए गए जो जांच के लिए जरूरी थे।
हाईकोर्ट में याचिका
कलकत्ता हाईकोर्ट में ईडी की ओर से दायर याचिका में यह कहा गया है कि जांच में बाधा डालने के आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए। एजेंसी ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी द्वारा कराई जाए।
राज्य सरकार का रुख
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल कर यह स्पष्ट किया है कि वह अपने संवैधानिक अधिकारों और राज्य के अधिकार क्षेत्र की रक्षा के लिए कानूनी कदम उठा रही है। सरकार का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई राज्य के प्रशासनिक ढांचे और कानून व्यवस्था पर प्रभाव डाल सकती है, इसलिए कोर्ट में उसकी बात सुनी जानी जरूरी है।
कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण
सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल होने के बाद, यदि इस मामले में कोई याचिका या अपील दाखिल की जाती है, तो राज्य सरकार को सुनवाई का अवसर मिलेगा। इससे पहले कि कोई अंतरिम आदेश पारित हो, दोनों पक्षों की दलीलें रिकॉर्ड पर लाई जाएंगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं। आई-पेक एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है, जो चुनावी रणनीति और कैंपेन मैनेजमेंट से जुड़ी सेवाएं देती है। इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन से जुड़े परिसरों पर हुई कार्रवाई को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज है।
इन्वेस्टिगेशन की दिशा
ईडी के मुताबिक, कोयला चोरी से जुड़े नेटवर्क में कई शेल कंपनियों और बिचौलियों की भूमिका की जांच हो रही है। मनी ट्रेल, बैंक अकाउंट्स और डिजिटल कम्युनिकेशन को खंगाला जा रहा है। एजेंसी ने कहा है कि जांच प्रक्रिया कानून के तहत चल रही है और सभी संबंधित पक्षों से सहयोग की अपेक्षा की जा रही है।
अदालतों में समानांतर कार्यवाही
एक ओर सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार का केविएट दर्ज है, वहीं दूसरी ओर कलकत्ता हाईकोर्ट में ईडी की याचिका पर सुनवाई की संभावना है। दोनों अदालतों में होने वाली कार्यवाही से इस केस की दिशा तय होगी।
सुरक्षा और कानून व्यवस्था
छापेमारी के दौरान और उसके बाद कोलकाता के कुछ इलाकों में पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन ने कहा है कि शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय पुलिस को अलर्ट पर रखा गया।
मीडिया और सार्वजनिक जानकारी
ईडी और राज्य सरकार दोनों ने अपने-अपने आधिकारिक बयानों में घटनाक्रम की जानकारी दी है। एजेंसी ने कहा है कि वह कोर्ट के निर्देशों का पालन करेगी, जबकि राज्य सरकार ने भी कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने की बात कही है।
आगे की प्रक्रिया
आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी और किन एजेंसियों को किस स्तर पर अधिकार मिलेंगे। फिलहाल, केविएट के चलते किसी भी एकतरफा आदेश से पहले राज्य सरकार को सुना जाना तय है।






