
मायानगरी में डर का कारोबार और लॉरेंस बिश्नोई गैंग की नई चाल
रोहित शेट्टी फायरिंग के बाद बॉलीवुड की सुरक्षा पर सवाल
एक नाम, कई धमकियां: शुभम लोनकर और बॉलीवुड का खौफ
मुंबई में रोहित शेट्टी के घर के बाहर हुई फायरिंग ने सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि पूरे फिल्म जगत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े शुभम लोनकर का नाम सामने आने के बाद डर, धमकी और फिरौती का पुराना पैटर्न फिर चर्चा में है।
रोहित शेट्टी फायरिंग केस ने दिखा दिया कि कैसे जेल के भीतर बंद गैंगस्टर भी बाहर खौफ फैला रहे हैं। इंडस्ट्री एसोसिएशन की मुख्यमंत्री से सुरक्षा की मांग, पुलिस की जांच, और शुभम लोनकर की पृष्ठभूमि इस कहानी के अहम पहलू हैं।
📍 Mumbai ✍️ Asif Khan
मायानगरी और नया डर
मुंबई को अक्सर सपनों का शहर कहा जाता है। यहां हर सुबह किसी न किसी नए चेहरे की उम्मीद के साथ होती है। लेकिन इन दिनों फिल्म इंडस्ट्री के गलियारों में उम्मीद से ज्यादा डर की बातें हैं। रोहित शेट्टी के घर के बाहर हुई फायरिंग ने यह साफ कर दिया कि खौफ अब परदे के पीछे नहीं, बल्कि दरवाजे तक पहुंच चुका है। सवाल सिर्फ एक फायरिंग का नहीं है, सवाल उस सिस्टम का है जो बार बार चेतावनी के बाद भी सुस्त नजर आता है।
फायरिंग और उसका संदेश
इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। यह बात राहत देती है, लेकिन असली चिंता वहां से शुरू होती है जहां सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी ली जाती है। पोस्ट में साफ कहा गया कि यह सिर्फ ट्रेलर है। यह लफ्ज अपने आप में बहुत कुछ कहता है। मतलब साफ था, अगर बात नहीं मानी गई तो अगला कदम और खतरनाक होगा। यह अंदाज नया नहीं है। पहले भी धमकी, फिर गोली, और उसके बाद फिरौती का खेल देखा गया है।
शुभम लोनकर का नाम क्यों अहम है
शुभम लोनकर कोई अचानक उभरा नाम नहीं है। पुलिस रिकॉर्ड में उसका जिक्र पहले से है। पुणे का रहने वाला यह शख्स धीरे धीरे उस नेटवर्क का हिस्सा बना जिसे आज लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से जाना जाता है। यह वही गैंग है जो सलाखों के पीछे रहते हुए भी बाहर अपना असर बनाए रखता है। लोग अक्सर पूछते हैं, जेल में बंद आदमी बाहर कैसे डर फैला सकता है। जवाब सीधा है, नेटवर्क और भरोसेमंद मोहरे।
जेल के भीतर, नेटवर्क बाहर
लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की जेल में है। उसका करीबी गोल्डी बराड़ विदेश से नेटवर्क संभालता है। शुभम जैसे लोग जमीन पर काम करते हैं। यही वजह है कि हर गिरफ्तारी के बाद भी डर खत्म नहीं होता। एक को पकड़ो, दूसरा तैयार मिलता है। यह सिलसिला तब तक चलता रहता है जब तक सिस्टम जड़ों पर वार न करे।
इंडस्ट्री की चुप्पी और मजबूरी
फिल्म इंडस्ट्री में बहुत से लोग खुलकर बोलना नहीं चाहते। वजह समझना मुश्किल नहीं है। धमकी मिलने के बाद हर कोई अपने परिवार के बारे में सोचता है। कोई भी यह रिस्क नहीं लेना चाहता कि उसकी बात से हालात और बिगड़ जाएं। यही चुप्पी गैंग के हौसले बढ़ाती है। डर का फायदा उठाकर फिरौती मांगी जाती है, कॉल किए जाते हैं, और सामने वाला मजबूर हो जाता है।
एसोसिएशन का खत और उसकी अहमियत
इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को खत लिखा है। यह एक औपचारिक कदम लगता है, लेकिन इसके मायने गहरे हैं। खत में साफ कहा गया कि यह सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पूरी इंडस्ट्री के लिए चेतावनी है। रोहित शेट्टी जैसे नाम पर फायरिंग का मतलब है कि कोई भी सुरक्षित नहीं है। एसोसिएशन की मांग है कि जांच तेज हो और सुरक्षा पुख्ता की जाए।
