
"Massive destruction at Israel’s Soroka Hospital after Iran’s Fateh-2 missile attack; civilians and medical staff injured – Visuals from the ground by Shah Times."
✒️ ईरान के ‘फतह -2’ से इज़रायल हिल गया: जंग के मुहाने पर खड़ा मिडिल ईस्ट
🔥 इज़रायल का कड़ा जवाब: “अब अयातुल्ला ख़ामेनेई को बख़्शा नहीं जाएगा”
ईरान के ‘फतह-2’ मिसाइल हमले ने इज़रायली अस्पतालों को बना दिया जंग का मैदान। नेतन्याहू का ऐलान – ईरान को इसकी क़ीमत चुकानी होगी। जानिए संघर्ष की जड़ें, हथियारों की ताकत, और वैश्विक प्रतिक्रिया।
जब रणनीति बन जाए संघर्ष
मिडिल ईस्ट एक बार फिर जलने लगा है। इस बार वजह है ईरान की घातक मिसाइल प्रणाली ‘फतह-2’ और इज़रायल के हृदय में हुआ एक विनाशकारी हमला। अस्पतालों से लेकर स्टॉक एक्सचेंज तक, हर जगह अफरा-तफरी और चीख-पुकार है। यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा; यह वैश्विक कूटनीति, मानवाधिकार, और भू-राजनीतिक गठजोड़ की बुनियाद को चुनौती देता नज़र आ रहा है।
इज़रायल पर ‘फतह’ मिसाइल हमला: एक अस्पताल बना युद्ध का केंद्र
ईरान की ओर से हुए ताज़ा हमले में बेर्शेबा स्थित ‘सोरोका मेडिकल सेंटर’ सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ।
🧨 कम से कम 89 लोग घायल, दर्जनों ऑपरेशन थिएटर, इमारतें, खिड़कियां और छतें मलबे में तब्दील हो गईं।
🎙️ अस्पताल के डायरेक्टर जनरल डॉ. शलोमी कोदेश के मुताबिक, “वॉर्ड तबाह हो चुके हैं, और घायलों में अधिकतर मरीज़ व अस्पताल कर्मचारी हैं।”
तीसरे वर्ष की मेडिकल छात्रा एरियल हार्पर के अनुसार, “हमले के समय धमाका इतना तेज़ था कि इमारत कांप उठी। मैंने आज तक ऐसा कुछ नहीं सुना।”
इज़रायल की प्रतिक्रिया: ‘अली ख़ामेनेई को अब बचने नहीं दिया जाएगा’
📢 इज़रायली रक्षा मंत्री इज़रायल कात्ज़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“ख़ामेनेई ही अस्पतालों पर हमला करने का आदेश देते हैं। अब उन्हें बख़्शा नहीं जा सकता।”
प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने भी ईरान पर तीखा हमला बोला:
“तानाशाहों से इसकी पूरी क़ीमत वसूल की जाएगी।”
उप विदेश मंत्री शैरेन हास्केल ने इसे ‘आपराधिक हमला’ बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की।
क्या अस्पताल ही था निशाना?
ईरानी सरकारी मीडिया की सफाई आई—
“हमारा निशाना अस्पताल नहीं, उसके पास स्थित इज़रायली सेना के दो सैन्य ठिकाने थे।”
🔎 IRNA के अनुसार:
- लक्ष्य: गाव-यम टेक्नोलॉजी पार्क और कमांड हेडक्वार्टर
- दावा: “अस्पताल धमाकों के कंपन से प्रभावित हुआ, हमला सटीक था।”
लेकिन इज़रायली प्रशासन इसे जानबूझकर किया गया नागरिक केंद्र पर हमला मान रहा है, जिससे दोनों देशों की बयानबाज़ी और टकराव और भड़क उठा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: रूस, चीन और अमेरिका की चुप्पी टूटी
🌍 जैसे ही हमले की खबर आई, रूस और चीन ने इज़रायली जवाबी हमलों की निंदा की।
- रूस: “मानवाधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”
- चीन: “क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर ख़तरा।”
🚨 अमेरिका ने भी चुप्पी तोड़ी, लेकिन संतुलित बयान में दोनों पक्षों से संयम की अपील की।
📢 अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संभावित सैन्य हस्तक्षेप की अटकलें लगाई जा रही हैं।
अटकलें हैं कि इज़रायल ट्रंप को संघर्ष में और गहराई से घसीटने की रणनीति बना रहा है।
परमाणु बिंदु पर तनाव: सच्चाई या रणनीति?
