
Gulf nations’ last-minute diplomacy helped ease Iran-US tensions, says officials. Shah Times
ईरान-अमेरिका तनाव में खाड़ी देशों की कूटनीति से हमला टला
सऊदी, कतर, ओमान की पहल से मध्य पूर्व में संकट टला
📍Riyadh ✍️Asif Khan
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देशों की सक्रिय कूटनीति निर्णायक साबित हुई। सऊदी अरब, कतर और ओमान के हस्तक्षेप से संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई टल गई।
बढ़ता तनाव और युद्ध की आशंका
मध्य पूर्व में बीते दिनों ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तेज़ी से बढ़ा। ईरान में जारी प्रदर्शनों पर कार्रवाई को लेकर वॉशिंगटन की चेतावनियों के बाद हालात ऐसे बने कि सैन्य टकराव की आशंका खुलकर सामने आ गई। इस दौरान खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाई गई और कुछ स्थानों पर कर्मियों की आवाजाही सीमित की गई। क्षेत्रीय देशों के लिए यह स्थिति सीधे सुरक्षा जोखिम से जुड़ी थी।
खाड़ी देशों की सक्रिय कूटनीति
सऊदी अरब, कतर और ओमान ने हालात बिगड़ने से पहले समन्वित कूटनीतिक पहल की। इन देशों ने वॉशिंगटन और तेहरान, दोनों से संपर्क साधा। खाड़ी अधिकारियों के अनुसार, यह प्रयास आखिरी वक्त में किया गया ताकि किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले संवाद का रास्ता खुला रहे। अधिकारियों ने इसे एक्टिव डिप्लोमेसी बताया, जिसका मकसद क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना था।
वॉशिंगटन से संवाद
कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, सऊदी, कतरी और ओमानी प्रतिनिधियों ने अमेरिकी प्रशासन को संभावित सैन्य कार्रवाई के नतीजों से अवगत कराया। उन्हें यह समझाया गया कि ईरान पर हमला पूरे क्षेत्र में ग्रेव ब्लोबैकस पैदा कर सकता है। क्षेत्रीय आपूर्ति मार्ग, ऊर्जा ढांचा और नागरिक सुरक्षा पर इसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते थे।
तेहरान को सख़्त संदेश
इसी दौरान खाड़ी देशों ने तेहरान को भी स्पष्ट संदेश दिया। सूत्रों के अनुसार, ईरान को बताया गया कि खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों या जहाज़ों पर किसी भी तरह की कार्रवाई से उसके क्षेत्रीय संबंधों को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। यह संदेश इस उद्देश्य से दिया गया कि किसी भी जवाबी कदम से पहले संयम बरता जाए।
सैन्य ठिकानों पर बढ़ी सतर्कता
तनाव के चरम पर कतर स्थित अल-उदेद एयरबेस सहित कई ठिकानों पर सुरक्षा स्तर बढ़ाया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने एहतियातन कुछ कर्मियों को अस्थायी रूप से हटाने के निर्देश दिए। क्षेत्रीय उड़ानों और समुद्री गतिविधियों पर भी निगरानी कड़ी की गई। हालांकि, कूटनीतिक प्रयासों के सफल होने के बाद स्थिति में धीरे-धीरे सामान्यता लौटने लगी।
आश्वासन और रुख में बदलाव
खाड़ी देशों के हस्तक्षेप के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में बदलाव देखा गया। उन्होंने कहा कि उन्हें दूसरी ओर से महत्वपूर्ण सूत्रों के माध्यम से यह आश्वासन मिला है कि ईरान प्रदर्शनकारियों के मामले में कठोरतम दंड नहीं देगा। इसके बाद वॉशिंगटन ने सैन्य विकल्प को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया।
सऊदी अधिकारियों का पक्ष
सऊदी अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी को बताया कि यह पूरी प्रक्रिया एक अनिद्रा भरी रात जैसी थी, जिसमें संकट को डिफ्यूज करने की कोशिश की गई। अधिकारी के अनुसार, लक्ष्य केवल युद्ध को टालना नहीं, बल्कि क्षेत्र को अनियंत्रित स्थिति में जाने से रोकना था।
कतर और ओमान की भूमिका
