
सुभारती विश्वविद्यालय में रिसर्च, IPR और ग्रीन इनोवेशन सत्रमेरठ में सुभारती विवि का डबल अकादमिक सत्र, ई-साइकिल पहल
सुभारती विवि में संकाय संवाद, नवाचार सत्र और PlusX ई-साइकिल
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ में दो महत्वपूर्ण शैक्षणिक सत्र आयोजित किए गए।
इन आयोजनों में अनुसंधान, नवाचार, IPR, प्रोटोटाइप विकास और हरित परिवहन पर फोकस रहा।सुभारती विश्वविद्यालय में शैक्षणिक विमर्श एवं संकाय संवाद सत्र के साथ-साथ नवाचार, IPR और प्रोटोटाइप विकास पर केंद्रित विशेष सत्र आयोजित हुआ। कार्यक्रम के दौरान PlusX Electric ई-साइकिल का शुभारंभ भी किया गया।
📍 Meerut ✍️ Asif Khan
विश्वविद्यालय में शैक्षणिक विमर्श सत्र का आयोजन
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के सम्मेलन कक्ष में “शैक्षणिक विमर्श एवं संकाय संवाद सत्र” आयोजित किया गया। इस सत्र का मक़सद तालीमी माहौल में वैज्ञानिक संवाद को मज़बूत करना, साक्ष्य-आधारित रिसर्च पर बातचीत को बढ़ावा देना और कृषि व जैविक विज्ञान से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों पर साझा समझ विकसित करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर आर. के. जैन के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि अकादमिक संस्थानों में इस तरह के संवाद मंच रिसर्च कल्चर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार तालीमी तरक़्क़ी तभी मुमकिन है जब संकाय और शोधकर्ता खुलकर सवाल पूछें और अनुभव साझा करें।
उद्घाटन एवं मुख्य संबोधन
सत्र का औपचारिक उद्घाटन डीन–अनुसंधान एवं विकास प्रोफेसर डॉ. वैभव गोयल भारतीया, प्रोफेसर आर. के. जैन और अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रोफेसर डॉ. शाल्या राज ने विशेष संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि रिसर्च और इनोवेशन किसी भी तालीमी इदारे की बुनियाद होते हैं। उन्होंने नतीजों पर आधारित, मआशरती तौर पर प्रासंगिक और असरदार शोध की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
डॉ. शाल्या राज ने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय एक मज़बूत रिसर्च इकोसिस्टम के निर्माण के लिए लगातार काम कर रहा है, ताकि तख़्लीक़ी और उपयोगी शोध को बढ़ावा मिल सके।
मुख्य वक्ता का व्याख्यान
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ. के. पी. रमेशा रहे, जो आईसीएआर–राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु में पूर्व विभागाध्यक्ष और प्रधान वैज्ञानिक रह चुके हैं। उन्होंने डेयरी साइंस, पशु प्रजनन और कृषि अनुसंधान से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
अपने व्याख्यान में उन्होंने सतत पशुधन विकास, कृषि विज्ञान में उभरती चुनौतियों और अनुप्रयुक्त रिसर्च की अहमियत पर बात रखी। उन्होंने कहा कि इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च मौजूदा समस्याओं के हल खोजने में मददगार साबित हो सकती है।
वरिष्ठ शिक्षाविदों की उपस्थिति
इस शैक्षणिक सत्र में विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ शिक्षाविद और प्रशासक मौजूद रहे। इनमें सुभारती मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. महेश कुमार मित्तल, सुभारती डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य प्रोफेसर निखिल श्रीवास्तव, अतिरिक्त निदेशक अनुसंधान डॉ. लुभान सिंह, अतिरिक्त निदेशक फंडिंग एवं ग्रांट्स प्रोफेसर संगीता दयाल, जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अश्विनी कुमार और IPR सेल की प्रभारी डॉ. निशा राणा शामिल रहीं।
इंटरैक्टिव संकाय संवाद
मुख्य भाषण के बाद आयोजित इंटरैक्टिव संकाय संवाद सत्र में रिसर्च मेथडोलॉजी, इनोवेशन स्ट्रेटेजी, फंडिंग अवसरों और पॉलिसी-बेस्ड वैज्ञानिक अनुसंधान पर विस्तार से चर्चा हुई। इस सत्र में कुल 43 संकाय सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी की और अपने सवाल व सुझाव रखे।
धन्यवाद ज्ञापन और समापन
कार्यक्रम का समापन डीन–अनुसंधान एवं विकास प्रोफेसर डॉ. वैभव गोयल भारतीय के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य वक्ता, अतिथियों, संकाय सदस्यों और आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस सत्र को शैक्षणिक उत्कृष्टता की दिशा में एक अहम कदम बताया।
नवाचार, IPR और प्रोटोटाइप विकास सत्र
विशेष शैक्षणिक सत्र का आयोजन
इसी क्रम में स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय में नवाचार, बौद्धिक संपदा अधिकार और प्रोटोटाइप विकास पर केंद्रित एक विशेष शैक्षणिक सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का उद्देश्य रिसर्च को प्रोडक्ट डेवलपमेंट से जोड़ना और IPR से जुड़ी जानकारी को व्यवहारिक स्तर पर साझा करना रहा।




विशेषज्ञ वक्ताओं की सहभागिता
इस सत्र में बंसल आईपी एसोसिएट्स, पंजाब से डॉ. परिक्षित बंसल और श्रीमती कोमल बंसल विशेषज्ञ वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने इनोवेशन-बेस्ड प्रोडक्ट डिजाइन, पेटेंट फाइलिंग, बौद्धिक संपदा संरक्षण और व्यावसायीकरण की प्रक्रिया पर जानकारी दी।
उद्घाटन और संबोधन
कार्यक्रम की शुरुआत विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर आर. के. जैन के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि अकादमिक रिसर्च को बाज़ार के लिए उपयोगी बनाने में इनोवेशन और IPR अवेयरनेस अहम भूमिका निभाते हैं।
सत्र का औपचारिक उद्घाटन डीन–अनुसंधान एवं विकास प्रोफेसर डॉ. वैभव गोयल भारतीया ने किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में स्ट्रक्चर्ड IPR सपोर्ट और प्रोटोटाइप डेवलपमेंट से रिसर्च को नई दिशा मिल सकती है।
विश्वविद्यालय नेतृत्व का संदेश
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रोफेसर डॉ. शाल्या राज ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में रिसर्च और सतत प्रोडक्ट डेवलपमेंट को बढ़ावा देना समय की ज़रूरत है। उन्होंने इंडस्ट्री और अकादमिक सहयोग को मजबूत करने पर बल दिया।
PlusX Electric ई-साइकिल का शुभारंभ
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण विश्वविद्यालय परिसर में PlusX Electric की ई-साइकिल का शुभारंभ रहा। यह पहल सतत विकास और ग्रीन इनोवेशन की दिशा में विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
PlusX Electric एक मोबिलिटी-टेक कंपनी है, जो इलेक्ट्रिक वाहन इकोसिस्टम में इनोवेशन पर काम कर रही है। इस अवसर पर कंपनी के सीईओ इंडिया श्री शिवम सरीन की उपस्थिति रही।
ई-साइकिल पहल की प्रमुख विशेषताएँ
ई-साइकिल लॉन्च के माध्यम से परिसर में पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी, स्वच्छ ऊर्जा आधारित समाधान और स्वस्थ परिवहन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम का समापन
इस सत्र का समापन भी डीन–अनुसंधान एवं विकास प्रोफेसर डॉ. वैभव गोयल भारतीय के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने विशेषज्ञ वक्ताओं, अतिथियों और आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया।







