घर पर कैसे करें असली और नकली दूध की पहचान, आइए जानते हैं?

दूध भारतीय रसोई का अनिवार्य हिस्सा है। चाय से लेकर बच्चों के पोषण तक, हर दिन लाखों परिवार दूध पर निर्भर हैं। लेकिन बढ़ती मांग और मुनाफाखोरी के कारण बाजार में मिलावटी और सिंथेटिक दूध की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) समय-समय पर जांच अभियान चलाता है, फिर भी उपभोक्ताओं की सतर्कता बेहद जरूरी है। अब सवाल ये है कि क्या आप लोग घर बैठे असली और नकली दूध की पहचान कर सकते है? तो इसका जवाब है—हां, तो चलिए हम आपको बताते हैं कि आप कुछ सरल तरीकों से असली और नकली दूध की पहचान कर सकते है।
क्या है मिलावटी दूध?
मिलावटी दूध में पानी, स्टार्च, डिटर्जेंट, यूरिया, सिंथेटिक केमिकल या अन्य हानिकारक तत्व मिलाए जा सकते हैं। कई मामलों में तथाकथित “सिंथेटिक दूध” पूरी तरह रसायनों से तैयार किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
घर पर आसानी से करें दूध की जांच?
पानी की मिलावट की जांच
एक साफ, चिकनी सतह (जैसे स्टील की प्लेट) पर दूध की एक बूंद टपकाएं। यदि बूंद धीरे-धीरे नीचे की ओर बहते हुए सफेद लकीर छोड़े, तो दूध शुद्ध हो सकता है। यदि बूंद तुरंत फैल जाए और कोई निशान न छोड़े, तो उसमें पानी मिलाया गया हो सकता है।
दूध को उबालें।
असली और नकली दूध की पहचान करने के लिए असली दूध उबालने पर ऊपर मोटी मलाई की परत बनाता है।नकली या अधिक मिलावटी दूध में मलाई कम या नहीं के बराबर बनती है।उबालते समय अजीब या रासायनिक गंध आए तो सावधान हो जाएं।
दूध के झाग की जांच करें
दूध को बोतल में भरकर जोर से हिलाएं। यदि बहुत अधिक और लंबे समय तक झाग बना रहे, तो उसमें डिटर्जेंट हो सकता है।शुद्ध दूध में झाग जल्दी बैठ जाता है।
स्टार्च की जांच करें
थोड़े दूध में आयोडीन की 2–3 बूंद डालें। रंग नीला पड़ जाए तो समझिए स्टार्च मिलाया गया है। (यह परीक्षण विशेषकर तब उपयोगी है जब दूध असामान्य रूप से गाढ़ा लगे।)
गंध और स्वाद से पहचान करें।
असली दूध में हल्की प्राकृतिक सुगंध होती है। नकली दूध में साबुन या रसायन जैसी गंध आ सकती है। स्वाद में कड़वापन या असामान्य मिठास मिलावट का संकेत हो सकता है।
सेहत के लिए नुकसानदायक
विशेषज्ञों के अनुसार, मिलावटी दूध का नियमित सेवन पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। डिटर्जेंट और यूरिया जैसे रसायन बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक सेवन से लीवर और किडनी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।