कतर ने अपने संवाद चैनलों और ओमान ने मध्यस्थता के पारंपरिक अनुभव का उपयोग किया। ओमान पहले भी ईरान और पश्चिमी देशों के बीच संवाद में भूमिका निभाता रहा है। इस बार भी दोनों देशों ने शांतिपूर्ण समाधान के लिए निरंतर संपर्क बनाए रखा।
क्षेत्रीय प्रतिक्रिया
खाड़ी देशों में इस घटनाक्रम को राहत के रूप में देखा गया। क्षेत्रीय बाजारों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े संकेतकों में अस्थिरता कम हुई। राजनयिक हलकों में माना गया कि समय रहते हस्तक्षेप नहीं होता तो हालात तेजी से बिगड़ सकते थे।
ईरान की प्रतिक्रिया और चेतावनियां
इससे पहले तेहरान ने चेतावनी दी थी कि किसी भी अमेरिकी कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों और जहाज़ों का उल्लेख करते हुए ईरानी अधिकारियों ने सख़्त बयान दिए थे। यही कारण था कि क्षेत्रीय देशों ने स्थिति को गंभीरता से लिया।
मीडिया फुटेज और बयान
इसी बीच ईरान के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक फुटेज ने तनाव को और बढ़ा दिया। रिपोर्टों के अनुसार, एक कार्यक्रम के दौरान ऐसे पोस्टर दिखाए गए जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ धमकी भरे संदेश थे। यह प्रसारण उस समय हुआ जब तेहरान में सुरक्षा बलों के अंतिम संस्कार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे।
पेंसिल्वेनिया हमले का संदर्भ
फुटेज में 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप पर हुए हमले का संदर्भ भी दिखाया गया। उस घटना में गोली उनके कान को छूते हुए निकल गई थी और वे सुरक्षित बच गए थे। इस संदर्भ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी।
अमेरिकी जांच एजेंसियों की जानकारी
अमेरिकी न्याय विभाग के सार्वजनिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए रिपोर्टों में कहा गया कि 2024 में एक कथित ईरान-निर्देशित साजिश को नाकाम किया गया था। इस मामले में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का जिक्र किया गया, हालांकि ईरान ने ऐसे आरोपों से इनकार किया है।
क़ासिम सुलेमानी प्रकरण का प्रभाव
जनवरी 2020 में क़ासिम सुलेमानी की हत्या के बाद से ईरान और अमेरिका के संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। उस घटना के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी और प्रतिबंधों का दौर तेज़ हुआ, जिसका असर अब तक दिखता रहा है।
संवाद जारी रखने पर सहमति
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, मौजूदा संकट टलने के बावजूद संवाद जारी रखने पर सहमति बनी है। खाड़ी देशों का मानना है कि भरोसे को मजबूत करने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए निरंतर बातचीत ज़रूरी है।
सैन्य गतिविधियों में कमी
बुधवार शाम से सुरक्षा अलर्ट में कमी लाई गई। सैन्य विमान और कर्मी अपनी पुरानी पोजीशन पर लौटने लगे। इससे संकेत मिला कि तत्काल टकराव का खतरा कम हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें
यूरोपीय और एशियाई राजनयिक हलकों ने भी इस घटनाक्रम पर नज़र बनाए रखी। कई देशों ने संयम और संवाद पर ज़ोर दिया। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े सूत्रों ने क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों का स्वागत किया।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही तात्कालिक संकट टल गया हो, लेकिन मूल मुद्दे बने हुए हैं। प्रतिबंध, क्षेत्रीय प्रभाव और आंतरिक हालात जैसे कारक आने वाले समय में फिर चुनौती बन सकते हैं। ऐसे में खाड़ी देशों की कूटनीतिक सक्रियता को आगे भी अहम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, सऊदी अरब, कतर और ओमान की समन्वित पहल ने एक बड़े सैन्य संकट को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस घटनाक्रम ने दिखाया कि समय पर किया गया संवाद और क्षेत्रीय सहयोग तनावपूर्ण हालात में भी असरदार हो सकता है।