सुरक्षा का सवाल
अक्सर देखा गया है कि किसी बड़ी घटना के बाद कुछ समय के लिए सुरक्षा बढ़ा दी जाती है। गाड़ियां तैनात हो जाती हैं, पुलिसकर्मी नजर आने लगते हैं। लेकिन वक्त बीतते ही सब पहले जैसा हो जाता है। सवाल यह है कि क्या सुरक्षा सिर्फ नामी चेहरों तक सीमित रहेगी, या पूरे सिस्टम में बदलाव आएगा। क्योंकि गैंग के लिए फर्क नहीं पड़ता कि सामने सुपरस्टार है या फाइनेंसर।
शुभम की पृष्ठभूमि
पुलिस जांच में सामने आया कि शुभम कभी सेना में जाना चाहता था। परीक्षा में नाकामी के बाद उसकी जिंदगी ने दूसरा मोड़ लिया। यह कहानी कई युवाओं जैसी है, फर्क बस इतना है कि उसने गलत रास्ता चुना। एनसीसी के एक कार्यक्रम के दौरान उसका संपर्क गलत लोगों से हुआ। वहां से धीरे धीरे वह अपराध की दुनिया में उतरता चला गया। 2018 के बाद वह पूरी तरह इस नेटवर्क का हिस्सा बन गया।
डेयरी से डर तक
पुणे में उसने डेयरी शुरू की थी। बाहर से देखने पर एक सामान्य कारोबारी। लेकिन अंदर ही अंदर वह हथियार सप्लाई और धमकी के काम में लगा था। यह दोहरी जिंदगी ही उसे लंबे समय तक बचाती रही। लोग पूछते हैं, कोई इतना बड़ा नेटवर्क कैसे चलाता है। जवाब है, सामान्य दिखने की कला।
पुराने मामलों की परछाई
सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग, बाबा सिद्दीकी की हत्या, और अब रोहित शेट्टी का मामला। इन सब में एक पैटर्न दिखता है। धमकी, फिर हिंसा, फिर डर का माहौल। हर बार जांच होती है, कुछ लोग पकड़े जाते हैं, लेकिन मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल रहता है। यही वजह है कि हर नई घटना पुराने जख्म ताजा कर देती है।
पुलिस की जांच और उसकी चुनौतियां
मुंबई क्राइम ब्रांच ने अब तक पांच लोगों को हिरासत में लिया है। मुख्य शूटर फरार है। जांच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का कनेक्शन सामने आया है। लेकिन असली चुनौती यह है कि सबूत इतने मजबूत हों कि केस अदालत में टिक सके। वरना इतिहास गवाह है, कमजोर केस का अंजाम सबने देखा है।
क्या सिर्फ बॉलीवुड निशाने पर है
यह मान लेना गलत होगा कि खतरा सिर्फ फिल्मी दुनिया तक सीमित है। जहां पैसा और शोहरत होती है, वहां गैंग की नजर भी होती है। आज बॉलीवुड है, कल कोई और सेक्टर हो सकता है। इसलिए इसे सिर्फ सेलिब्रिटी समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सिस्टम पर सवाल
यहां एक असहज सवाल उठता है। क्या हम हर बार घटना के बाद जागेंगे और फिर भूल जाएंगे। या फिर इस बार कुछ ठोस होगा। गैंगस्टर का नेटवर्क तोड़ना आसान नहीं, लेकिन नामुमकिन भी नहीं। इसके लिए लगातार कार्रवाई, गवाहों की सुरक्षा, और टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल जरूरी है।
आगे का रास्ता
रोहित शेट्टी केस एक चेतावनी है। इंडस्ट्री, पुलिस और सरकार तीनों को मिलकर सोचना होगा। सिर्फ गाड़ियों की संख्या बढ़ाने से बात नहीं बनेगी। जब तक डर का कारोबार मुनाफे में रहेगा, तब तक ऐसे नाम सामने आते रहेंगे। असली लड़ाई डर के खिलाफ है।
आखिरी बात
मुंबई की चमक तभी कायम रह सकती है जब लोग बिना खौफ काम कर सकें। सवाल यह नहीं कि अगला निशाना कौन होगा। सवाल यह है कि क्या यह सिलसिला यहीं रुकेगा। जवाब सिस्टम के हाथ में है, और वक्त बहुत कम है।





