
Uttarakhand government Jan-Jan Ki Sarkar public camp with officials and citizens – Shah Times
उत्तराखंड: जन-जन के द्वार पहुंची सरकार, 21 हजार शिकायतें हल
उत्तराखंड सरकार के जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम के तहत राज्यभर में व्यापक जनसहभागिता दर्ज की गई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार लाखों नागरिकों को सीधे सेवाएं, प्रमाण पत्र और शिकायत समाधान मिला है।
📍 Dehradun ✍️ Asif Khan
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम राज्य प्रशासन की एक प्रमुख पहल के रूप में सामने आया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को सीधे आम नागरिक तक पहुंचाना, शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करना और शासन व्यवस्था को अधिक संवेदनशील तथा जवाबदेह बनाना है। 17 जनवरी 2026 तक जारी आधिकारिक आंकड़े इस अभियान की व्यापक पहुंच और प्रभाव को दर्शाते हैं।
प्रदेशभर में शिविरों का आयोजन
राज्य के सभी 13 जनपदों में इस कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक कुल 383 शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इनमें से 18 शिविर 17 जनवरी 2026 को आयोजित किए गए। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में भी इन शिविरों का आयोजन किया गया, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस पहल से जुड़ सकें। प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 381 शिविरों के माध्यम से नागरिकों को सीधे सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
नागरिकों की बड़ी भागीदारी
इन शिविरों में कुल 3,07,705 नागरिकों ने भाग लिया। केवल 17 जनवरी को 19,875 लोग शिविरों में पहुंचे। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि कार्यक्रम को लेकर जनता में रुचि और भरोसा लगातार बढ़ा है। शिविरों में पहुंचे लोगों ने अपनी समस्याएं दर्ज कराईं, आवश्यक दस्तावेज बनवाए और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की।
शिकायत निस्तारण पर जोर
जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम के दौरान सरकार को कुल 31,288 शिकायत प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। इनमें से 21,047 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। 17 जनवरी को ही 1,556 शिकायतों का समाधान किया गया। शिकायतों में राजस्व, सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली और पानी से जुड़े मामले प्रमुख रहे। अधिकारियों के अनुसार विभागीय समन्वय के जरिए शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जा रहा है।
प्रमाण पत्रों की डोरस्टेप डिलीवरी
कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 42,116 विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र नागरिकों को जारी किए गए हैं। इनमें जाति, निवास, आय और अन्य जरूरी दस्तावेज शामिल हैं। 17 जनवरी को 2,417 प्रमाण पत्र निर्गत किए गए। प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ी और समय व संसाधनों की बचत हुई।
सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ
राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत अब तक 1,67,940 से अधिक नागरिकों को लाभ पहुंचाया गया है। इनमें पेंशन, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सहायता, शिक्षा से जुड़ी स्कीम, स्वरोजगार और अन्य welfare programs शामिल हैं। 17 जनवरी को 9,701 लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें मौके पर ही सहायता दी जा रही है।
प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी
सरकार के अनुसार प्रत्येक शिविर में संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहते हैं। शिकायतों और आवेदनों को digital record में दर्ज किया जाता है, ताकि follow-up और monitoring आसान हो सके। समाधान की स्थिति की नियमित समीक्षा की जा रही है। जिन मामलों में तुरंत समाधान संभव नहीं होता, उन्हें समयसीमा के साथ संबंधित विभाग को भेजा जाता है।
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों पर फोकस
इस कार्यक्रम में विशेष रूप से पहाड़ी और दूरस्थ इलाकों को प्राथमिकता दी गई है। कई ऐसे गांव, जहां लोगों को पहले जिला मुख्यालय तक पहुंचने में कठिनाई होती थी, वहां शिविर लगाकर सेवाएं दी गईं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इससे governance का दायरा बढ़ा है और लोगों की participation भी मजबूत हुई है।
पारदर्शिता और संवाद
अधिकारियों के अनुसार शिविरों के दौरान नागरिकों से सीधे संवाद किया गया। लोगों को उनकी शिकायतों की स्थिति और समाधान की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। इससे transparency बढ़ी और प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ। कई स्थानों पर नागरिकों ने मौके पर ही समाधान मिलने की बात कही।
आंकड़ों से झलकता प्रभाव
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में शिकायतों का निस्तारण, प्रमाण पत्रों का वितरण और योजनाओं का लाभ एक structured system के तहत किया गया। प्रशासन का कहना है कि यह मॉडल governance को ground level तक ले जाने में मददगार साबित हुआ है।
आगे की योजना
राज्य सरकार के अनुसार जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम को आगे भी जारी रखा जाएगा। आने वाले महीनों में और अधिक शिविर लगाने की तैयारी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा नागरिकों तक सरकारी सेवाएं पहुंच सकें। विभागीय स्तर पर data analysis के जरिए यह देखा जा रहा है कि किन क्षेत्रों में ज्यादा शिकायतें आ रही हैं और वहां सुधार के कदम उठाए जाएं।
नागरिकों की प्रतिक्रिया
शिविरों में पहुंचे कई नागरिकों ने बताया कि उन्हें एक ही स्थान पर कई सेवाएं मिलीं। कुछ लोगों ने कहा कि पहले जिन समस्याओं के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था, उनका समाधान अब जल्दी हो रहा है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सभी शिकायतों का समाधान नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार किया जा रहा है।
समन्वय पर आधारित मॉडल
जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम में जिला प्रशासन, ब्लॉक स्तर के अधिकारी और विभागीय कर्मचारी मिलकर काम कर रहे हैं। इस coordination model के तहत जिम्मेदारियां तय की गई हैं, ताकि काम में देरी न हो। अधिकारियों के अनुसार इससे service delivery system अधिक efficient हुआ है।
राज्यव्यापी कवरेज
देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, बागेश्वर, चंपावत और ऊधम सिंह नगर सहित सभी जिलों में शिविर लगाए गए। हर जिले में स्थानीय जरूरतों के अनुसार सेवाएं प्रदान की गईं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जन-जन की सरकार
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम के जरिए सरकार और नागरिकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित हुआ है। लाखों लोगों की भागीदारी, हजारों शिकायतों का निस्तारण और बड़ी संख्या में प्रमाण पत्रों का वितरण इस पहल के प्रभाव को दर्शाता है।






