
UNSC में चीन का इजरायल पर तीखा हमला: ‘रेड लाइन पार न करें’
United Nations में अमेरिका और चीन आमने-सामने
🚨 “रेड लाइन न करें पार”: UNSC में चीन की खुली चेतावनी, इजरायल पर लगाया अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 20 जून 2025 को एक आपात बैठक के दौरान चीन ने इजरायल पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि सशस्त्र संघर्ष में “लाल रेखा” को पार करना अस्वीकार्य है। चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू कॉन्ग ने इजरायल की ईरान पर हालिया सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का उल्लंघन बताया। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान-इजरायल संघर्ष अपने आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है और ईरान की परमाणु साइट्स को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
🔍 कैसे बढ़ता गया यह टकराव?
🕰️ ईरान-इजरायल युद्ध की टाइमलाइन:
- 9 जून 2025: इजरायल ने सीरियाई सीमा के पास ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया।
- 11 जून: ईरान ने जवाबी कार्रवाई में तेल अवीव पर मिसाइल दागी।
- 13 जून: चीन ने पहली बार इजरायली हमलों पर “गंभीर चिंता” व्यक्त की।
- 17 जून: राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कजाकिस्तान में शांति की अपील की।
- 20 जून: UNSC की आपात बैठक में चीन ने इजरायल का नाम लेकर सख्त आलोचना की।
इजरायल के हमलों में अब तक ईरान के 640 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इजरायल में 40 नागरिक मारे गए हैं।
🧭 संयुक्त राष्ट्र में चीन का दो टूक रुख
फू कॉन्ग ने कहा:
“इजरायल की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संबंधों के मानकों का उल्लंघन है। इससे क्षेत्रीय स्थिरता को गहरा खतरा पैदा हो गया है।”
उन्होंने सशस्त्र संघर्ष में “रेड लाइन” का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे कभी पार नहीं किया जाना चाहिए। ताकत का अंधाधुंध प्रयोग केवल तबाही को न्योता देता है।
🌍 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
🇨🇳 चीन:
- शांतिपूर्ण समाधान का आग्रह
- बातचीत के ज़रिए परमाणु मुद्दे को सुलझाने की अपील
- युद्धविराम पर बल
🇷🇺 रूस:
- चीन के साथ मिलकर क्षेत्रीय शांति को बहाल करने की मांग
- पश्चिमी हस्तक्षेप पर आपत्ति
🇺🇸 अमेरिका:
- इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन
- ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने का आरोप
🇬🇧 ब्रिटेन:
- दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील
- ईरान पर आतंकवाद के समर्थन का आरोप
⚖️ राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
🏛️ राजनीतिक:
- संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका-चीन के बीच कूटनीतिक टकराव तेज
- पश्चिम एशिया में अमेरिका की भूमिका पर सवाल
- चीन की वैश्विक मध्यस्थ की छवि को बल मिला
💰 आर्थिक:
- कच्चे तेल की कीमतों में 12% तक उछाल
- खाड़ी देशों में निवेशकों का विश्वास डगमगाया
- भारत और चीन के आयात-निर्यात पर प्रभाव की आशंका
👥 सामाजिक:
- दोनों देशों में नागरिकों की सुरक्षा चिंता का विषय
- शरणार्थियों की संख्या में वृद्धि
- सामाजिक तनाव और विरोध प्रदर्शन तेज
🧭 अब आगे क्या? – भविष्य की आशंकाएं और दिशा
चीन का स्पष्ट और आक्रामक रुख यह संकेत देता है कि यदि संघर्ष नहीं थमा तो वह कूटनीतिक स्तर पर और अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि चीन फिलहाल सैन्य हस्तक्षेप से बच रहा है और उसकी भूमिका “कूटनीतिक संतुलनकारी” तक सीमित है।
अगर युद्धविराम नहीं हुआ:
- परमाणु संकट और गहराएगा
- पश्चिम एशिया में और देश खींचे जाएंगे
- वैश्विक मंदी की आंशका
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