
ईरान से जुड़े ऑयल शिप रोके गए, भारत ने बढ़ाई समुद्री चौकसीमुंबई तट से दूर तीन तेल टैंकर जब्त, अंतरराष्ट्रीय हलचल
भारत ने अपने समुद्री क्षेत्र में ईरान से जुड़े तीन ऑयल टैंकर जब्त किए हैं। यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी निगरानी के बीच हुई है।भारत ने मुंबई तट से पश्चिम में तीन ऑयल टैंकरों को रोककर जब्त किया है। अधिकारियों ने जांच के लिए जहाजों को मुंबई लाया और समुद्री क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है।
📍 New Delhi ✍️ Asif Khan
भारत की समुद्री सीमा में तीन ऑयल टैंकर जब्त, जांच तेज
समुद्र में बड़ी कार्रवाई
भारत ने इस महीने अपने समुद्री क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ईरान से जुड़े तीन ऑयल टैंकरों को जब्त किया है। अधिकारियों के अनुसार यह कदम अवैध तेल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों के उल्लंघन को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत अपनी समुद्री सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत कर रहा है।
कौन से जहाज रोके गए
सूत्रों के मुताबिक जिन तीन जहाजों को रोका गया है, उनके नाम स्टेलर रूबी, एस्फाल्ट स्टार और अल जफ्जिया बताए गए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये जहाज अक्सर अपनी पहचान बदलते थे। नाम, झंडा और दस्तावेज़ों में बदलाव कर ये तटीय एजेंसियों की निगरानी से बचने की कोशिश करते थे। इन जहाजों के मालिक विदेश में रहते हैं और उनका संचालन जटिल स्वामित्व ढांचे के तहत किया जा रहा था।
मुंबई से 100 नॉटिकल मील दूर कार्रवाई
भारतीय अधिकारियों ने बताया कि मुंबई से लगभग 100 नॉटिकल मील पश्चिम में एक टैंकर से जुड़ी संदिग्ध गतिविधि सामने आई थी। इसके बाद समुद्र में तैनात एजेंसियों ने तीनों जहाजों को रोका। प्रारंभिक जांच के बाद जहाजों को आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया के लिए मुंबई लाया गया।
सोशल मीडिया पोस्ट और हटाया जाना
इस कार्रवाई से जुड़ी जानकारी 6 फरवरी को अधिकारियों की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई थी। हालांकि, कुछ समय बाद यह पोस्ट हटा ली गई। अधिकारियों ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने के लिए ऐसा किया गया।
समुद्री सीमा को लेकर बढ़ी चिंता
भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके समुद्री क्षेत्र का इस्तेमाल जहाज से जहाज ट्रांसफर के लिए न किया जाए। ऐसे ट्रांसफर के जरिए अक्सर तेल कार्गो की वास्तविक उत्पत्ति छिपाई जाती है। यह तरीका प्रतिबंधों से बचने और ट्रैकिंग को मुश्किल बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि भारत अपने समुद्री क्षेत्र को इस तरह की गतिविधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं बनने देगा।
शिप-टू-शिप ट्रांसफर क्या है
शिप-टू-शिप ट्रांसफर में एक जहाज से दूसरे जहाज में खुले समुद्र में तेल या फ्यूल ट्रांसफर किया जाता है। इस प्रक्रिया में अक्सर दस्तावेज़ों में हेरफेर और कार्गो की पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरीके को उच्च जोखिम वाला माना जाता है, खासकर तब जब संबंधित तेल या फ्यूल पर पाबंदी हो।
निगरानी व्यवस्था हुई और सख्त
जहाजों की जब्ती के बाद भारतीय तटरक्षक बल और अन्य समुद्री एजेंसियों ने निगरानी और कड़ी कर दी है। सूत्रों के अनुसार अब लगभग 55 जहाज और 10 से 12 एयरक्राफ्ट भारत के समुद्री क्षेत्र में चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं। इसका उद्देश्य किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करना है।
ईरान का पक्ष
इस पूरे मामले पर नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी की ओर से बयान आया है। कंपनी ने कहा है कि इन जहाजों और उनमें मौजूद कार्गो से उसका कोई संबंध नहीं है। बयान में यह भी कहा गया कि कंपनी अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनों का पालन करती है।
अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों का संदर्भ
इन जहाजों पर अमेरिका की ओर से पहले से प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों के तहत कुछ जहाजों को तेल व्यापार से रोका गया था। अधिकारियों के अनुसार जिन जहाजों को भारत ने जब्त किया है, उनके अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन नंबर उन जहाजों से मेल खाते हैं, जिन पर पहले प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।
भारत और अमेरिका के संबंध
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक स्तर पर संवाद बढ़ा है। इसी महीने वाशिंगटन की ओर से भारतीय सामानों पर आयात शुल्क में कटौती की घोषणा की गई थी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी है।
तेल व्यापार में जोखिम क्यों
जिन तेल और फ्यूल पर प्रतिबंध होता है, उन्हें आमतौर पर भारी छूट पर बेचा जाता है। इसमें जोखिम अधिक होता है, लेकिन मुनाफा भी ज्यादा हो सकता है। बिचौलिए अक्सर कार्गो की असली पहचान छिपाने, गलत दस्तावेज़ तैयार करने और समुद्र में ट्रांसफर का सहारा लेते हैं। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इस तरह के व्यापार पर कड़ी नजर रखती हैं।
शिपिंग डेटा से क्या संकेत मिले
शिपिंग डेटा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के अनुसार जब्त किए गए तीन में से दो टैंकर पहले ईरान से जुड़े रहे हैं। अल जफ्जिया ने वर्ष 2025 में ईरान से जिबूती तक फ्यूल ऑयल ढोया था। स्टेलर रूबी पर एक समय ईरान का झंडा लगा हुआ था, जबकि एस्फाल्ट स्टार मुख्य रूप से चीन के आसपास के समुद्री मार्गों पर सक्रिय रही है।
जांच का अगला चरण
अधिकारियों के अनुसार अब जहाजों के दस्तावेज़, कार्गो और क्रू से जुड़े रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि कहीं भारतीय कानूनों या अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
समुद्री सुरक्षा पर फोकस
भारत लंबे समय से अपने समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहा है। हाल के वर्षों में समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय मार्गों की अहमियत बढ़ी है। इसी वजह से किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया देना प्राथमिकता में शामिल है।
आगे क्या
अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयां भविष्य में भी जारी रहेंगी। भारत यह संदेश देना चाहता है कि उसके समुद्री क्षेत्र में नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच पूरी होने तक जहाजों को जब्त रखा जाएगा और जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी सहयोग लिया जा सकता है।





