
ईरान का भारत को भरोसा: होर्मुज में जहाज सुरक्षित रहेंगे
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय ध्वज वाले जहाजों को कोई खतरा नहीं
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर है। ईरान ने संकेत दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय ध्वज वाले जहाजों को कोई खतरा नहीं होगा। हाल ही में भारत और ईरान के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संवाद और बैठकें हुईं, जिनके बाद यह भरोसा मिला। भारतीय मालवाहक जहाज ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ इस मार्ग से सुरक्षित गुजरते देखे गए।
📍New Delhi ✍️ Asif Khan
भारत-ईरान कूटनीति: होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा संकेत
होर्मुज: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यहां होने वाले किसी भी तनाव या असामान्य गतिविधि का असर न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ता है।
हाल ही में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ ईरान की सैन्य कार्रवाई नौवें दिन में दाखिल हो चुकी है। ऐसे में कई वैश्विक शिपिंग कंपनियां इस मार्ग का इस्तेमाल करने को लेकर सतर्क रुख अपना रही हैं। इस सुरक्षा जोखिम के बीच भारत के दो मालवाहक जहाज ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ को इस मार्ग से सुरक्षित गुजरते देखा गया। समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, ये जहाज बिना किसी बाधा के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे।
भारत-ईरान कूटनीति का असर
इस घटनाक्रम के पीछे प्रमुख कारण भारत और ईरान के बीच सक्रिय कूटनीतिक संपर्क हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागजी ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से टेलीफोन पर बातचीत की, इसके बाद ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह नई दिल्ली पहुंचे और जयशंकर से आमने-सामने मुलाकात की।
इन बैठकों में दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने अनौपचारिक रूप से भरोसा दिलाया है कि मौजूदा तनाव के दौरान भारतीय ध्वज वाले जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाएगा। यह रुख दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों और लगातार संवाद की नीति का परिणाम है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व केवल भारत या ईरान तक सीमित नहीं है। यह मार्ग दुनिया के तेल निर्यात का एक प्रमुख हिस्सा है। अगर यहां तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने इस समय कूटनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने का रणनीतिक कदम उठाया है। इस क्षेत्र में भारत की निरंतर सक्रिय उपस्थिति और संवाद नीति ने भारतीय मालवाहक जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाया।
IRGC और अमेरिका के बीच तनातनी
ईरान की सैन्य इकाई, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। अमेरिका ने कहा था कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है। IRGC ने जवाब में कहा कि वह अमेरिका का इंतजार कर रहा है और किसी भी कदम का जवाब देने के लिए तैयार है।
IRGC ने 1987 में हुए ब्रिजेटन सुपरटैंकर हमले का जिक्र भी किया, यह बता कर कि अमेरिका को ऐसे कदम उठाने से पहले इतिहास से सीख लेनी चाहिए।
मानवीय पहल और भारत की भूमिका
हाल ही में श्रीलंका के पास एक ईरानी जहाज ‘आइरिस दीना’ डूब गया। भारत ने मानवीय आधार पर उस जहाज के ईरानी नाविकों को कोच्चि बंदरगाह पर शरण दी। यह कदम क्षेत्र में भारत की सक्रिय और संतुलित भूमिका को दर्शाता है।
भारत और ईरान के बीच हालिया संवाद ने यह स्पष्ट किया कि द्विपक्षीय रिश्ते और संवाद रणनीति न केवल राजनीतिक बल्कि समुद्री सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। भारतीय मालवाहक जहाजों की आवाजाही की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता और वैश्विक व्यापार में स्थिरता सुनिश्चित करने में इस कूटनीति का बड़ा योगदान है।
रणनीतिक निष्कर्ष
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी तरह का तनाव भारत और कई अन्य देशों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। ईरान द्वारा दिए गए संकेत और भारत की सक्रिय कूटनीति ने यह सुनिश्चित किया कि भारतीय जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने, ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करने और वैश्विक शिपिंग को प्रभावित किए बिना अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सफलता हासिल की है।
भविष्य में यदि क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है तो इसके प्रभाव का अंदाजा अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ेगा। इसी वजह से भारत की सतत कूटनीतिक सक्रियता और संवाद नीति अत्यंत महत्वपूर्ण है।






