
Court orders FIR against 12 policemen in Sambhal violence case
संभल हिंसा केस FIR मामले में एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने अपील की बात कही
संभल हिंसा के दौरान घायल हुए युवक के मामले में सीजेएम कोर्ट ने 12 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर के निर्देश दिए।
पुलिस प्रशासन ने आदेश के खिलाफ अपील करने की बात कही है।
📍Sambhal 🗓️January 14, 2026 ✍️Asif Khan
उत्तर प्रदेश के संभल जिले से जुड़े हिंसा मामले में चंदौसी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर की अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत तत्कालीन सर्कल ऑफिसर अनुज चौधरी और संभल सदर कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित कुल 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश हिंसा के दौरान गोली लगने से घायल हुए युवक आलम के पिता यामीन की याचिका पर पारित किया गया।
याचिका में लगाए गए आरोप
यामीन, जो थाना नखासा क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय अंजुमन के निवासी हैं, ने 6 फरवरी 2024 को सीजेएम न्यायालय में अर्जी दाखिल की थी। अर्जी में कहा गया था कि उनका बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को रोज की तरह रस्क यानी टोस्ट बेचने के लिए घर से निकला था। जब वह शाही जामा मस्जिद इलाके में पहुंचा, उस दौरान वहां हिंसा की स्थिति थी और पुलिस कार्रवाई चल रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि इसी दौरान पुलिस की ओर से चलाई गई गोली आलम को लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
इलाज और आगे की कार्रवाई
याचिका के अनुसार, आलम ने अपनी सुरक्षा को लेकर पुलिस से छिपकर निजी तौर पर इलाज कराया। बाद में उसके पिता ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। यामीन ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, तत्कालीन इंस्पेक्टर अनुज तोमर और अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार ठहराते हुए एफआईआर दर्ज कराने की गुहार लगाई।
सुनवाई और फैसला
9 जनवरी 2026 को इस मामले में सुनवाई हुई। अदालत ने याचिका में लगाए गए तथ्यों और दस्तावेजों को देखने के बाद सभी नामजद पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। इस आदेश के तहत उन 12 पुलिसकर्मियों को आरोपी माना गया है, जिनकी भूमिका कथित फायरिंग और घायल होने की घटना से जोड़ी गई है।
वकील की जानकारी
यामीन के अधिवक्ता चौधरी अख्तर हुसैन ने बताया कि अदालत का आदेश मंगलवार शाम को जारी हुआ। देर शाम आदेश निकलने के कारण उन्हें तत्काल लिखित प्रति नहीं मिल सकी, लेकिन मौखिक रूप से आदेश की पुष्टि हो चुकी है। उनके अनुसार अदालत ने सभी नामजद पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश स्पष्ट रूप से दिए हैं।
संभल हिंसा का पृष्ठभूमि
संभल जिले में हुई हिंसा के दौरान इलाके में तनाव की स्थिति बन गई थी। उस समय पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की थी। इसके बाद तीन महिलाओं समेत कुल 79 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। हिंसा से जुड़े मामलों में संभल कोतवाली और नखासा थाने में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई थीं।
चार्जशीट और अन्य आरोपी
इस हिंसा मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क, सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके अलावा लगभग 2750 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया था। 18 जून को विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने 1128 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें सांसद जियाउर्रहमान बर्क समेत 23 आरोपियों के नाम शामिल थे। हालांकि इस चार्जशीट में सुहैल इकबाल का नाम शामिल नहीं किया गया था।
पुलिस प्रशासन का रुख
अदालत के आदेश के बाद संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने मौखिक रूप से जानकारी दी कि फिलहाल एएसपी अनुज चौधरी और इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस आदेश के खिलाफ उच्च अदालत में अपील की जाएगी।
ज्यूडिशल इंक्वायरी का उल्लेख
एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई के अनुसार, संभल हिंसा के पूरे मामले में पहले ही न्यायिक जांच यानी ज्यूडिशल इंक्वायरी हो चुकी है। इस जांच में जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आदेश दिया गया है, उनकी भूमिका की पड़ताल की जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि इस रिपोर्ट को भी अदालत के समक्ष रखा जाएगा।
वर्तमान तैनाती की स्थिति
वर्तमान समय में अनुज चौधरी पदोन्नति के बाद फिरोजाबाद जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात हैं। वहीं उस समय संभल सदर कोतवाली के इंस्पेक्टर रहे अनुज तोमर अभी संभल जिले की चंदौसी कोतवाली में तैनात हैं।
कानूनी प्रक्रिया आगे
अदालत के आदेश और पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया के बाद मामला अब नई कानूनी प्रक्रिया में प्रवेश कर गया है। पुलिस विभाग की ओर से अपील दायर किए जाने के बाद आगे की कार्रवाई उच्च अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी। इस बीच यामीन की ओर से अदालत के आदेश को लागू कराने की मांग भी की जा सकती है।
घटना से जुड़े दस्तावेज
न्यायालय में दाखिल अर्जी में मेडिकल रिपोर्ट, इलाज से जुड़े कागजात और घटना से संबंधित विवरण प्रस्तुत किए गए थे। इन्हीं आधारों पर अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला बनता हुआ माना और एफआईआर के निर्देश जारी किए।
स्थानीय स्तर पर प्रभाव
संभल जिले में इस आदेश के बाद पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर हलचल देखी जा रही है। हिंसा से जुड़े मामलों में पहले से चल रही कानूनी कार्यवाही के बीच यह आदेश एक अलग पहलू जोड़ता है, जिसमें पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच भी शामिल हो गई है।
आगे की सुनवाई
अब सभी पक्षों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस की अपील पर अदालत क्या रुख अपनाती है और क्या एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर रोक लगाई जाती है या उसे लागू किया जाता है। तब तक यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ता रहेगा।






