
खांसी और कफ के लिए कैसे फायदेमंद होता है शहद, आइए जानते हैं?

सर्दी के मौसम में खांसी-जुकाम और कफ आम समस्या बन जाती है। बदलता मौसम, प्रदूषण और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। ऐसे में दादी-नानी के घरेलू नुस्खों में शहद का नाम सबसे पहले लिया जाता है। आयुर्वेद से लेकर आधुनिक शोध तक, शहद को खांसी और कफ में राहत देने वाला प्राकृतिक उपाय माना गया है।
शहद के औषधीय गुण
शहद में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। ये गुण गले में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। खांसी के दौरान गले में होने वाली खराश और जलन को शहद की चिकनाई शांत करती है, जिससे बार-बार खांसने की इच्छा कम होती है।
कफ को बाहर निकालने में सहायक
कफ जमने से सांस लेने में परेशानी होती है। शहद एक प्राकृतिक डिमल्सेंट की तरह काम करता है, जो गले की अंदरूनी परत पर सुरक्षा की परत बनाता है। इससे कफ ढीला पड़ता है और शरीर उसे आसानी से बाहर निकाल पाता है। यही कारण है कि शहद को बलगम वाली खांसी में लाभकारी माना जाता है।
नींद में सुधार, खांसी में कमी
रात के समय खांसी अधिक परेशान करती है, जिससे नींद प्रभावित होती है। शहद गले को आराम देकर खांसी की तीव्रता कम करता है। बेहतर नींद शरीर की रिकवरी प्रक्रिया को तेज करती है, जिससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
आधुनिक दृष्टि से
कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि शहद साधारण खांसी में आराम पहुंचाने में सहायक हो सकता है। इसी वजह से कई लोग इसे घरेलू उपचार के रूप में अपनाते हैं। हालांकि, गंभीर या लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी में डॉक्टर की सलाह जरूरी मानी जाती है।
बरतें यह सावधानियां
स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि शहद सभी के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होता। एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शहद नहीं दिया जाना चाहिए। साथ ही, अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से मीठा होता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, शहद खांसी और कफ में राहत देने वाला एक पारंपरिक और प्राकृतिक विकल्प है। यह न केवल लक्षणों को कम करने में मदद करता है, बल्कि शरीर को आराम भी पहुंचाता है। बदलते समय में जब लोग प्राकृतिक और सुरक्षित उपायों की ओर लौट रहे हैं, शहद अपनी उपयोगिता फिर से साबित करता नजर आ रहा है।




