
Iconographic image of Banking, GST and Aadhaar rules coming into effect from November 1, 2025.
जीएसटी से लेकर बैंक तक—क्या बदला आज से
आज से बदल गए ये अहम नियम, जानिए असर
आज से देशभर में बैंकिंग, टैक्स और पहचान से जुड़े कई अहम नियम बदल गए हैं। ये बदलाव सीधे आम आदमी की जेब, पहचान और रोज़मर्रा के कामों पर असर डालेंगे।
📍नई दिल्ली 🗓️ 1 नवंबर 2025✍️ Asif Khan
आज का दिन केवल नई तारीख नहीं है, बल्कि बदलती नीतियों की शुरुआत भी है। सरकार ने कई ऐसे नियमों में संशोधन किया है जो हमारे रोज़मर्रा के जीवन और वित्तीय फैसलों को प्रभावित करेंगे। आइए एक-एक करके समझते हैं कि ये बदलाव क्या हैं और हमारे लिए इनका क्या मतलब है।
1. बैंकिंग में नॉमिनी नियमों का बड़ा बदलाव
1 नवंबर से बैंकों के डिपॉज़िट अकाउंट्स और लॉकरों में ग्राहक अब चार तक नॉमिनी बना सकते हैं।
पहले यह सुविधा सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित थी, लेकिन अब चार लोगों को नामित किया जा सकता है।
अब दो तरीके से नॉमिनी जोड़ने की अनुमति होगी —
साइमल्टेनियस नॉमिनेशन:
ग्राहक एक साथ चार लोगों को नॉमिनी बना सकता है और यह भी तय कर सकता है कि प्रत्येक नॉमिनी को कितना हिस्सा मिलेगा।
सक्सेसिव नॉमिनेशन:
इसमें पहला नॉमिनी मुख्य उत्तराधिकारी होगा, उसके बाद क्रमशः दूसरा, तीसरा और चौथा नॉमिनी अधिकार प्राप्त करेगा।
यह बदलाव बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता और विवादों को कम करेगा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिवार में संपत्ति बंटवारे को लेकर विवाद होता है, तो यह नया नियम उसे काफी हद तक रोक सकता है।
2. GST में नई व्यवस्था
सरकार ने जीएसटी ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए पुराने चार टैक्स स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) की जगह अब सिर्फ दो मुख्य स्लैब — 5% और 18% रखे हैं।
इसके अलावा लक्ज़री और “सिन गुड्स” जैसे महंगे या गैर-ज़रूरी सामानों पर 40% टैक्स लगाया जाएगा।
सरकार का दावा है कि इससे टैक्स सिस्टम सरल होगा और छोटे व्यवसायों को राहत मिलेगी।
हालांकि, सवाल ये उठता है कि क्या कंपनियां यह राहत उपभोक्ताओं तक पहुँचाएंगी या मुनाफा बढ़ाने में लगा देंगी? असली असर अगले कुछ महीनों में दिखाई देगा।
3. आसान GST रजिस्ट्रेशन
1 नवंबर से छोटे व्यापारियों के लिए सरल जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया लागू हो गई है।
अब जिन व्यवसायों की मासिक टैक्स देनदारी ₹2.5 लाख से कम है, उन्हें तीन कार्यदिवस के भीतर ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन मिल जाएगा।
यह कदम ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस की दिशा में अहम है। लेकिन तकनीकी खामियाँ और राज्यों की धीमी डिजिटल प्रक्रियाएँ इस योजना की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं।
4. आधार कार्ड नियमों में बदलाव
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने बच्चों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट को एक साल तक फ्री कर दिया है।
अब 5 से 7 साल और 15 से 17 साल की उम्र में बच्चों के फिंगरप्रिंट, आइरिस और फोटो अपडेट कराने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
वहीं, वयस्कों के लिए डेमोग्राफिक अपडेट (नाम, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर आदि) के लिए ₹75 और बायोमेट्रिक अपडेट (फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैन) के लिए ₹125 का शुल्क तय किया गया है।
यह कदम बच्चों की पहचान को सटीक बनाए रखने के लिए सराहनीय है, मगर ग्रामीण इलाकों में डिजिटल सुविधा की कमी अब भी एक चुनौती बनी हुई है।
5. पेंशन और NPS में नई व्यवस्था
केंद्र और राज्य सरकार के पेंशनर्स को अब 30 नवंबर 2025 तक अपना सालाना “लाइफ सर्टिफिकेट” जमा करना होगा।
साथ ही, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में ट्रांजिशन की आखिरी तारीख भी 30 नवंबर तय की गई है।
यह कदम पेंशन प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव है।
6. क्रेडिट कार्ड शुल्क में बदलाव
SBI क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं को अब डिजिटल वॉलेट या थर्ड-पार्टी ऐप्स पर ₹1000 से अधिक का भुगतान करने पर 1% अतिरिक्त चार्ज देना होगा।
जैसे कि अगर आप पेटीएम या फोनपे पर ₹1000 से अधिक लोड करते हैं या क्रेड या मोबिक्विक से स्कूल की फीस भरते हैं, तो 1% शुल्क लगेगा।
बदलाव या बोझ?
देखने में ये सारे बदलाव आम आदमी के हित में लगते हैं — आसान रजिस्ट्रेशन, मुफ्त आधार अपडेट, और पारदर्शी नॉमिनेशन सिस्टम।
मगर हकीकत ये है कि जब भी नया नियम आता है, तो उसकी समझ और उसके अमल में समय लगता है।
ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की कमी, बैंकों की धीमी प्रक्रियाएँ और जागरूकता की कमी लोगों को पीछे छोड़ सकती हैं।
सरकार का मकसद अगर सच में “सुगमता” है, तो उसे जागरूकता और क्रियान्वयन दोनों पर ध्यान देना होगा।






