
राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर ट्रंप ने दोहराई ग्रीनलैंड की बात
ग्रीनलैंड पर ट्रंप का बयान, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की रुचि दोहराई है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की बात कही है।
📍Washington / Copenhagen, 6 January 2026 ✍️ Asif Khan
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राजधानी वाशिंगटन की ओर उड़ान भरते समय एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से ग्रीनलैंड की जरूरत है। ट्रंप के अनुसार, यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और आने वाले समय में इस पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगले कुछ हफ्तों में ग्रीनलैंड को लेकर बातचीत का समय तय किया जा सकता है।
राष्ट्रपति के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आईं। डेनमार्क सरकार और ग्रीनलैंड के स्वायत्त प्रशासन ने इसे लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की दिलचस्पी कोई नई नहीं है। वर्ष 2019 में भी उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस द्वीप को खरीदने की संभावना का जिक्र किया था। उस समय डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। डेनमार्क सरकार ने स्पष्ट किया था कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है और यह उसके संविधान के तहत एक स्वायत्त क्षेत्र है।
उस दौर में भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा हुई थी। कई देशों ने इसे लेकर अपनी कूटनीतिक राय रखी थी और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर दिया था।
डेनमार्क और ग्रीनलैंड की प्रतिक्रिया
ट्रंप के हालिया बयान के बाद ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अब और दबाव या इशारों की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ग्रीनलैंड बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय कानून और उचित कूटनीतिक माध्यमों के तहत ही होनी चाहिए।
डेनमार्क के अधिकारियों ने भी इस रुख का समर्थन किया। कोपेनहेगन की ओर से कहा गया कि ग्रीनलैंड की कानूनी और राजनीतिक स्थिति स्पष्ट है और इसमें किसी भी बदलाव के लिए संवैधानिक प्रक्रिया जरूरी होगी।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
ट्रंप के बयान के बाद यूरोप के कई देशों ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के समर्थन में बयान जारी किए। फ्रांस ने कहा कि किसी भी देश की सीमाओं में बदलाव बलपूर्वक नहीं किया जा सकता। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने टीवी साक्षात्कार में कहा कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए।
अन्य यूरोपीय देशों ने भी अंतरराष्ट्रीय नियमों और संधियों के पालन पर जोर दिया। नाटो के सदस्य देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया।
ग्रीनलैंड का रणनीतिक महत्व
ग्रीनलैंड भौगोलिक रूप से आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है और उत्तरी अमेरिका तथा यूरोप के बीच सबसे छोटा हवाई और समुद्री मार्ग यहीं से होकर गुजरता है। इसी कारण इसे सैन्य और सुरक्षा दृष्टि से अहम माना जाता है।
अमेरिका पहले से ही उत्तर-पश्चिमी ग्रीनलैंड में पिटुफिक स्पेस बेस में मौजूद है। यहां से बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली-वार्निंग सिस्टम और अन्य निगरानी गतिविधियां संचालित की जाती हैं। वॉशिंगटन ने अतीत में इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर भी विचार किया है।
सैन्य और सुरक्षा पहलू
विशेषज्ञों के अनुसार, आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के कारण ग्रीनलैंड का महत्व और बढ़ गया है। यह इलाका उन समुद्री रास्तों के करीब है जिनका इस्तेमाल रूसी नौसेना और परमाणु पनडुब्बियों द्वारा किया जाता है। इसी वजह से अमेरिका और उसके सहयोगी देश यहां सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखते हैं।
डेनमार्क इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज से जुड़े एक सीनियर रिसर्चर ने समाचार एजेंसी को बताया कि ग्रीनलैंड भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप से जुड़ा हुआ है, लेकिन इसकी राजनीतिक स्थिति डेनमार्क के साथ है। उनके अनुसार, अमेरिका की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोई अन्य बड़ी शक्ति इस क्षेत्र में प्रभाव न बढ़ा सके।
प्राकृतिक संसाधनों की भूमिका
ग्रीनलैंड में खनिज संसाधनों की भी चर्चा होती रही है। 2023 में हुए एक सर्वे के अनुसार, यूरोपीय यूनियन द्वारा महत्वपूर्ण माने जाने वाले कई कच्चे खनिज इस द्वीप पर पाए जाते हैं। इनमें ग्रेफाइट, लिथियम और इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले दुर्लभ तत्व शामिल हैं।
इसके अलावा यहां तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार होने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, पर्यावरणीय कारणों से ग्रीनलैंड प्रशासन ने तेल और गैस की खुदाई पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।
ग्रीनलैंड की अर्थव्यवस्था
ग्रीनलैंड की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से मछली पकड़ने पर निर्भर है। यह क्षेत्र के कुल निर्यात का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा, ग्रीनलैंड को डेनमार्क से हर साल वित्तीय सहायता मिलती है, जो उसके बजट का बड़ा हिस्सा मानी जाती है।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना प्राथमिकता है। इसी कारण संसाधनों के दोहन को लेकर सख्त नीतियां अपनाई गई हैं।
कानूनी स्थिति और स्वायत्तता
ग्रीनलैंड वर्ष 1953 में औपचारिक रूप से डेनमार्क का हिस्सा बना और डेनिश संविधान के अधीन आया। 2009 में इसे व्यापक स्वायत्तता दी गई, जिसके तहत आंतरिक मामलों में स्थानीय सरकार को अधिक अधिकार मिले।
इस स्वायत्तता में यह प्रावधान भी शामिल है कि भविष्य में जनमत संग्रह के जरिए डेनमार्क से पूर्ण स्वतंत्रता पर निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि, अब तक ऐसा कोई जनमत संग्रह नहीं हुआ है।
अमेरिका-डेनमार्क संबंधों पर असर
ट्रंप के बयान को अमेरिका और डेनमार्क के बीच कूटनीतिक संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। दोनों देश नाटो के सहयोगी हैं और सुरक्षा मामलों में लंबे समय से साथ काम करते रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि बयानबाज़ी के बावजूद औपचारिक कूटनीतिक चैनलों के जरिए संवाद जारी रहने की संभावना है। डेनमार्क सरकार ने भी बातचीत के लिए दरवाजे खुले रखने की बात कही है।
आगे की संभावनाएं
राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि आने वाले हफ्तों में ग्रीनलैंड को लेकर और चर्चा हो सकती है। हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की ओर से साफ किया गया है कि किसी भी बातचीत का आधार अंतरराष्ट्रीय कानून और मौजूदा संवैधानिक ढांचा होगा।
फिलहाल, यह मुद्दा बयान और प्रतिक्रियाओं तक सीमित है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पर बनी हुई है कि आगे कूटनीतिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।