इज़रायल का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार कार्यक्रम में निर्णायक चरण में पहुंच चुका है।
📌 हालांकि इस बात का कोई प्रामाणिक सबूत इज़रायल ने सार्वजनिक नहीं किया।
📌 वहीं ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा:
“हमारा परमाणु कार्यक्रम पूर्णतः शांतिपूर्ण और ऊर्जा उत्पादन के लिए है।”
लेकिन इज़रायल की नीति स्पष्ट है:
“शंका के बिना हमला करो—क्योंकि अगर हम रुके, तो वे नहीं रुकेंगे।”
‘फतेह-2’ और ‘अरश ड्रोन’: ईरान की नई युद्धशक्ति
ईरान के पास अब पारंपरिक हथियारों के अलावा तकनीकी रूप से अत्याधुनिक हथियार भी हैं:
- फतह-2 मिसाइल: उच्च गति, सटीक लक्ष्यभेदन, परमाणु सिरज से लैस की जा सकती है।
- अरश ड्रोन: लंबी दूरी तय करने में सक्षम, राडार से बच निकलने की तकनीक के साथ।
🎯 विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक झलक है, क्योंकि ईरान ने अभी अपने सारे पत्ते नहीं खोले हैं।
क्या युद्ध अनिवार्य हो गया है?
⚔️ इज़रायल का रुख अब बेहद आक्रामक है:
“हमारा सैन्य ऑपरेशन जारी रहेगा।”
💣 दूसरी ओर, ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि हमला दोहराया गया, तो यमन और इराक़ में अमेरिका के ठिकाने निशाने पर होंगे।
📈 इसके बीच तेल की कीमतें, गोल्ड मार्केट, और ग्लोबल इक्विटी बाजार प्रभावित हो रहे हैं।
👉 भारत, जो ईरान और इज़रायल दोनों से रिश्ते रखता है, अब राजनयिक दोधारी तलवार पर चल रहा है।
मानवाधिकार संकट: अस्पताल, आम नागरिक और युद्ध अपराध
👉 युद्ध का सबसे बड़ा शिकार आम नागरिक बनते हैं।
सोरोका अस्पताल के उदाहरण ने यह साफ़ कर दिया है कि संघर्ष अब युद्ध मैदान से हटकर अस्पतालों, स्कूलों और घरों तक पहुंच गया है।
🌐 संयुक्त राष्ट्र, रेड क्रॉस और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी संस्थाएं अब युद्ध अपराध की आशंका जता रही हैं।
👶 ICU में मासूम बच्चे, 👵 वृद्ध नर्सिंग होम में, 🏥 घायल डॉक्टर और स्टाफ—इन सबका जिक्र अब केवल आँकड़ों में सिमटने लगा है।
निष्कर्ष: मध्य पूर्व एक बार फिर “बारूद के ढेर” पर
ईरान-इज़रायल संघर्ष अब न केवल सैन्य या राजनीतिक, बल्कि वैचारिक, धार्मिक और अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।
🧭 संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद, OIC, और यूरोपीय संघ को चाहिए कि वे समय रहते हस्तक्षेप करें, अन्यथा:
“जब दोनों हाथों में हथियार हों, तब शांति की बात करना सबसे बड़ा भ्रम है।”
🌐 भारत, जो ऊर्जा, व्यापार और डिप्लोमेसी के स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम में रणनीतिक स्थान रखता है, उसे एक मजबूत मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए।
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