
फैटी लिवर से बचने के लिए अपनी जीवनशैली में शामिल करें यह उपाय?

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी, बदलते लाइफस्टाइल और खान-पान के चलते फैटी लिवर एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। पहले यह बीमारी शराब पीने वालों से जोड़ी जाती थी, लेकिन अब बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी इसकी चपेट में हैं जो शराब का सेवन नहीं करते। इसे नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते सावधानी न बरती जाए तो फैटी लिवर आगे चलकर लिवर सूजन, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर फेलियर का कारण बन सकता है। ऐसे में बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है।
फैटी लिवर से बचने के उपाय
संतुलित आहार का सेवन करें।
फैटी लिवर से बचने के लिए सबसे ज़रूरी है संतुलित और पौष्टिक आहार। अत्यधिक तला-भुना, फास्ट फूड, मीठे पेय और रिफाइंड शुगर लिवर में चर्बी जमा करने का काम करते हैं। इसके बजाय हरी सब्ज़ियां, फल, साबुत अनाज, दालें और पर्याप्त प्रोटीन को भोजन में शामिल करना चाहिए।
वजन पर नियंत्रण रखें।
मोटापा फैटी लिवर का बड़ा कारण माना जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर के कुल वजन में 5–10 प्रतिशत की कमी भी लिवर की चर्बी को कम करने में मददगार हो सकती है। इसके लिए डाइट के साथ-साथ नियमित व्यायाम जरूरी है।
नियमित व्यायाम अपनाएं
रोज़ाना कम से कम 30 मिनट की तेज़ चाल से पैदल चलना, योग, साइक्लिंग या हल्का व्यायाम लिवर को स्वस्थ रखने में सहायक होता है। शारीरिक गतिविधि से शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है, जिससे लिवर में चर्बी जमा नहीं होती।
शराब और धूम्रपान से दूरी बनाना
शराब का अत्यधिक सेवन लिवर को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है। फैटी लिवर से बचने के लिए शराब से पूरी तरह परहेज़ करना या उसका सेवन बहुत सीमित करना चाहिए। साथ ही धूम्रपान भी लिवर की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना
डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं फैटी लिवर के खतरे को बढ़ाती हैं। इसलिए समय-समय पर ब्लड टेस्ट और डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, ताकि बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही पहचान हो सके।
निष्कर्ष
फैटी लिवर कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, लेकिन लापरवाही इसे गंभीर बना सकती है। स्वस्थ खान-पान, नियमित व्यायाम और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर न केवल फैटी लिवर से बचा जा सकता है, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाया जा सकता है।





