
A rare pair of melanistic leopards captured on trap camera in Kurseong forest division. Shah Times
कुर्सियांग जंगल में दुर्लभ काले तेंदुओं की जोड़ी कैमरे में कैद
कुर्सियांग वन क्षेत्र में पहली बार काले तेंदुओं की जोड़ी दर्ज
कुर्सियांग वन क्षेत्र में ट्रैप कैमरे में दो मेलानिस्टिक तेंदुए एक साथ कैद हुए हैं।
वन विभाग के अनुसार यह न केवल कुर्सियांग बल्कि देश के लिए भी एक दुर्लभ रिकॉर्ड माना जा रहा है।
📍Kurseong, West Bengal 🗓️ February 3, 2026✍️Asif Khan
कुर्सियांग जंगल में दुर्लभ रिकॉर्ड
कुर्सियांग के घने जंगलों से एक असाधारण वन्यजीव दृश्य सामने आया है। हाल ही में लगाए गए ट्रैप कैमरों में दो मेलानिस्टिक तेंदुए एक साथ दिखाई दिए हैं। यह घटना वन विभाग के रिकॉर्ड में पहली बार दर्ज की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले इस क्षेत्र में केवल एक काले तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी, लेकिन जोड़ी के रूप में यह पहली बार कैमरे में कैद हुआ है।
वन विभाग की आधिकारिक पुष्टि
कुर्सियांग फॉरेस्ट डिवीजन के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर देवेश पांडे ने बताया कि यह दृश्य ऐतिहासिक माना जा रहा है। उनके मुताबिक, ट्रैप कैमरे जंगल के भीतर लगाए गए थे और फुटेज हाल ही में रिकॉर्ड हुआ। उन्होंने कहा कि कुर्सियांग फॉरेस्ट डिवीजन के इतिहास में यह पहला मौका है जब काले तेंदुओं की जोड़ी दर्ज की गई है।
देश स्तर पर दुर्लभ घटना
वन अधिकारियों का कहना है कि भारत में जंगली हालात में मेलानिस्टिक तेंदुओं की जोड़ी का एक साथ दिखना बेहद कम दर्ज हुआ है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, यह मामला देश में भी शुरुआती उदाहरणों में गिना जा सकता है। इस कारण वन विभाग और वन्यजीव शोधकर्ताओं के बीच इस रिकॉर्ड को लेकर खास रुचि देखी जा रही है।
ट्रैप कैमरे से मिली तस्वीरें
यह जोड़ी जंगल के भीतर लगे ट्रैप कैमरों में कैद हुई। सुरक्षा कारणों से वन विभाग ने सटीक लोकेशन साझा नहीं की है। हालांकि, अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह फुटेज बगोरा फॉरेस्ट रेंज के किसी हिस्से से रिकॉर्ड हुई है। इससे पहले भी इसी क्षेत्र में काले तेंदुए की मौजूदगी दर्ज की गई थी।
कुर्सियांग का वन क्षेत्र
कुर्सियांग, सिलीगुड़ी से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित एक पहाड़ी कस्बा है। यह इलाका अपने घने जंगल, ऊंचे चीड़ के पेड़ों, रोडोडेंड्रॉन और सफेद ऑर्किड्स के लिए जाना जाता है। यहां की भौगोलिक स्थिति और ऊंचाई वन्यजीवों के लिए अनुकूल मानी जाती है।
पहले भी दिख चुके हैं काले तेंदुए
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी 2025 में कुर्सियांग फॉरेस्ट डिवीजन के बगोरा इलाके में एक अकेला काला तेंदुआ देखा गया था। इसके अलावा, सेंट मैरी और गिड्डे पहाड़ इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों ने भी समय-समय पर काले तेंदुए के दिखने की सूचना दी थी।
ऊंचाई और पर्यावरण
जहां यह जोड़ी देखी गई, वह इलाका समुद्र तल से लगभग 6,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस ऊंचाई और घने जंगलों में मेलानिस्टिक जानवरों की मौजूदगी पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़ी हो सकती है।
संरक्षण स्थिति और वैश्विक दर्जा
वन अधिकारियों के मुताबिक, मेलानिस्टिक तेंदुए इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर की रेड डेटा बुक में वल्नरेबल श्रेणी में शामिल हैं। यह सूची दुनिया भर में प्रजातियों की संरक्षण स्थिति का आकलन करती है। भारत में इनकी मौजूदगी सीमित क्षेत्रों तक ही दर्ज हुई है।
भारत में अन्य क्षेत्र
जानकारी के अनुसार, काले तेंदुए मुख्य रूप से ओडिशा और मध्य प्रदेश के जंगलों में पाए जाते हैं। इसके अलावा, दार्जिलिंग और कालिम्पोंग की ऊपरी पहाड़ियों में भी इनके रिकॉर्ड मिले हैं। कुर्सियांग में जोड़ी का दिखना इस सूची में एक नया स्थान जोड़ता है।
अन्य दुर्लभ वन्यजीव भी दर्ज
कुर्सियांग फॉरेस्ट डिवीजन में हाल के वर्षों में कई अन्य दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज हुई है। जनवरी 2026 में वन अधिकारियों ने एक काले हिरण के दिखने की पुष्टि की थी। इससे पहले काला सिवेट और मेलानिस्टिक टैरेंटुला के भी रिकॉर्ड सामने आए थे।
शोध और निगरानी की तैयारी
वन विभाग का कहना है कि इतने छोटे वन क्षेत्र में मेलानिस्टिक जानवरों और कीड़ों की संख्या का सामने आना महत्वपूर्ण है। अधिकारियों के मुताबिक, यह संभव है कि इन प्रजातियों ने विशेष अनुकूलन क्षमता विकसित की हो। इस पर आगे विस्तृत रिसर्च की जरूरत बताई जा रही है।
स्थानीय जागरूकता अभियान
वन विभाग ने स्थानीय निवासियों के बीच वन्यजीव संरक्षण को लेकर अवेयरनेस ड्राइव शुरू की है। लोगों को जंगल में अनावश्यक प्रवेश से बचने और वन्यजीवों के प्रति सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
डिजिटल सर्विलांस का विस्तार
अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में और ज्यादा फॉरेस्ट एरिया में डिजिटल सर्विलांस बढ़ाने की योजना है। इसके तहत अतिरिक्त ट्रैप कैमरे और मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जाएंगे, ताकि वन्यजीव गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
संरक्षण के लिहाज से अहम संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के दृश्य वन क्षेत्र की जैव विविधता को दर्शाते हैं। हालांकि, वन विभाग ने साफ किया है कि इस मामले में किसी भी तरह का निष्कर्ष निकालने से पहले वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।




