
Floods paralyze Delhi transport, submerge Punjab villages, lakhs displaced.
Flood Alert: दिल्ली की सड़कों पर पानी, पंजाब की खेती तबाह
Flood Crisis: दिल्ली की रफ्तार थमी, पंजाब के गांव जलमग्न
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New Delhi,(Shah Times)। दिल्ली की धड़कन कही जाने वाली यमुना नदी इस वक्त कहर बरपा रही है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुँचते ही राजधानी की रफ़्तार ठहर गई है। ट्रेनें रद्द, मेट्रो स्टेशनों पर बंदिशें और बस अड्डों में पानी का सैलाब—ये सब मिलकर एक ऐसे शहरी संकट की तस्वीर पेश कर रहे हैं जो केवल ‘बारिश’ का नतीजा नहीं बल्कि policy failure और urban mismanagement की भी कहानी है।
वहीं, पंजाब में हालात इससे भी बदतर हैं। सतलुज और ब्यास की लहरों ने गाँव-गाँव को डुबो दिया है। 43 से अधिक लोगों की मौत, 1900 से ज्यादा गांव जलमग्न, और 3.84 लाख प्रभावित आबादी—यह आँकड़े किसी आपदा से कम नहीं। किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं और पूरे इलाक़े में तबाही का मंजर है।
दिल्ली: यमुना का उफान और ठहरी रफ़्तार
रेलवे पर असर
उत्तर रेलवे के अनुसार 99 ट्रेनें प्रभावित, जिनमें से 40 रद्द और 34 डायवर्ट की गईं।
दिल्ली-ग़ाज़ियाबाद, पानीपत, सहारनपुर, शामली जैसी लोकल सेवाएँ सबसे अधिक प्रभावित।
जम्मूतवी-शालीमार जैसी लंबी दूरी की ट्रेनें भी ठप।
लोहे का पुल, जो यमुना पर सबसे अहम रेल मार्ग है, सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया।
मेट्रो और बस सेवाएँ
ब्लू लाइन का यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन यात्रियों के लिए बंद कर दिया गया।
कश्मीरी गेट ISBT बस अड्डे पर पानी भर जाने से बसें पानी में खड़ी करनी पड़ीं।
DTC मुख्यालय और इंद्रप्रस्थ डिपो तक पानी भर गया, दफ़्तर बंद करना पड़ा।
Public inconvenience: यात्रियों को घंटों ट्रैफ़िक जाम, बसों की कमी और मेट्रो की सीमित सेवाओं का सामना करना पड़ा।
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पंजाब: गांव-गांव डूबा, किसान बेहाल
तबाही के आंकड़े
अब तक 43 मौतें दर्ज।
1902 गांव जलमग्न।
3.84 लाख लोग प्रभावित।
लाखों एकड़ कृषि भूमि बर्बाद।
डैम और नदियाँ
भाखड़ा डैम का जलस्तर 1679 फीट तक पहुँच गया। स्थिति को संभालने के लिए 85 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसने सतलुज किनारे बसे गाँवों में दहशत फैला दी।
लुधियाना के पास ससराली कॉलोनी का बांध कमजोर पड़ा।
सेना और NDRF को मोर्चा संभालना पड़ा।
पठानकोट में पहाड़ दरकने से सड़कें बंद हो गईं।
सरकारी तैयारी
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हर बाढ़ प्रभावित गाँव में एक गजटेड अफसर तैनात किया है। वहीं, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने केंद्र सरकार से तत्काल आर्थिक पैकेज की मांग की।
इन्फ्रास्ट्रक्चर से लेकर अर्थव्यवस्था तक चोट
शहरी असर (Urban Impact)
Delhi transport paralysis: ट्रेनों-मेट्रो का ठप होना रोज़ाना यात्रियों और बिज़नेस लॉजिस्टिक्स दोनों को प्रभावित कर रहा है।
Business disruption: wholesale markets में सप्लाई चैन रुक गई।
Public health risk: गंदा पानी, vector-borne diseases का खतरा।
ग्रामीण असर (Rural Impact)
Punjab agriculture: लाखों हेक्टेयर धान और मक्का की फसल पानी में डूब गई।
Livelihood crisis: छोटे किसान और daily wagers की आय पूरी तरह प्रभावित।
Social impact: हजारों परिवार राहत शिविरों में, displacement और migration की समस्या।
Natural Disaster या Human-made Crisis?
Urban planning failures
दिल्ली में यमुना फ्लडप्लेन पर अवैध कॉलोनियों और commercial hubs ने नदी की natural drainage capacity खत्म कर दी।
Dam management
पंजाब और हिमाचल में समय पर डैम से पानी छोड़ने की proper policy न होना अब बड़े पैमाने पर villages के submergence का कारण बन रहा है।
Drainage and Encroachments
Delhi और Punjab दोनों जगह drainage systems decades से clogged हैं। Unauthorized constructions ने हालात और खराब किए।
Climate change angle
Heavy rainfall और cloudburst events increasing frequency में आ रहे हैं।
South Asia monsoon अब unpredictable हो चुका है।
राहत और बचाव कार्य
दिल्ली में अस्थायी शेल्टर होम खोले गए।
NDRF और SDRF की टीमें rescue boats के साथ active।
पंजाब में सेना को बुलाया गया, villages से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा रहा है।
केंद्र से 2000 करोड़ राहत पैकेज की मांग, साथ ही किसानों को compensation देने की अपील।
मानवीय कहानियाँ (Ground Voices)
कश्मीरी गेट बस अड्डे पर फँसे यात्री: “हम घंटों से पानी में खड़े हैं, बसें नहीं मिल रहीं, बच्चे परेशान हैं।”
लुधियाना के किसान: “धान की पूरी फसल पानी में डूब गई, अब कर्ज़ कैसे चुकाएँगे?”
राहत शिविर में महिला: “घर छूट गया, बच्चों के लिए दूध तक नहीं है।”
ये आवाज़ें बताती हैं कि disaster केवल infrastructure को नहीं तोड़ता, यह मानवीय रिश्तों और सामाजिक ढाँचे को भी प्रभावित करता है।
चेतावनी और भविष्य की राह
दिल्ली और पंजाब की यह बाढ़ केवल एक natural disaster नहीं बल्कि एक policy failure है। जब तक—
urban planning को scientific तरीके से नहीं अपनाया जाएगा,
floodplain encroachment पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी,
dam management और early warning systems को modernize नहीं किया जाएगा,
—तब तक हर साल monsoon के साथ इस तरह का national crisis सामने आता रहेगा।
यह disaster एक wake-up call है कि अब reactive approach छोड़कर preventive governance की ज़रूरत है।






