
LVM3 rocket carrying AST SpaceMobile’s BlueBird Block-2 satellite lifts off from ISRO Sriharikota, as seen by Shah Times.
LVM3 की छठी उड़ान में AST स्पेसमोबाइल का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 लॉन्च
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने LVM3 रॉकेट से AST स्पेसमोबाइल का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 संचार सैटेलाइट लॉन्च किया। यह मिशन न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड के कमर्शियल समझौते के तहत किया गया।
📍Sriharikota✍️ Asif Khan
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन( ISRO) ने बुधवार सुबह 8.55 बजे अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 के जरिए अमेरिकी कंपनी AST स्पेसमोबाइल के ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 कम्युनिकेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह लॉन्च आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया। मिशन को LVM3-M6 नाम दिया गया, जो इस रॉकेट की छठी ऑपरेशनल उड़ान है।
लॉन्च के बाद रॉकेट ने निर्धारित ट्राजेक्टरी पर उड़ान भरी और तय समय पर सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट की दिशा में भेजा। इसरो के अनुसार, सभी स्टेज नॉमिनल तरीके से परफॉर्म करते रहे और मिशन पैरामीटर्स कंट्रोल में रहे।
NSIL और AST स्पेसमोबाइल का समझौता
यह मिशन न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड और AST स्पेसमोबाइल के बीच हुए कमर्शियल एग्रीमेंट के तहत किया गया। NSIL, इसरो की कमर्शियल आर्म है, जो इंटरनेशनल कस्टमर्स के लिए लॉन्च सर्विसेज उपलब्ध कराती है। इस समझौते के तहत भारत से विदेशी कम्युनिकेशन सैटेलाइट का यह एक अहम लॉन्च माना जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि यह मिशन भारत की ग्लोबल लॉन्च मार्केट में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। LVM3 जैसे हेवी-लिफ्ट रॉकेट के जरिए बड़े और हैवी पेलोड को कक्षा में पहुंचाने की क्षमता इस लॉन्च से फिर साबित हुई है।
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट क्या है
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 AST स्पेसमोबाइल की नेक्स्ट जेनरेशन सैटेलाइट सीरीज का हिस्सा है। इसे खास तौर पर उन इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी देने के लिए डिजाइन किया गया है, जहां ग्राउंड बेस्ड नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। कंपनी का उद्देश्य डायरेक्ट-टू-सेल फोन ब्रॉडबैंड सर्विस देना है, जिससे आम स्मार्टफोन बिना किसी खास हार्डवेयर के सैटेलाइट नेटवर्क से जुड़ सके।
यह सैटेलाइट लो अर्थ ऑर्बिट में लगभग 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैनात किया जाएगा। इस ऊंचाई पर मौजूद सैटेलाइट्स लो लेटेंसी और बेहतर कवरेज देने में सक्षम माने जाते हैं।
वजन और आकार
इसरो के अनुसार, ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 का वजन लगभग 6100 से 6500 किलोग्राम के बीच है। यह अब तक भारतीय धरती से लॉन्च किया गया सबसे भारी कमर्शियल पेलोड माना जा रहा है। सैटेलाइट में 223 वर्ग मीटर का बड़ा फेज्ड ऐरे एंटीना लगा है, जो इसे लो अर्थ ऑर्बिट में तैनात होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा कॉमर्शियल कम्युनिकेशन सैटेलाइट बनाता है।
इस बड़े एंटीना की मदद से सैटेलाइट एक साथ कई कवरेज सेल्स को सर्विस दे सकता है। इससे डेटा कैपेसिटी और नेटवर्क स्टेबिलिटी में बढ़ोतरी होती है।
नेटवर्क क्षमता और स्पीड
