
Sanchar Saathi app controversy: Government removes mandatory pre-installation rule ,Shah Times Exclusive
संचार साथी ऐप पर बढ़ते विवाद के बाद केंद्र सरकार ने हटाई अनिवार्यता
संचार साथी ऐप को लेकर बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन्स में इसके अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन की शर्त हटा दी है। Apple की असहमति और विपक्ष के हमलों के बाद फैसला बदलते हुए सरकार ने कहा कि उपयोगकर्ता ऐप को अपनी इच्छा से इंस्टॉल या डिलीट कर सकते हैं।
📍New Delhi ✍️ Asif Khan
संचार साथी ऐप पर सरकार की बैकफुट वापसी: निजता, विश्वास और तकनीकी पारदर्शिता की कसौटी
संचार साथी ऐप को लेकर चला विवाद आखिरकार उस मोड़ पर आ पहुंचा है जहां केंद्र सरकार को प्री-इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता हटानी पड़ी है। एक ओर सरकार का दावा है कि यह कदम साइबर सुरक्षा और जन-सहभागिता बढ़ाने के लिए था, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक विरोध और तकनीकी कंपनियों, खासकर Apple की असहमति ने पूरे मुद्दे को गोपनीयता और पारदर्शिता की बहस में बदल दिया।
सरकार का तर्क है कि ऐप पूरी तरह सुरक्षित है और नागरिकों को ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने के मकसद से बनाया गया है। बढ़ते डाउनलोड इस बात का संकेत भी देते हैं कि लोगों में साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन प्रश्न यह भी है कि क्या सुरक्षा के नाम पर अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन सही तरीका था?
विपक्ष ने इसे सीधे-सीधे निगरानी और निजता पर हमले के रूप में पेश किया। प्रियंका गांधी, अरविंद केजरीवाल से लेकर अखिलेश यादव तक—सभी ने केंद्र पर नागरिकों की जासूसी करने और लोकतांत्रिक आज़ादी को सीमित करने के आरोप लगाए। यह बहस केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि तकनीकी पारदर्शिता और डिजिटल अधिकारों की भी है।
Apple ने स्पष्ट कहा कि अनिवार्य ऐप इंस्टॉलेशन iPhone यूज़र्स की प्राइवेसी को ख़तरे में डाल सकता है। जब एक वैश्विक तकनीकी कंपनी सुरक्षा को लेकर सवाल उठाती है, तो स्वाभाविक है कि जनता की शंका भी गहरी होती है।
सरकार का अनिवार्यता हटाना एक महत्वपूर्ण संकेत है—कि तकनीकी फैसलों में पारदर्शिता, नागरिकों का विश्वास और निजता का संरक्षण सर्वोपरि होना चाहिए। डिजिटल इंडिया के दौर में यह मुद्दा केवल एक ऐप का नहीं, बल्कि डिजिटल अधिकारों के भविष्य का है।






