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क्या दलित चेहरे को सौंपी जा सकती है यूपी बीजेपी अध्यक्ष की कमान ?

None 2024-12-31 18:41:47
क्या दलित चेहरे को सौंपी जा सकती है यूपी बीजेपी अध्यक्ष की कमान ?

उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की दौड़ में कई नाम शामिल हैं लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पहली बार किसी दलित चेहरे को भी कमान सौंपी जा सकती है।

Lucknow, (Shah Times) । उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा में मंडल अध्यक्षों के नामों की घोषणा के बाद अब सबकी निगाहें यूपी के नए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर टिकी हैं, जिस पर जनवरी के अंत तक मुहर लग सकती है। प्रदेश अध्यक्ष की रेस में कई नामों पर चर्चा हो रही है। सूत्रों की मानें तो इस बार पार्टी उत्तर प्रदेश की कमान दलित चेहरे को भी सौंप सकती है। 

उत्तर प्रदेश में 21 फीसदी दलित वोटरों को लुभाने के लिए बीजेपी दलित चेहरे को कमान दे सकती है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर दलित समुदाय से आने वाला कोई भी व्यक्ति नहीं बैठा है. दलित चेहरों में पूर्व एमएलसी विद्यासागर सोनकर का नाम सबसे ऊपर है. उनके अलावा पूर्व सांसद रामशंकर कठेरिया और विनोद सोनकर के नाम भी चर्चा में हैं. जबकि पिछड़े चेहरों के तौर पर अमरपाल मौर्य, बीएल वर्मा, बाबूराम निषाद और ब्राह्मण चेहरों के तौर पर राज्यसभा सदस्य दिनेश शर्मा और बीएसपी से बीजेपी में आए हरीश द्विवेदी का नाम रेस में सबसे आगे चल रहा है.

बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए दलित चेहरे के तौर पर विद्यासागर सोनकर का नाम सबसे ऊपर है. जौनपुर के सुखीपुर निवासी विद्यासागर पढ़ाई के दौरान ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए और फिर बीजेपी के बूथ अध्यक्ष बन गए. वे अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं. विद्यासागर सोनकर फिलहाल विधान परिषद के सदस्य हैं. दलित वर्ग को लुभाने के लिए बीजेपी विद्यासागर सोनकर के नाम पर मुहर लगा सकती है.

रामशंकर कठेरिया आगरा के बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर थे। वे छोटी उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे। दलित उपजाति धानुक समुदाय से आने वाले कठेरिया 2014 में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं। इसके अलावा वे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्यक्ष भी बने। वे दो बार आगरा से सांसद रहे। जबकि 2019 में वे इटावा से सांसद बने। लेकिन 2024 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

विनोद सोनकर 2014 और 2019 में लगातार दो बार कौशाम्बी से जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। वह मूल रूप से प्रयागराज के सदियापुर के रहने वाले हैं। जीत के साथ ही पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। वह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन परामर्शदात्री समिति के सदस्य, वाणिज्य संबंधी स्थायी समिति के सदस्य रह चुके हैं। 2017 में वह यूपी भाजपा के उपाध्यक्ष बने। इसके अलावा 2020 में वह अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव बने। नवंबर 2020 में पार्टी ने उन्हें त्रिपुरा का प्रभारी बनाया। 18 फरवरी 1970 को जन्मे सोनकर की पढ़ाई प्रयागराज में हुई। उन्होंने सीएवी इंटर कॉलेज से 12वीं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

Can the command of UP BJP President be handed over to a Dalit face?

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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