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 4G और 5G नेटवर्क को सपोर्ट करता है। कंपनी के मुताबिक, यह सैटेलाइट सामान्य स्मार्टफोन को सीधे स्पेस से हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी देगा। प्रति कवरेज सेल में 120 Mbps तक की पीक डेटा स्पीड उपलब्ध कराई जा सकती है।
यह स्पीड वॉइस कॉल, वीडियो कॉल, टेक्स्ट मैसेजिंग, लाइव स्ट्रीमिंग और डेटा सर्विसेज को सपोर्ट करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। इस सिस्टम में यूजर्स को अलग से सैटेलाइट फोन या टर्मिनल की जरूरत नहीं होगी।
दूरदराज इलाकों पर फोकस
AST स्पेसमोबाइल का कहना है कि यह सैटेलाइट ग्लोबल कनेक्टिविटी नेटवर्क का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 24/7 मोबाइल कवरेज उपलब्ध कराना है। इससे पहाड़ी इलाकों, समुद्रों, रेगिस्तानों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी मोबाइल नेटवर्क पहुंचाने में मदद मिलेगी।
कंपनी पहले ही सितंबर 2024 में ब्लूबर्ड 1 से 5 सैटेलाइट्स लॉन्च कर चुकी है। ये सैटेलाइट्स अमेरिका और कुछ अन्य क्षेत्रों में कंटीन्यूअस इंटरनेट कवरेज दे रहे हैं। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को इनसे लगभग दस गुना अधिक बैंडविड्थ कैपेसिटी के साथ डिजाइन किया गया है।
LVM3 रॉकेट की भूमिका
LVM3, जिसे पहले GSLV Mk-III के नाम से जाना जाता था, इसरो का सबसे शक्तिशाली लॉन्च व्हीकल है। इसे पूरी तरह स्वदेशी टेक्नोलॉजी से विकसित किया गया है। रॉकेट की ऊंचाई 43.5 मीटर है और इसका लिफ्ट-ऑफ वजन लगभग 640 टन है।
यह तीन स्टेज वाला रॉकेट है। इसमें दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन बूस्टर्स, एक लिक्विड कोर स्टेज और एक क्रायोजेनिक अपर स्टेज शामिल है। यह कॉन्फिगरेशन भारी पेलोड को लो अर्थ ऑर्बिट और जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट तक ले जाने में सक्षम है।
पेलोड क्षमता
LVM3 की पेलोड कैपेसिटी लो अर्थ ऑर्बिट में लगभग 8000 किलोग्राम तक और जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में लगभग 4200 किलोग्राम तक है। इसी क्षमता के कारण इसे इस मिशन के लिए चुना गया।
इसरो के अधिकारियों के मुताबिक, ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 जैसे बड़े सैटेलाइट को लॉन्च करना LVM3 की हेवी-लिफ्ट कैपेबिलिटी को दर्शाता है।
पिछले मिशन और रिकॉर्ड
LVM3 पहले भी कई अहम मिशन पूरे कर चुका है। इस रॉकेट ने चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वनवेब के दो मिशनों के तहत कुल 72 सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। इसका पिछला मिशन LVM3-M5/CMS-03 था, जिसे 2 नवंबर 2025 को अंजाम दिया गया था।
इन मिशनों के जरिए LVM3 ने अपनी रिलायबिलिटी और कंसिस्टेंट परफॉर्मेंस को साबित किया है।
भविष्य की योजनाएं
इसरो के अनुसार, LVM3 को भविष्य में गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए भी इस्तेमाल किया जाना है। ऐसे में लगातार सफल कमर्शियल और साइंटिफिक मिशन इस रॉकेट के लिए ऑपरेशनल एक्सपीरियंस बढ़ा रहे हैं।
वहीं AST स्पेसमोबाइल अपनी ग्लोबल सैटेलाइट कांस्टेलेशन को और विस्तार देने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य एक ऐसा स्पेस-बेस्ड सेल्युलर ब्रॉडबैंड नेटवर्क तैयार करना है, जो दुनिया भर में मोबाइल कनेक्टिविटी दे सके।
भारत की ग्लोबल भूमिका
इस मिशन के जरिए भारत की ग्लोबल लॉन्च सर्विसेज में मौजूदगी और मजबूत हुई है। विदेशी कमर्शियल सैटेलाइट्स का भारत से लॉन्च होना इसरो और NSIL के लिए एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में भी इस तरह के कमर्शियल लॉन्च मिशन भारत की स्पेस इकॉनमी को बढ़ावा देंगे और इंटरनेशनल कोलैबोरेशन के नए मौके पैदा करेंगे।





